गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज : मुख्यमंत्री शहरी निकाय स्वामित्व योजना में गुरुग्राम नगर निगम में हुए भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है। जिसकी गुज उच्च अधिकारियों सहित प्रदेश के मुखिया के कानों तक भी पहुंच गई है, जिसमें आरोप यह है कि नगर निगम में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर ऐसे एक व्यक्तियों को भी किराएदार घोषित कर दिया, जिनके पास न तो वैध किराएदारी थी और न ही जमीन पर कोई कानूनी हक था। इसके बाद करोड़ों रुपये मूल्य की जमीन को बेहद कम कीमत पर बेचकर भारी वित्तीय अनियमितताएं कर जमकर चांदी कुटी गई है। उक्त मामला गुरुग्राम के सदर बाजार क्षेत्र का बताया जा रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार निगम अधिकारियों ने वर्ष 2022 में एक व्यक्ति को उसकी कथित किराएदारी की जमीन मुख्यमंत्री शहरी निकाय स्वामित्व योजना के तहत बेची थी। नगर निगम प्रशासन ने उसकी रजिस्ट्री भी करवा दी। हैरानी की बात यह है कि लगभग एक वर्ष बाद दुबारा एक अन्य बुथ की जमीन भी उसी व्यक्ति को अधिकारियों की मिलीभगत से बेच दी गई। जिसकी उसके पास किराएदारी (तहबाजारी) ही नहीं थी। जबकि इस घोटाले में सबसे गंभीर( रौचक) बात यह भी सामने आई है कि जिस जमीन की बिक्री की गई, वह जमीन नगर निगम की थी ही नहीं। यह जमीन प्रोविंशियल गवर्नमेंट के नाम दर्ज थी, जिसका वास्तविक मालिकाना हक जिला प्रशासन, अर्थात् उपायुक्त (डीसी) के पास होता है। इसके बावजूद बिना अधिकार और स्वीकृति के उक्त जमीन को बेचने की प्रक्रिया पूरी कर दी गई। वहीं इसी योजना के तहत हरियाणा के अन्य जिलों में इस प्रकार किराएदारों को जमीन नहीं बेचीं जा रही बिना उपायुक्त की मंजूरी । जिसकी पुष्टि दरखास्त प्रमाण संख्या 239 और 590 से भी स्पष्ट होता है कि एक ही जमीन के संबंध में बार-बार आवेदन लेकर नियमों की अनदेखी की गई और रिकॉर्ड के साथ छेड़छाड़ कर उक्त व्यक्ति को लाभ पहुंचाया गया है। इससे नगर निगम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। वहीं आम मामले में भ्रष्टाचार की बू आ रही है। इस योजना के तहत यही मामला नहीं है इससे पहले भी कई मामलों में भाजपा नेताओं के भी नाम सामने आ चुके हैं। कई मामलों में तो आवेदक ने कागजों में जमीन कुछ मांगी है लेकिन रजिस्ट्री कुछ और ही हुई है। जिसकी सूचना जिला नोडल अधिकारी आरएस भाट को भी दी जा चुकी है। लेकिन इस मामले पर वह भी मौन बने हुए हैं।
इस मामले की चर्चाएं शहर सहित स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों में चल रही है, जिसके लिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस घोटाले की जांच नहीं हुई तो भविष्य में सरकारी जमीनों की इसी तरह लूट होती रहेगी। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन और राज्य सरकार इस गंभीर आरोप पर क्या कार्रवाई करती है और दोषी अधिकारियों पर कब तक शिकंजा कसता है।बता दें कि मुख्यमंत्री शहरी स्वामित्व योजना हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शुरू की थी, जिसमें 20 साल से ज्यादा तह बाजरी पर बैठे दुकानदारों को सभी दस्तावेज जमा कराकर मलकाना हक दिलाने की योजना चलाई थी। जिसमें गुड़गांव नगर निगम में करोड़ों का घोटाला हुआ है। जिसकी गूंज मुख्यमंत्री और मीडिया में भी खुब उठीं है, लेकिन किसी भी भ्रष्ट अधिकारी पर कोई ठोस कार्रवाई अभी तक नहीं हुई है। जबकि निगम में तैनात अधिकारियों ने इस पर जांच पड़ताल करने की भी बात कही थी। लोगों ने इसमें हुए घोटाले से अवगत करा मामले की जांच की मांग उठा दी है। अब देखना यह होगा कि इसकी निष्पक्ष जाच होती है या पहलों के मामलों की तरह फाईलों में दबकर रह जाती है।

वहीं नगर निगम में हुए व्यापक घोटाले की जांच करने के लिए लोकायुक्त हरियाणा को भी दरखास्त दी हुई है। जिसमे निगम अधिकारी तथा यूएलबी डिपार्मेंट हरियाणा को करीब 10 बार नोटिस भेजने के बाद भी निगम अधिकारी अपनी पोल खुलने के डर से रिप्लाई ही नहीं दे रहे हैं। जिससे सरकार की भी छवि धूमिल होती जा रही है।
