गुरुग्राम,रोशन भारद्वाज :हिन्दू धर्म के नाम से राजनीतिक करने वाली भारतीय जनता पार्टी गुरुग्राम के पार्षद और उसके सहयोगी भगवान शिव के प्रिय आराध्य बेलपत्र के वृक्ष के नीचे रात्रि के समय शिवालय की जगह शौचालय बनवाकर हिन्दू देवी देवताओं का सरेआम अपमान कर हिंदू समाज की धार्मिक भावनाओं को आहात कर दिया हैं। जिससे धर्म-कर्म में आस्था रखने वाले लोगों में रोष व्याप्त हो रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुग्राम के सैक्टर चार स्थित एक पार्क में सरकारी जमीन पर कुछ दबंगों ने पार्षद की शय पर करीब 25 वर्ष पुराने बेलपत्र के वृक्ष के निचे शौचालय का निर्माण करवा कर लोगों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा दी है। जिसको लेकर बालयोगी अलखनाथ द्वारा विरोध किया गया तो हिन्दू विरोधी कुछ लोगो ने कार्य तो रोक दिया, लेकिन अभी भी स्थानीय पार्षद की शय पर बने इस अवैध शौचालय को यहाँ से न हटाने पर अड़े हुए है। आश्चर्यजनक बात तो यह है कि जिनके आदेशों पर देवी देवताओ को अपमानित करने के लिए यह शौचालय बनाया जा रहा है। वह खुद ब्राह्मण समाज से है ऐसे में प्रश्न यह उठता हे कि ब्राह्मण वशं का व्यक्ति अपनी राजनीती चमकने के लिए धर्म की मर्यादा का ही हनन करते हुए शिवालय की जगह शौचालय बनवाना चाहता है। यह समझ से परे है, इसे क्या समझा जाये जिसके विरोध में गुरुग्राम सहित अन्य जिलों के संत समाज की और से भी अब मैदान संभालने की रणनीति तैयार कर रहे हे।
बालयोगी अलखनाथ और रुद्रनाथ अघोरी ने कहा कि बेलपत्र वृक्ष के निचे शिवालय की जगह शौचालय बनना धार्मिक पवित्रता का हनन, वास्तु दोष और अपवित्रता का कारक है, बेलपत्र का वृक्ष जहां नियमित रूप से पूजा-अर्चना और धार्मिक कार्यक्रम होते हैं। ऐसे में उसी भूमि पर शौचालय का नया निर्माण स्वीकार्य नहीं है। स्थानीय लोगों ने निर्माण का लगातार विरोध किया है और आक्रोश भी जताया है। आपको बता दे कि स्थानीय पार्षद द्वारा ही लिखित में निर्माण कार्य का आदेश जारी किया है, जबकि गुरुग्राम नगर निगम भी पार्क में बन रहे इस शौचालय को अवैध निर्माण बता रहा है। लेकिन वोटों की राजनीति के चक्कर में कुछ नेता धर्म की सभी मर्यादाओं नजरंदाज कर धर्म व आस्था के प्रति आमजन की धार्मिक आस्था और भावनाओ का हनन कर राजनीति रोटियां सेकने में लगे हुए हैं। आखिर किस कानून के तहत सरकारी जमीनों पर इस तरह निर्माण करवाने के आदेश पार्षद द्वारा दिया गया है क्या वह उचित है। निगम भी इसको स्वीकार करता है।
