पानीपत, सतीश भारद्वाज: हरियाणा लोकायुक्त जस्टिस हरिपाल वर्मा ने डीजीपी (विजिलेंस ब्यूरो) को14.75 एकड़ सरकारी भूमि को हडपने के आरोपों की जांच करके 7 दिसंबर तक जांच रिपोर्ट पेश करने के आदेश दिए हैं । यह आदेश करने से पहले लोकायुक्त द्वारा लोकायुक्त कोर्ट के पुलिस अधीक्षक से कराई गई जाँच में भी शिकायतकर्ता के आरोपों की पुष्टि हुई ।
मिली जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता एवं आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने गत 27 फरवरी को लोकायुक्त जस्टिस हरिपाल वर्मा को सबूतों सहित शिकायत देकर पूर्व केंद्रीय मंत्री चौ चांद राम की बहू पर भूमाफिया से मिलकर दलितों ,पिछड़ों के तकनीकी संस्थान के लिए पुनर्वास विभाग द्वारा आबंटित 14.75 एकड़ भूमि को हड़पने आरोप लगाया है। कपूर ने आरोप लगाया कि करीब 200 करोड़ रुपए कीमत की इस भूमि माफिया को हड़पने की साजिश को पर्दे के पीछे एक बड़े भाजपा नेता का भी संरक्षण है । इसीलिए जिला प्रशासन और पुनर्वास विभाग ने कोई कारवाई नहीं की ।
*क्या था है मामला जिसपर लोकायुक्त ने लिया संज्ञान*
आरटीआई एक्टिविस्ट कॉमरेड पीपी कपूर ने शिकायत में आरोप लगाया था कि पूर्व केंद्रीय मंत्री चांद राम की बहू आदि ने भूमि माफिया से मिलकर फर्जी दस्तावेजों से पानीपत में 200 करोड़ रुपए से ज्यादा मूल्य की 14.75 एकड़ भूमि हड़पने का फर्जीवाड़ा किया है। शिकायत में बताया कि वर्ष 1978 में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री एवं रोहतक से सांसद चौ चांद राम ने आल इंडिया अंत्योदय एजुकेशन सोसाइटी को रजिस्टर्ड कराया था । इसमें कई केंद्रीय मंत्री व देश भर से कई एमपी ,विधायक व ब्यूरोक्रेट्स शामिल थे । दलित व पिछड़े वर्ग के बच्चों के लिए तकनीकी संस्थान बना कर तकनीकी शिक्षा देने के लिए यह सोसायटी बनाई थी।
वहीं वर्ष 1982 में इस सोसाइटी ने पुनर्वास विभाग हरियाणा सरकार से रियायती दरों पर असंध रोड़ दोनों नहर पार तरफ इंसार में 14.75 एकड़ भूमि अलॉट करा ली । अलॉटमेंट की शर्तों के मुताबिक इस भूमि का उपयोग सिर्फ तकनीकी संस्थान करने के लिए था । इस शर्त की उल्लंघना करने पर भूमि का अलॉटमेंट रद्द करके जमा धनराशि ज़ब्त की जानी थी । वर्ष 1984 में यहां मात्र आधा एकड़ भूमि पर विधाता टेक्निकल इंस्टीट्यूट के नाम से आईटीआई बनाई गई और बाकी भूमि कृषि कार्य के लिए ठेके पर दे दी गई। यह आईटीआई भी वर्ष 1995 में ठप्प हो कर बंद हो गई । वर्ष 2015 में चौ.चांद राम सहित इस रजिस्टर्ड सोसाइटी के अन्य सभी सदस्यों की मृत्यु के बाद उनकी पत्नी, बेटा और फिर बहू फर्जी दस्तावेज तैयार करके इस सोसाइटी के सर्वे सर्वा बन बैठे और भूमि माफिया से मिलकर इस बेशकीमती भूमि को बेचने के लिए सक्रिय हो गए ।
श्री कपूर ने शिकायत में यह भी आरोप लगाया कि वर्ष 1978 में आल इंडिया अंत्योदय एजुकेशन सोसाइटी का रजिस्ट्रेशन कराने के बाद से न तो समिति का कभी नवीनीकरण हुआ,न ऑडिट हुआ, न कोई मीटिंग हुई । वर्ष 2015 तक सिर्फ एक सदस्य को छोड़ कर रजिस्टर्ड सोसाइटी के बाकी सभी सदस्यों की मृत्यु हो गई तो इसी का लाभ उठा कर भूमि माफिया ने इस भूमि को हड़पने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार किए ।मांग: समस्त 14.75 एकड़ भूमि की अलाटमेंट तुरंत रद्द करके सरकार अपना कब्जा ले । भूमि को हड़पने के लिए सोसाइटी के फर्जी दस्तावेज बना कर पदाधिकारी बन कर इस सरकारी भूमि को बेचने का प्रयास करने वाले भूमाफिया के विरुद्ध अपराधिक केस दर्ज करके कारवाई की जाए ।

