चंडीगढ़, सतीश भारद्वाज: सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के 21 वर्ष पूरे होने पर प्रदेश के कई जिलों से आए आरटीआई कार्यकर्ताओं ने प्रदेश के राज्यपाल प्रोफेसर असीम कुमार घोष को 17 सूत्री ज्ञापन देकर राज्य सूचना आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार व प्रदेश में आरटीआई एक्ट 2005 के प्रभावी,पारदर्शी एवं जनहितकारी क्रियान्वन की मांग की है ।
ज्ञापन की प्रति मुख्य सूचना आयुक्त टीवीएसएन प्रसाद को भी भिजवाई गई । जन अभियान मंच के अध्यक्ष एवं आरटीआई एक्टिविस्ट पीपी कपूर ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने आरटीआई एक्ट 2005 का भट्ठा बैठा दिया है । डेटा प्रोटेक्शन कानून बना कर मोदी सरकार ने आरटीआई एक्ट को खत्म करने का काम किया है । वहीं राज्य सूचना आयोग में बैठे सरकार के चहेते सूचना आयुक्त आज आरटीआई एक्ट को लागू करवाने व सूचना दिलवाने में आज सबसे बड़ी बाधा बन चुके हैं। राज्य जन सूचना अधिकारी अब न तो सूचना देते हैं,प्रथम अपीलीय अधिकारी कोई सुनवाई नहीं करते । सूचना आयोग द्वितीय अपील केसों को सुने बगैर ही वापिस प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास फैसला करने के लिए लौटा कर खुली धक्केशाही कर रहा है ।
देश में 21 वर्ष पहले 12 अक्टूबर 2005 को कांग्रेस पार्टी के राज में पारदर्शिता,जवाबदेही और लोकतंत्र में जन भागीदारी के लिए बना सर्वाधिक लोकप्रिय कानून आज प्रदेश में एक मज़ाक बन कर रह गया है । इससे प्रदेश की जनता व आरटीआई कार्यकर्ताओं में भारी रोष है ।कपूर ने चेतावनी दी कि अगर जल्द समस्या हल न की गई तो राज्य सूचना आयोग पर धरने,प्रदर्शन, आंदोलन किया जाएगा।
वहीं सीनियर सिटीजन आरटीआई एक्टिविस्ट हरेंद्र ढींगरा ने बताया कि धारा 8 (i) (जे) का मनमाना संदर्भ बता कर अलॉटमेंट पत्र की कॉपी,सरकारी आदेश पत्र, फाइल नोटिंग, एनओसी की कॉपी जैसे सरकारी दस्तावेज भी निजी सूचना बता कर नहीं दिए जा रहे । पहले तो वर्षों तक बार बार सुनवाई की तारीख पर तारीख लगाई जाती हैं और फिर सुनवाई पूरी होने के बाद भी आयोग के आदेश महीनों तक जारी नहीं होते । *
ज्ञापन की मांगें*
द्वितीय अपीलों को आयोग द्वारा प्रथम अपीलीय अधिकारी के पास वापिस भेजने की गैर कानूनी कार्य शैली पर तत्काल रोक लगाई जाए, धारा 8 (1)(जे)के अनुचित प्रयोग पर रोक लगाई जाए, प्रथम अपीलों का समयबद्ध निस्तारण ना करने वाले प्रथम अपीलीय अधिकारियों व निर्धारित 30 दिन में सूचना न देने के दोषी जन सूचना अधिकारियों को दंडित किया जाए, बार बार सुनवाई की तारीखें न लगाई जाएं,आयोग के आदेश की कॉपी तत्काल उपलब्ध कराए जाये,अपील/शिकायत दर्ज होने की सूचना मोबाइल संदेश से तत्काल दी जाए, धारा- 4 के अंतर्गत सभी सरकारी विभागों की वेबसाइट पर सूचनाओं का स्वत: प्रकटीकरण प्रभावी रूप से लागू कराया जाए ,सभी कार्यालयों में ऑनलाईन आरटीआई आवेदन लगाने की व्यवस्था शुरू की जाए,ग्राम पंचायतों में जन सूचना अधिकारी की जिम्मेवारी मौजूदा ग्राम सरपंच की बजाए सक्षम सरकारी अधिकारी को दी जाए,राज्य सूचना आयोग में टॉल फ्री हेल्प लाइन नम्बर शुरू किया जाए, आरटीआई आवेदकों से नियमित मीटिंग आयोजित करके मुख्य सूचना आयुक्त फीड बैक व सुझाव लें,राष्ट्रीय सूचना अधिकार दिवस पर सभी स्कूलों, कालेजों, उच्च शिक्षण संस्थानों में प्रदेशव्यापी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएं ।
इस अवसर पर आरटीआई एक्टिविस्ट मोहित डूडी (चरखी दादरी) ,क्षितिज दत्ता (अंबाला कैंट),सूरजमल नैन (जींद), बनारसी दास (सिरसा),रोहित लाहोट(पानीपत),मोहित डूडी (चरखी दादरी),,सोनू चहल (हिसार),बलजीत सिंह बराड़ा(अंबाला),रवींद्र यादव (गुरुग्राम), बनारसी दास (डबवाली),प्रेम सिंह रावल (पानीपत),डॉक्टर विक्रम सिंह,स. इंद्रजीत रिखी (करनाल), राधे श्याम (पंचकूला),नवीन त्रिखा( कुरुक्षेत्र),रमेश कुमार (जींद),अनिल (तोशाम),स. अमनदीप सिंह (अंबाला)आदि मौजूद रहे।
