
नई दिल्ली, सतीश भारद्वाज : दिल्ली की तीस हजारी अदालत के एक कोर्टरूम के भीतर वकील पर कथित हमले के मामले को गंभीरता से लेते हुए दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। आरोप है कि एक वकील पर उसके ही विरोधी अधिवक्ता और कुछ अन्य लोगों ने अदालत कक्ष के अंदर हमला किया। हाईकोर्ट ने न सिर्फ मामले की गहन पुलिस जांच के निर्देश दिए, बल्कि हमले का शिकार हुए वकील को चौबीसों घंटे सुरक्षा प्रदान करने का आदेश भी दिया है। मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय तथा न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव और न्यायमूर्ति नितिन साम्ब्रे की तीन जजों की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि उत्तर जिला (नॉर्थ) के पुलिस उपायुक्त ने आश्वासन दिया है कि प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जा रही है और जांच में सभी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। साथ ही, हाईकोर्ट ने तीस हजारी के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश को निर्देश दिया कि वे संबंधित पीठासीन अधिकारी सहित सभी पक्षों से जानकारी लेकर घटना पर रिपोर्ट दाखिल करें।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद स्वतः संज्ञान (सुओ मोटो) के रूप में दिल्ली हाईकोर्ट के समक्ष लाया गया। इससे पहले, सोमवार को ही सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस घटना का उल्लेख किया गया था।
सीजेआई सूर्यकांत ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि, “इस तरह का गुंडाराज स्वीकार्य नहीं है। यह कानून के राज की विफलता को दर्शाता है।”सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद पीड़ित वकील ने दिल्ली हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को प्रतिनिधित्व दिया, जिसके आधार पर हाईकोर्ट ने तत्काल सुनवाई करते हुए मामला अपने हाथ में लिया। सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय ने चिंता जताते हुए कहा कि एक वकील के साथ अदालत के अंदर मारपीट और बदसलूकी की खबरें सामने आई हैं, यहां तक कि कोर्टरूम का गेट बंद कर दिया गया।
उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर वकीलों के आचरण का क्या होगा। इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा, जो बार काउंसिल ऑफ दिल्ली (BCD) के संचालन से जुड़ी समिति का नेतृत्व कर रहे हैं, ने कहा कि यदि यह वकील बनाम वकील का मामला है, तो यह आचार संहिता का उल्लंघन है और इसे बार काउंसिल की अनुशासन समिति को भेजा जा सकता है। कोर्ट ने रिकॉर्ड किया कि बार काउंसिल ऑफ दिल्ली इस मामले में संज्ञान लेकर दोषी वकील के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करेगी। दिल्ली सरकार के आपराधिक मामलों के स्थायी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि FIR दर्ज की जा रही है। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुए डीसीपी ने कहा कि दोनों पक्षों से शिकायतें मिली हैं, मेडिकल जांच (MLC) कराई जा रही है और CCTV फुटेज के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने अदालत परिसरों की सुरक्षा पर भी सवाल उठाया। डीसीपी ने बताया कि जिला न्यायाधीश के साथ बैठक कर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने पर विचार किया जाएगा। इसके बाद कोर्ट ने पीड़ित वकील की सुरक्षा को लेकर सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया कि उन्हें रिपोर्ट आने तक चौबीसों घंटे सुरक्षा दी जाए। आदेश में कहा गया कि 10 दिनों के बाद खतरे के आकलन के आधार पर सुरक्षा की समीक्षा की जाएगी।
हाईकोर्ट ने डीसीपी को यह भी निर्देश दिया कि जांच किसी भी दबाव के बिना, पूरी तरह निष्पक्ष और स्वतंत्र रूप से की जाए ताकि सच्चाई सामने आ सके। कोर्ट ने माना कि इस तरह की घटनाओं का व्यापक प्रभाव पड़ता है और इससे न केवल वकीलों की सुरक्षा, बल्कि न्यायालय की गरिमा और कार्यवाही की शुचिता भी प्रभावित होती है। मामले में तीस हजारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष, दिल्ली पुलिस आयुक्त और डीसीपी नॉर्थ को प्रतिवादी बनाया गया है। कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि FIR की जांच एसीपी स्तर के अधिकारी द्वारा डीसीपी की प्रत्यक्ष निगरानी में की जाएगी। अगली सुनवाई तारीख 24 फरवरी लगीं हैं।

