

गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज : गुरुग्राम में भाजपा नेता एवं सोहना मार्केट कमेटी के पूर्व चेयरमैन सुखबीर खटाना उर्फ सुखी हत्याकांड में कोर्ट ने 5 आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है। वहीं सभी पर 1-1 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।
सरकारी वकील धनंजय कुमार ने सरकार की तरफ से पैरवी करके गवाहों व सबूतों के आधार पर आरोपियों को सजा दिलवाई। गुरुग्राम के एडीजे सुनील कुमार दीवान की अदालत ने बुधवार को सभी 5 दोषियों को सजा सुनाई है।
जबकि पुलिस द्वारा इस मामले में बनाएं अन्य आरोपियों को साक्ष्यों के अभाव में बरी कर दिया। इनके खिलाफ भी पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की थी, लेकिन कोर्ट में उनपर आरोप साबित नहीं कर पाएं।
*क्या था मामला जो हत्या की वजह बनी*
भाजपा नेता सुखबीर खटाना की लव मैरिज से नाराज उनके साले (पत्नी का भाई) चमन ने अपने साथियों के साथ मिलकर 1 सितंबर 2022 को गुरुग्राम के सदर बाजार में कपड़े के शोरूम के बाहर गोलियां मारकर अपने ही जीजा की दिनदहाड़े हत्या कर दी थी।
भाजपा नेता तत्कालीन CM मनोहर लाल खट्टर के करीबी थे और रिठोज से वह जिला परिषद चुनाव की तैयारी कर रहे थे। आरोपी चमन ने पुलिस को बताया था कि वर्ष 2008 में सुखबीर ने उसकी बहन पुष्पा से लव मैरिज कर ली थी, जिस कारण सुखबीर से रंजिश रखता था। सुखबीर को मारने की रंजिश के तहत ही वह साल 2010-11 के दौरान कुख्यात गैंगस्टर विक्रम उर्फ पपला गुजर के संपर्क में आया था।
आरोपी चमन ने पुलिस को बताया कि इसके बाद से वह पपला के गैंग के लिए काम करने लगा था। उसने पपला के विरोधी गैंगस्टर सुरेंद्र उर्फ चीकू को मारने की साजिश वर्ष 2015 के दौरान रची थी। इसके बाद पपला राजस्थान के बहरोड़ से गिरफ्तार कर लिया गया था। थाने पर गोलीबारी कर पुलिस की गिरफ्त से पपला को छुड़ाने वालों में चमन भी शामिल था।
आरोपी चमन ने सुखबीर खटाना की 10 से अधिक बार रेकी कराई थी। इसके बाद 1 सितंबर 2022 की दोपहर गांव रिठोज के रहने वाले 47 वर्षीय सुखबीर खटाना को सदर बाजार के नजदीक गुरुद्वारा रोड पर रेमंड्स के शोरूम में जाते समय हथियारबंद बदमाशों ने गोलियों से भून डाला था। वारदात को अंजाम देने के बाद सभी पैदल ही सिविल लाइन इलाके की तरफ भाग गए। उन्होंने खटाना पर एक दर्जन से ज्यादा गोलियां चलाई थीं। उनमें मुख्य आरोपी खटाना की पत्नी का भाई चमन उर्फ पवन है। वह बादशाहपुर का रहने वाला है। उसके साथ ही गांव कादरपुर के अंकुल, लक्ष्मण गढ़ (अलवर) के राहुल, धानियावास (रेवाड़ी) निवासी दीपक उर्फ दीपू और योगेश भी इस हत्याकांड में शामिल थे।
आरोपी चमन के खिलाफ पहले से कई केस हैं। वर्ष 2011 में बादशाहपुर थाने में लड़ाई-झगड़े का केस दर्ज हुआ था। इसके बाद वर्ष 2015 में महेंद्रगढ़ जिले में हत्या का मुकदमा हुआ। वर्षों 2016 में सोहना थाने में उस पर अवैध हथियार रखने का के दर्ज हुआ। साल 2019 में उसने गैंगस्टर सुरेंद्र को मारने की साजिश रची। इसका भी केस चमन के खिलाफ बना। इसके बाद वर्ष 2022 में सिविल लाइन थाने में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था।
मामले में पुलिस ने सभी आरोपियों को पकडकर उनके खिलाफ चाजशीट तैयार कर अदालत में दी थी, जिस पर चली अदालती कार्रवाई में सबूत,जांच अधिकारी के बयान के आधार पर अदालत में पांच को दोषी मानते हुए उम्र कैद की सजा तथा एक-एक लाख रुपए जुर्माना लगाया है वहीं अन्य आरोपियों को सबूत और गवाहों के अभाव में बरी कर दिया है।
