गुरुग्राम,सतीश भारद्वाज : हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के अनुपालन में गंभीर लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए संबंधित लोक प्राधिकरण को दोषी SPIO(s) की जिम्मेदारी तय करने हेतु जांच कर उचित अनुशासनात्मक/प्रशासनिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। मिली जानकारी के अनुसार गुरुग्राम निवासी RTI कार्यकर्ता हरिन्द्र ढींगरा ने 08 नवम्बर 2022 को दायर RTI आवेदन का उत्तर निर्धारित 30 दिनों की अवधि में देने के बजाय 27 अगस्त 2026 को दिया गया। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से दर्ज किया कि उत्तर देने में तीन वर्ष और सात माह से अधिक की असाधारण देरी हुई हैं, जो RTI Act की धारा 7(1) में निर्धारित वैधानिक समय-सीमा के विपरीत है। मामले की सुनवाई के दौरान सामने आया कि संबंधित अवधि में श्री दर्पण कम्बोज, SPIO-cum-Tehsildar, Gurugram तथा सुशील कुमार, SPIO-cum-Naib Tehsildar, Gurugram पदस्थ थे।
राज्य सूचना आयुक्त डॉ. अजय कुमार सूरा ने 21.09.2026/19/10/2026 के आदेश में धारा 20(2) RTI Act, 2005 के तहत संबंधित Public Authority को निर्देश दिया कि देरी के लिए जिम्मेदार SPIO(s) की भूमिका की जांच की जाए और यह निर्धारित किया जाए कि देरी लापरवाही, कर्तव्य में चूक अथवा RTI Act के वैधानिक दायित्वों के उल्लंघन के कारण हुई या नहीं।आयोग ने निर्देश दिया है कि जिम्मेदार पाए जाने वाले अधिकारी/अधिकारियों के विरुद्ध लागू सेवा नियमों के अनुसार उचित अनुशासनात्मक/प्रशासनिक कार्रवाई की जाए। पूरी जांच एवं कार्रवाई आदेश प्राप्त होने से तीन माह के भीतर पूरी कर उसकी रिपोर्ट, जांच रिपोर्ट एवं की गई कार्रवाई सहित आयोग को भेजी जानी है।
हरिन्द्र ढींगरा ने कहा कि यह आदेश RTI व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण संदेश है—“सूचना देना किसी अधिकारी की कृपा नहीं, बल्कि कानून द्वारा निर्धारित वैधानिक दायित्व है। तीन वर्ष से अधिक की देरी को सामान्य प्रशासनिक चूक मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
बता दे कि राज्य सूचना आयोग समय-समय पर आवेदको द्वारा भ्रष्टाचार के खिलाफ जनहित व सरकार हित में मानी गई सूचनाओं को गंभीरता से नहीं ले रहे है, जिस पर जिले में बैठे मलाईदार सीटों पर बैठे लापरवाह व भ्रष्ट अधिकारियों को जमाने से भी दंडित कर चुके हैं लेकिन फिर भी अधिकारियों के ऊपर जमाने का कोई असर नहीं हो रहा है। वहीं सूत्रों से सरकारी विभागों में यह भी चर्चा चल रही है कि सूचना न देने पर 25 हजार तक ही तो जुर्माना लग सकता है और वह भी कई सालों के बाद , जबकि घपला लाखों करोड़ों का होता है ( रिश्वत) खोरी उनसे उनकी सेहत पर कोई असर नहीं पड़ता है।

