नई दिल्ली, सतीश भारद्वाज: केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय के परीक्षा मूल्यांकन रिकॉर्ड रोके जाने के मामले में विश्वविद्यालय के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी (CPIO) को जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
आयोग ने कहा कि केवल सूचना को गोपनीय बताना RTI अधिनियम के तहत उसे रोकने का पर्याप्त आधार नहीं है। सूचना रोकने के लिए अधिनियम की धारा 8 या 9 के तहत किसी विशेष छूट का स्पष्ट उल्लेख करना जरूरी है। यह आदेश सूचना आयुक्त सुधा रानी रेलंगी ने ऋषभ मिश्रा बनाम CPIO, दिल्ली विश्वविद्यालय मामले में दिया है। परीक्षा मूल्यांकन से जुड़ी जानकारी RTI में मांगीमामले में ऋषभ मिश्रा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के विधि संकाय में तीन वर्षीय LLB सेमेस्टर परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन से संबंधित जानकारी मांगी थी। RTI आवेदन में मार्किंग स्कीम, परीक्षकों के प्रशिक्षण से जुड़े रिकॉर्ड, मूल्यांकन के दौरान परीक्षकों को छात्रों की पहचान पता न चलने देने के उपाय, मूल्यांकन की गुणवत्ता जांच और डिजिटल मूल्यांकन से संबंधित जानकारी शामिल थी।
विश्वविद्यालय के सूचना अधिकारी ने बताया था कि मूल्यांकन प्रक्रिया गोपनीय है और सूचना फिड्यूशियरी क्षमता में रखी जाती है। साथ ही, कुछ सवालों को स्पष्टीकरण या राय मांगने वाला बताया गया था। सीपीआईओ को नई जानकारी बनाने की जरूरत नहींआयोग ने स्पष्ट किया कि CPIO को ऐसी जानकारी तैयार करने, राय देने या रिकॉर्ड में उपलब्ध न होने वाले स्पष्टीकरण देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। हालांकि, यदि मार्किंग स्कीम, परीक्षकों को दिए गए लिखित निर्देश, नोटिस, सर्कुलर और दिशा-निर्देश जैसे रिकॉर्ड मौजूद हैं, तो वे RTI अधिनियम की धारा 2(f) के तहत सूचना माने जा सकते हैं।
आयोग ने अपने आदेश में कहा कि ऐसी सूचना धारा 8 या 9 में दी गई छूट के अधीन हो सकती है, लेकिन केवल गोपनीयता का उल्लेख करके सूचना से इनकार नहीं किया जा सकता।फिड्यूशियरी छूट का यांत्रिक इस्तेमाल नहीं।
आयोग ने कहा कि RTI अधिनियम की धारा 8(1)(e) के तहत फिड्यूशियरी संबंध वाली छूट का इस्तेमाल अपने आप नहीं किया जा सकता। विश्वविद्यालय को यह बताना होगा कि मांगी गई विशेष सूचना के संबंध में ऐसा संबंध कैसे बनता है।आयोग ने CPIO को निर्देश दिया कि वह प्रत्येक रोकी गई सूचना के संबंध में हस्ताक्षरित बयान दाखिल करे। इसमें यह बताना होगा कि कौन-सी सूचना रोकी गई, किस विशेष कानूनी प्रावधान के तहत रोकी गई और धारा 8(1)(e) लागू करने की स्थिति में संबंधित फिड्यूशियरी संबंध क्या है।दो सप्ताह में जवाब दाखिल करने का निर्देशआयोग ने यह भी पूछा है कि क्या रोके गए रिकॉर्ड के ऐसे हिस्से, जिन पर कोई छूट लागू नहीं होती, उन्हें अलग करके आवेदक को उपलब्ध कराया जा सकता है।
वहीं RTI अधिनियम की धारा 10 के तहत गैर-छूट प्राप्त हिस्सों को अलग करके देने का प्रावधान है।CPIO को आयोग के समक्ष दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया गया है।
*मामला कैसे पहुंचा सूचना आयोग*
CPIO ने RTI आवेदन को संयुक्त रजिस्ट्रार (परीक्षा) के कार्यालय को भेज दिया था और आवेदक को बताया था कि वहां से जवाब मिलना बाकी है। इससे असंतुष्ट होकर ऋषभ मिश्रा ने प्रथम अपील दायर की। प्रथम अपीलीय प्राधिकारी ने विश्वविद्यालय को दो सप्ताह के भीतर सीधे आवेदक को जवाब देने का निर्देश दिया।विश्वविद्यालय द्वारा निर्देश का पालन नहीं किए जाने पर मिश्रा ने केंद्रीय सूचना आयोग में दूसरी अपील दायर की।
आयोग ने सूनवाई के दौरान पाया कि CPIO ने प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के आदेश का काफी हद तक पालन किया था, लेकिन गोपनीयता के आधार को किसी विशेष कानूनी छूट से पर्याप्त रूप से नहीं जोड़ा गया था। जिसपर आदेश दिया गया है।
