
गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज: गुरुग्राम कल्चरल फ़ाउंडेशन द्वारा विजयादशमी के पावन अवसर पर सेक्टर 64, गोल्फ कोर्स एक्सटेंशन रोड स्थित ORANA Convention में “भक्त वत्सल श्रीराम” शीर्षक से भव्य सांस्कृतिक समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में सदस्यों, उनके परिवारों, अतिथियों एवं गणमान्य नागरिकों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। सम्पूर्ण रामायण की मनोहारी लीला, रावण दहन एवं डिजिटल आतिशबाज़ी, श्रीराम राज्याभिषेक तथा गरबा उत्सव ने उपस्थित जनसमूह को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसमें आए हुए अथितियों के साथ गुरुग्राम कल्चरल फ़ाउंडेशन के सदस्यों एवं उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों ने सहभागिता की। इसके पश्चात आदरणीय हरिवंश पंडित जी एवं उनकी कुशल टीम द्वारा रामायण पर आधारित उत्कृष्ट प्रस्तुतियाँ दी गईं। कलाकारों ने अपनी भावपूर्ण प्रस्तुति से प्रभु श्रीराम के जीवन, आदर्शों, मर्यादा और धर्म की विजय का संदेश प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। श्री महेंद्र लाहोरिया जी ने आये हुए अथितियों का स्वागत पटका पहना कर किया!
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. मनदीप किशोर गोयल ने किया। उन्होंने अपने प्रभावशाली एवं सुव्यवस्थित संचालन से समारोह को गरिमामय बनाया। श्री कमल अग्रवाल ने स्वागत उद्बोधन देते हुए सभी अतिथियों एवं उपस्थित परिवारों का स्वागत किया और विजयादशमी के सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति।समारोह में मुख्य अतिथि आर एसएस के पवन जिंदल एवं श्रीमती मीना जिंदल , उत्तर क्षेत्र, प्रांत संघ चालक, राष्ट्रीय स्वम सेवक संघ, की गरिमामयी उपस्थिति रही। विशिष्ट अतिथियों में श्री प्रताप सिंह जी प्रान्त संघ चालक , डॉ. सुरेन्द्र जैन जी, संघटन मंत्री विश्व हिंदू परिषद, श्री राम अवतार गर्ग , शरद गोयल तथा श्री कृष्ण कुमार गुप्ता जी , महेंद्र शर्मा सहित अन्य गणमान्य व्यक्तियों की उपस्थिति ने आयोजन की शोभा बढ़ाई।
समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों ने सांस्कृतिक विरासत को सहेजने, पारिवारिक सहभागिता बढ़ाने तथा समाज में आपसी सौहार्द और एकता को प्रोत्साहित करने के ऐसे आयोजनों की सराहना की। श्री रामायण की लीला और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समांसम्पूर्ण रामायण के सजीव चित्रण ने दर्शकों को रामायण के विभिन्न प्रसंगों से भावनात्मक रूप से जोड़ा। रावण दहन एवं डिजिटल आतिशबाज़ी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहे। श्रीराम राज्याभिषेक की प्रस्तुति ने मर्यादा, धर्म और आदर्श शासन की भावना को साकार किया, वहीं रंग-बिरंगे परिधानों में आयोजित गरबा उत्सव ने पूरे वातावरण को उल्लास एवं उमंग से भर दिया।कार्यक्रम में बच्चों, युवाओं, महिलाओं और वरिष्ठजनों सहित सभी आयु वर्ग के लोगों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। सदस्यों और उनके परिवारों की सक्रिय सहभागिता से पूरा आयोजन पारिवारिक आत्मीयता, सांस्कृतिक गौरव और सामाजिक एकजुटता का सुंदर उदाहरण बना।फ़ाउंडेशन के सदस्यों एवं आयोजन मंडली का उल्लेखनीय योगदानइस भव्य आयोजन को सफल एवं सुव्यवस्थित बनाने में गुरुग्राम कल्चरल फ़ाउंडेशन के सभी सदस्यों और आयोजन मंडली का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
इस कार्यक्रम प्रबंधन एवं आयोजन मंडली में कुलभूषण सरावगी, कृष्ण सिंगला, गुरु प्रसाद गुप्ता, प्रेम प्रकाश गुप्ता, डॉ. कृष्ण अग्रवाल, कृष्ण गोरखपुरिया, श्री राम बिलास गोयल, राजकमल सिंगला, कमल अग्रवाल, सोम गर्ग, राम कुमार बंसल, सीए राकेश अग्रवाल, डॉ. मनदीप किशोर गोयल, राजन गोयल, संजय गोयल सुभाष जैन, श्री हनुमान गुप्ता, धीरज रावलवासिया, अमित मित्तल, अनिल गोयल, अतुल गोयल, सीए अशोक कुमार गोयल, संजीव अग्रवाल, सतीश अग्रवाल, पंकज गुप्ता, श्री विकास गुप्ता, संजय गर्ग (बिट्टू), श्री अरुण जैन, सीए अमित बंसल, सतीश तायल तथा श्री महेंद्र लाहोरिया (संयोजक) थे! राजेश गोयल, मोहित सिंगला, विक्रम गुप्ता, अमित लाहोरिया, श्री ललित गुप्ता, जितेन्द्र सरावगी, मोहन गुप्ता, नवदीप गुप्ता, अभिषेक सिंगला, समीर अग्रवाल, सीए मनीष गोयल तथा डॉ. पंकज अग्रवाल ने विशेष भूमिका निभाई!इन सभी सदस्यों एवं सहयोगियों ने आपसी समन्वय, समर्पण और टीम भावना के साथ कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सफल बनाने में योगदान दिया।
डॉ. मनदीप किशोर गोयल ने व्यक्त किया आभार*
श्री गुरु प्रशाद गुप्ता ने सभी अतिथियों, फ़ाउंडेशन के सदस्यों, उनके परिवारों, कलाकारों तथा आयोजन में सहयोग देने वाले सभी व्यक्तियों का हृदय से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के सांस्कृतिक आयोजन हमारी भारतीय परंपराओं, पारिवारिक मूल्यों और सामाजिक एकता को सुदृढ़ करते हैं।उन्होंने कहा कि विजयादशमी केवल बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर के अहंकार, क्रोध और नकारात्मकता को समाप्त कर सत्य, धर्म, प्रेम एवं सद्भाव के मार्ग पर चलने की प्रेरणा भी देती है। प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में अपनाना ही इस पर्व की वास्तविक सार्थकता है।उन्होंने भविष्य में भी सभी सदस्यों एवं सहयोगियों से इसी प्रकार स्नेह, सहयोग और सहभागिता बनाए रखने का आह्वान किया।“सदैव साथ-साथ” — एकता एवं सहयोग का संदेशगुरुग्राम कल्चरल फ़ाउंडेशन का मूल संदेश “सदैव साथ-साथ” समारोह के दौरान सामूहिक सहभागिता के रूप में साकार दिखाई दिया।
कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि जब समाज के लोग अपनी संस्कृति, परंपराओं और साझा मूल्यों के लिए एकजुट होते हैं, तो ऐसे आयोजन न केवल मनोरंजन का माध्यम बनते हैं, बल्कि सामाजिक संबंधों को भी मजबूत करते हैं।समारोह का समापन डांडिया, हर्षोल्लास, आत्मीयता और प्रभु श्रीराम के जयघोष के साथ हुआ। उपस्थित लोगों ने कार्यक्रम की उत्कृष्ट व्यवस्था, मनोहारी प्रस्तुतियों और पारिवारिक वातावरण की सराहना की। गुरुग्राम कल्चरल फ़ाउंडेशन ने सभी सहयोगियों एवं उपस्थित परिवारों का हृदय से आभार व्यक्त करते हुए भविष्य में भी इसी प्रकार सामाजिक एवं सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से भारतीय संस्कृति और एकता को बढ़ावा देने का संकल्प दोहराया।
