गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज : गुरु की नगरी गुरुग्राम की धरती से अंतर्मना धार्मिक एवं पारमार्थिक तथा पतंजलि योगपीठ हरिद्वार की ओर से प्रथम सामूहिक उपवास (एक मास एक उपवास) की शुरुआत की गई। राष्ट्र के उत्थान में योगदान देने के जैन संतों ने एक मास एक उपवास श्रद्धालुओं की मौजूदगी के बीच किया। भगवान पाŸवनाथ ऑडिटोरियम जैन बारादरी में आयोजित एक भव्य समारोह में जैन संत अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज व संघ की पावन उपस्थिति में यह अभियान शुरू किया गया।
श्री 1008 पाशवनाथ दिगम्बर जैन समाज जैकमपुरा की ओर से इस आयोजन में सकल दिगम्बर जैन समाज गुडग़ांव का भी विशेष योगदान रहा। प्रधान नरेश कुमार जैन, उपप्रधान शैलेंद्र जैन,महामंत्री अशोक कुमार जैन,सहमंत्री जैनेंद्र जैन, कोषाध्यक्ष प्रदीप जैन ने बताया कि श्री 1008 पाश्र्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर जैकमपुरा में पुष्पगिरी प्रणेता गणाचार्य श्री 108 पुष्पदंत सागर जी महाराज के परम प्रभावक शिष्य साधना महोदधि अंतर्मना आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर महाराज जी ससंघ के सानिध्य में परम पूज्य उपाध्याय श्री 108 पियूष सागर जी महाराज ने 1008 जिन सहस्त्र विधान मंत्रों के द्वारा भक्तिपूर्वक सेंकड़ों भक्तों ने विधान में शामिल होकर भक्ति अर्चना का लाभ उठाया।
जैन समाज के प्रवक्ता अभय जैन एडवोकेट ने बताया कि आचार्य श्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज ने अपने प्रवचन में उपवास के महत्व को बताया। आचार्यश्री ने बताया कि मन की शुद्धि के लिए उपवास जरूर करना चाहिए। उपवास करने से शरीर के अशुद्ध विकास बाहर हो जाते हैं। आचार्यश्री ने कहा कि मन की शुद्धि के लिए उपवास जरूर करना चाहिए। उपवास करने से शरीर के अशुद्ध विकास बाहर हो जाते हैं। आचार्यश्री ने कहा कि मेरे आह्वान से आप सभी माह में एक उपवास जरूर करें। उपवास सिर्फ अन्न का ही नहीं, अपने भावों की शुद्धि के लिए किया जाता है।आचार्यश्री ने बताया कि सायं छह बजे के बाद तो पानी का भी उपयोग नहीं करना चाहिए। एक माह में एक उपवास जरूर करें। आचार्यश्री 108 प्रसन्न सागर जी महाराज ने अपने प्रवचनों के साथ-साथ भजनों, गीतों का श्रद्धालुओं को रसपान कराया। उन्होंने सुनाया-मेरा मन ये पुकारे आ जा-भक्ति के सहारे आजा…। तुम बिन हमरा कोई नहीं, भगवान तुम बिन हमरा कोई नहीं, मेरे देश की धरती सोना उगले उगले हीरे मोती…। आचार्य श्री 109 प्रसन्न सागर जी महाराज ने कहा कि हर माह की सात तारीख को उपवास जरूर करें।
उन्होंने इस सोच के पीछे तिजारा वाला परिवार से एस.के. तिजारा व प्रदीप तिजारा को बताया। उन्होंने कहा कि एक जलता दीपक लाख बुझे हुए दीपों का जला देता है। तिजारा परिवार ने यह दीपक जलाया। इस सोच को आगे बढ़ाया। महाराज जी ने कहा कि स्वामी रामदेव जी ने इस दीपक में घी डाला और हमने बत्ती लगा दी। स्वामी जी की भी इस मुहिम के पीछे यही सोच है कि पूरा देश स्वस्थ और प्रसन्न रहे। आचार्यश्री ने कहा कि हर माह की सात तारीख को उपवास का दिन तय किया गया है। उन्होंने कहा कि देश शरीर से कम बीमार है, मन से ज्यादा बीमार है। व्यक्ति अपने पेट से ज्यादा बीमार है।
कवि सम्मेलन में कवियों ने उपवास पर प्रस्तुत की रचनाएंसत्यनारायण मौर्य ने अपनी रचना में अनेक विषयों पर बात रखते हुए कटाक्ष किए। उनकी कविताओं में हमारे समाज से लेकर दुश्मनों देशों तक की नीतियों, उनके कार्यों पर उन्होंने शब्दों से तेज प्रहार किए। उन्होंने सुनाया-पुष्प दंत ने प्रसन्न होकर ये पुष्प बरसाया है-हर मास एक उपवास करो ये संदेश लाया है, खुद को न मन का उदास कीजिये-हर मास एक उपवास कीजिये, महावीर खुद प्रसन्न होकर आया है-हर मास एक उपवास ये संदेश लाया है, बहुत सुनी है अपने मन की थोड़ी अपनी भी सुन लो-राह चुनी है बहुत पतन की उन्नतियों की भी चुन लो, औरों की हत्या करके रेशम के वस्त्र बनाए हैं-त्याग तपस्या से आत्मा के लिए वस्त्र कुछ तो चुन लो, छूट जाएगा एक दिन जो नश्वर संसार बसाया है-एक मास उपवास करो ये संदेशा लाया है…। बाबा सत्यनारायण मौर्य ने आतंकवाद, पाकिस्तान पर भी अपनी रचनाओं से प्रहार किया। कवि गजेंद्र सोलंकी ने अपने कविता पाठ की शुरुआत उपवास से कही।
उन्होंने सुनाया-जैकबपुरा गुरुग्राम में रचा एक इतिहास, गुरुवर के आशीर्वाद से शुरू हुआ मासिक उपवास, जीवन में यदि चाहते सदा रहे उल्लास-करें मिलकर एक दिन एक मास उपवास…। बुजुर्गों को सम्मान देने के लिए उन्होंने अपनी रचना से प्रेरित करते हुए सुनाया-कुछ लोग बुजुर्गों को लाचार समझते हैं, नादां हैं वसीयत को अधिकार समझते हैं, दौलत पे बुजुर्गों की सोच जिनकी जिद, मां-बाप की सेवा को उपकार समझते हैं…। उन्होंने देशभक्ति पर भी अपनी रचना पढ़ते हुए श्रोताओं में देशभक्ति का संचार किया।सुदीप भोला ने सुनाया-हर घर और हर मास करो-मिलकर सब प्रयास करो, मेरे गुरुवर कहते हैं-एक दिवस उपवास करो, चाहे कहीं निवास करो-चाहे कहीं प्रवास करो, एक दिवस उपवास करो…। मोबाइल की लत को भी उन्होंने उपवास से जोड़ते हुए सुनाया-चलो-चलो उपवास करो-गुरुवर पर विश्वास करो, मोबाइल से दूर एक दिन खुद को खुद के पास करो…।
साथ ही उन्होंने एआईआर और ऑपरेशन सिंदूर पर भी अपनी रचनाएं पढकऱ श्रोताओं को हंसाने के साथ देशभक्ति के रंग में भी रंगा। रील कल्चर पर उन्होंने कटाक्ष करते हुए महिलाओं को फूहड़ता से बाहर निकलकर अपनी संस्कृति, अपनी मर्यादा में रहने का संदेश दिया।चरणजीत चरण ने सुनाया-कुछ लोगों की दूरी खुशबू देती है-कुछ लोगों का पास महकता रहता है, कुछ लोगों की एक जरा सी दस्तक से-सदियों तक इतिहास महकता रहता है…। जीवन में यदि करना खास जरूरी है-एक मास में एक उपवास जरूरी है, ये एक व्रत है इच्छा शक्ति बढ़ाने का-ईश्वर के मन में अपनी भक्ति बढ़ाने का, करो आज संकल्प अभी से जीवन में-एक मास में एक उपवास रहे मन में, ऋषि हमारे जीवन के हितकारी हैं-हर पग हर क्षण में उनके आभारी हैं, रामदेव जी और प्रसन्ना सागर जी-शुरू जिन्होंने जीवन व्रत की यात्रा की, अब यात्रा को घर-घर ले जाना है-हम सबको मिलकर संकल्प उठाना है…। कमलेश वसंत ने देश के इंडिया नाम को भारत पुकारने पर अपनी रचना पढ़ी। उन्होंने कहा-छोड़ो सोच गुलामी वाली जिव्हा में अमृत घोलो-इंडिया नहीं भारत बोलो…। कार्यक्रम के अंत में सभी कवियों, अतिथियों का सम्मान किया गया।



