गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज : गुरुग्राम की एक अदालत ने एक गंभीर अपराधिक मामले में जेल में बंद राजस्थान जयपुर की एक यूनिवर्सिटी के चांसलर बेटे की जमानत याचिका ख़ारिज कर दी है। जिसमें आरोपी युवक पर एक युवती से शादी का झांसा देकर लाखों रुपए की ठगी, दुष्कर्म और निजी फोटो-वीडियो के जरिए ब्लैकमेल करने के आरोप लगे हैं। जिसमें पीड़िता की शिकायत पर पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। जिसकी जमानत अर्जी खारिज कर दी है।
पुलिस में दर्ज मामले के अनुसार आरोपी ध्रुव पंवार जो मूल रूप से जयपुर का रहने वाला है,वह वर्ष 2011-12 से पीड़ित परिवार के संपर्क में था। वर्ष 2022 में उसने शादी का प्रस्ताव रखा और भरोसा जीतते हुए पीड़िता के साथ नजदीकियां बढ़ाईं। यहां तक की अपने शरीर पर पीड़िता की फोटो का टेटु भी बनवाया,आरोपी ने खुद को आर्थिक रूप से कमजोर बताते हुए पीड़िता को अपने निवेश,सोना और बचत की जानकारी लेकर भविष्य के प्लान पर पैसे निवेश करने के लिए मनाया।
आरोप है कि आरोपी ने पीड़िता से करीब 24 लाख रुपये और 5 लाख रुपये के सोने के आभूषण धोखे से ले लिए। इन पैसों से उसने एक कार भी खरीदी। वहीं पीड़िता के सोने के आभूषण भी अपने पास रख लिए। आरोपी जुलाई 2025 में पीड़िता के घर पर कुछ दिनों तक रहा,जहां उसने शादी का झांसा देकर उसके साथ शारीरिक संबंध भी बनाए। बाद में उसने चालाकी से पीड़िता के निजी फोटो और वीडियो भी बना लिए। मामले ने उस समय गंभीर मोड़ लिया जब आरोपी की एक अन्य युवती ने पीड़िता से संपर्क कर खुद को आरोपी की पत्नी बताया और दोनों ने मिलकर पीड़िता को ब्लैकमेल करना शुरू कर दिया। तभी पीड़िता को युवक की हकीकत पता चलीं।
पीड़िता की शिकायत अनुसार जब उसने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी ने उसे धमकाया और कहा कि वह उसकी निजी तस्वीरें और वीडियो वायरल कर देगा। आरोपी और उसके साथियों द्वारा लगातार फोन कॉल्स के जरिए दबाव बनाया गया कि वह किसी को इस बारे में न कुछ बताए। वहीं आरोपी ने 20 सितंबर 2025 को पीड़िता की बहन को भी धमकी दी कि अगर उसने बात नहीं मानी तो उसकी निजी वीडियो सार्वजनिक कर उसको बदनाम कर देगा। जिससे वह काफी मानसिक रूप से परेशान रहने लगी। जिसकी शिकायत पुलिस को दी। जिसपर पुलिस ने जांच में प्रथम दृष्टया भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं—धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, दुष्कर्म और आईटी एक्ट से जुड़े प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर आरोपी को जयपुर से गिरफ्तार कर जेल भेजा था। तभी से आरोपी जेल में बंद है।
वहीं इसी मामले में पीड़िता के वकील जगजीत चौधरी ने बीएनएस की नई धारा 107 के तहत ठगी के पैसे से खरीदी गई संपत्ति को वापस लेने की कार्यवाही कराते हुए। अदालत के आदेश पर कार की नीलामी कराकर पीड़िता को 10 लाख 30 हज़ार रुपए का चैक दिलाया गया था। जिसमें आरोपी ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जमानत याचिका दायर की थी,जिसपर बीते शुक्रवार को बहस हुई थी,और एडीजे विनय शर्मा की अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा था। जिसमें सभी पहलुओं पर गौर करते हुए केस की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने सोमवार को जमानत देने से मना करते हुए। जमानत याचिका ख़ारिज कर दी।

वहीं सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि इस मामले में पुलिस सैक्टर 10 थाना ने उक्त केस में चार्जशीट भी अदालत में दाखिल कर दी है, जिसमें जांच अधिकारी ने आरोपी को राहत देने के लिए काफी खामियां छोड़ी है। आरोपी के खाते से उसके भाई अक्षत तथा मां के भी खाते में पैसे ट्रांसफर हुए हैं, जिसकी स्टेटमेंट भी चार्ज शीट चालान में लगाईं गई है, लेकिन फिर भी उनको उक्त केस में आरोपी नहीं बनाया गया है। वहीं पीड़िता की फोटो भी पुलिस ने कुछ पत्रकारों तथा यूट्यूबरस को दीं थीं, जिन्होंने उनकी फोटो सार्वजनिक कर दी थी, जिसकी भी शिकायत पीड़िता ने पुलिस अधिकारियों को भेजी थी,लेकिन पुलिस ने उस पर भी कोई कार्रवाई अभी तक नहीं की है, पुलिस इस मामले में पीड़िता पर दबाव बनाकर आरोपी को राहत दिलवाना चाहती है। क्योंकि आरोपी के पिता जयपुर में एक एसजेआरपी नामक यूनिवर्सिटी के कुलपति बताएं जा रहे हैं, जिनकी पहुंच बड़े राजनेताओं व ब्यूरो कैट से भी है। जिस दबाव में लगता है गुरुग्राम पुलिस इस केस में काम कर रही है। जिससे पीड़िता काफी डर और भय से अपना जीवन यापन कर रहीं हैं।
