गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज: गुरुग्राम में नगर निगम,जीएमडीए,एचएसवीपी और डीटीपीई द्वारा जिले में चलाए जा रहे तोड़फोड़ अभियान के खिलाफ बुधवार को नाथुपुर के पास डीएलएफ में महापंचायत की गई। इस महापंचायत में तोड़फोड़ की कार्रवाई को लेकर स्थानीय निवासियों और प्रभावित लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है। यहां के रेजिडेंट्स ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। महापंचायत में वक्ताओं ने प्रशासनिक अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए और सोशल मीडिया पर एक्टिव ‘रील बाज’ अधिकारियों के बहिष्कार की मांग उठाई।
महापंचायत में मुख्य रूप से जिला नोडल अधिकारी आरएस भाट की कार्यशैली को निशाने पर लिया गया। वक्ताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि अधिकारी अपनी कार्रवाई की वीडियो बनाना और उसे सोशल मीडिया पर शेयर करना तुरंत बंद करें। उन्होंने सवाल पूछा, “आखिर किस अफसर को यह अधिकार है कि वह अपनी विभागीय कार्रवाई को इस तरह पब्लिक प्लेटफॉर्म पर साझा करें और लोगों की मजबूरी का तमाशा बनाए?”
लोगों का सवाल-करोड़ों खर्च किए, रेवेन्यू दिया, तो मकान अवैध कैसे?
महापंचायत में मौजूद वक्ताओं और स्थानीय निवासियों का सबसे बड़ा दर्द उनके आशियानों पर चला बुलडोजर है। मंच से बोलते हुए कई वक्ताओं ने भावुक और तीखे लहजे में कहा, “हमने अपनी जिंदगी भर की कमाई लगाकर जमीन की बाकायदा रजिस्ट्री करवाई। सरकार को पूरा रेवेन्यू दिया। सालों से हम बिजली का बिल भर रहे हैं और करोड़ों रुपए खर्च करके अपने सपनों का मकान बनाया है। जब सरकार ने रजिस्ट्री की और टैक्स लिया, तो आज अचानक यह सब अवैध कैसे हो गया?”जब अवैध निर्माण हो रहा था, तब कहां था प्रशासन। लोगों का आरोप है कि जब अवैध निर्माण हो रहा होता है, तब प्रशासन सोता रहता है। लेकिन जब लोग अपनी कमाई लगा देते हैं, तो अधिकारी अपनी पब्लिसिटी चमकाने के लिए बुलडोजर लेकर पहुंच जाते हैं।
पंचायत में रील संस्कृति और पब्लिसिटी पर कड़ा ऐतराज*
महापंचायत में उमड़ी भीड़ ने प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा कार्रवाई के दौरान वीडियो बनाने की संस्कृति की कड़े शब्दों में निंदा की। लोगों का कहना है कि कार्रवाई के नाम पर आम नागरिकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। अधिकारियों का ध्यान कानून व्यवस्था से ज्यादा अपनी सोशल मीडिया रीच और लाइक्स बढ़ाने पर है। महापंचायत ने निर्णय लिया कि यदि भविष्य में कोई भी अधिकारी इस तरह वीडियो बनाता हुआ पाया गया, तो उसका कड़ा विरोध और सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।
बता दें कि जिले में हाल ही में चल रहे अतिक्रमण व अवैध कब्जों के खिलाफ आए दिन तोड़फोड़ अभियान चल रहा है। वह सब सुप्रीम कोर्ट के आदेश की पालना में चल रहा है। जिसको लेकर भी भूमाफियाओं में हड़कंप मचा हुआ है। वहीं सूत्रों के हवाले से जानकारी मिली है कि नगर निगम,जीएमडीए, एचएसवीपी तथा डीटीपी ने जहां भी तोड़फोड़ की कार्यवाही की है। उनमें अधिकांश मकानों को पहले भी नोटिस जारी किए गए थे,जोकि इन्हीं अधिकारियों ने मिलीभगत से दबा दिए गए थे। अब सुप्रीम कोर्ट के डंडे के डर से मजबुरी में कार्यवाही करनी पड़ रही है। एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि वह केवल कोर्ट को दिखाने के लिए खानापूर्ति की कार्यवाही करना उनकी मजबूरी है।

