गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज: गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर बुधवार को एक चार वर्षीय नाबालिक बच्ची के दुष्कर्म मामले में सुप्रीम कोर्ट में पेश होकर हलफनामा दिया। सुप्रीम कोर्ट ने उक्त मामले में कड़ी नाराजगी जताते हुए हरियाणा पुलिस को इस मामले की जांच करवाने के लिए एसआईटी का गठन करने आदेश दिए। अदालत ने कहा कि पुलिस ने आरोपियों को बचाने के लिए मामले को गंभीरता से नहीं लिया। सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाते हुए कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि पुलिस ने गंभीर यौन उत्पीडन मामले को गंभीरता से नहीं लिया बल्कि धारा 10 के तहत मामला बनवाना है। ताकि आरोपियों को बचाया जा सकें।
कोर्ट ने पुलिस और बाल कल्याण अधिकारियों के रवैए ने पीड़ित बच्ची को और ज्यादा दुखी कर दिया है,बार बार उसे थाने में बुलाकर प्रताड़ित किया गया। जबकि पीड़ित के घर पुलिस को ही जाना चाहिए था,वहीं पुलिस को एसआईटी के गठन के आदेश दिए,जिसमें वरिष्ठ अधिकारी कला रामचन्द्र, नाज़नीन भसीन व आस्था मोदी नए सिरे से जांच करेगी, वहीं मौजूद जांच टीम को हटाकर सभी रिपोर्ट्स एसआईटी को सौंपने को कहा है। इसके साथ ही मामले की सुनवाई एक महिला न्यायाधीश के समक्ष पॉस्को कोर्ट में होनी निश्चित की जाएं।
कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए गुरुग्राम पुलिस कमिश्नर के एफिडेविट पर भी सवाल खड़े करते हुए कारण बताओं नोटिस के आदेश दिए कि क्यों ना उन पर अनुशासनिक कार्रवाई की जाए। तथा सभी प्लेटफॉर्म्स से पीड़ित के नाम सहित परिवार का विवरण हटाने के आदेश दिए। मामले की अगली सुनवाई 6 अप्रैल को होगी।

