चंडीगढ़, सतीश भारद्वाज : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा है कि आवास को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार मानते हुए है, चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा झुग्गी तोड़ने के आदेश को रद कर दिया है।मिली जानकारी के अनुसार हाईकोर्ट ने अपने आदेश में चण्डीगढ़ प्रशासन को निर्देश दिया है कि वह झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए फ्लैट आवंटन के दावे पर विचार करे। जस्टिस अनुपिंदर सिंह ग्रेवाल और जस्टिस दीपक मंचांडा की खंडपीठ ने झुग्गीवासियों द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए यह आदेश पारित किया है।
खंडपीठ ने कहा कि यह स्थापित सिद्धांत है कि आवास का अधिकार भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत एक मौलिक अधिकार है और झुग्गीवासी होने के नाते याचिकाकर्ताओं को फ्लैट आवंटन के लिए विचार किए जाने का पूर्ण अधिकार है। अदालत ध्रुव और अन्य झुग्गीवासियों द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने दलील दी कि याचिकाकर्ता झुग्गीवासी हैं और वे चंडीगढ़ स्माल फ्लैट्स स्कीम,2006 के तहत फ्लैट आवंटन के लिए पात्र हैं। इसके बावजूद प्रशासन ने बिना कोई नोटिस जारी किए और बिना सुनवाई का अवसर दिए झुग्गी तोड़ने के आदेश पारित कर दिए। याचिकाकर्ताओं ने फ्लैट आवंटन के लिए प्रशासन को कानूनी नोटिस भेजा था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।खंडपीठ ने कहा कि झुग्गीवासी होने के नाते याचिकाकर्ताओं को 2006 की स्माल फ्लैट्स स्कीम के तहत फ्लैट आवंटन के लिए विचार किए जाने का अधिकार है। बिना नोटिस और बिना सुनवाई का अवसर दिए ऐसे तोड़फोड़ के आदेश देने कानून के तहत सही नहीं है। इसलिए इनको निरस्त किया जाना उचित है।
वहीं हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए प्रशासन को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ताओं के फ्लैट आवंटन के दावे पर 2006 की योजना या किसी अन्य उपयुक्त पुनर्वास योजना के तहत विचार करे और दो माह के भीतर सक्षम प्राधिकारी द्वारा इस संबंध में आदेश पारित किए जाएं और तब तक झुग्गियों पर यथास्थिति बनाए रखी जाए।

