गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज : गुरुग्राम शहर में हर तरफ दबंग दबंग लोगों का सिक्का बराबर चल रहा है, जिस पर जिला प्रशासन व पुलिस विभाग भी अंकुश लगाने में नाकाम साबित हो रहा है। ऐसा ही एक मामला बीते रोज ऑटो ड्राइवरों से जबरदस्ती हफ्ता वसूली गैंग का सामने आया है, जिसमें हफ्ता वसूली गैंग के दबंगों द्वारा एक ऑटो ड्राइवरों पर पैसे नहीं देने पर हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया, जिसको इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती होना पड़ा। मामला इफ्को चौक मेट्रो स्टेशन और बस स्टैंड क्षेत्र का है। जिसमें दो ऑटो ड्राइवर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इनमें से एक ऑटो ड्राइवर की हालत काफी गंभीर बनी हुई है जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवाया गया है। जिसकी शिकायत पुलिस में भी दी गई है। इस घटना से शहर के ऑटो-रिक्शा ड्राइवरों में इस संगठित वसूली गैंग का खौफ बढ़ता जा रहा है। वहीं ऑटो चालकों में दहशत वह रोष पनप रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार बुधवार शाम को इफको चौक मेट्रो स्टेशन का मामला सामने आया है,जहां एक ऑटो ड्राइवर को हफ्ता न चुकाने पर लोहे की रॉड से बुरी तरह पीटकर घायल कर दिया गया। पीड़ित ड्राइवर रिंकू मूल रूप से रेवाड़ी जिले का निवासी है और वर्तमान में सेक्टर 12 की राजीव कॉलोनी में रहता है। उसने बताया कि गैंग के सदस्य नियमित रूप से उनके स्टैंड पर आकर पैसे मांगते हैं। विरोध करने पर मारपीट करते हैं।पीड़ित रिंकू ने अस्पताल से बातचीत में बताया कि हर दिन 50 रुपये देने पड़ते हैं, नहीं तो मारपीट शुरू हो जाती है। मैंने विरोध किया, तो उन्होंने लोहे की रॉड से हमला कर दिया। सिर और शरीर पर गंभीर चोटें आई।ऑटो ड्राइवरों का कहना है कि अब तो ऐसी घटनाएं रोज होने लगी हैं। एक ड्राइवर ने बताया कि हम गरीब लोग हैं, रोज कमाकर परिवार चलाते हैं। 50 रुपए रोज मतलब महीने में 1500 रुपए अतिरिक्त खर्च आ रहा है। वहीं एक अन्य ड्राइवर ने नाम नहीं लिखने की शर्त पर बताया कि पुलिस को भी मामलों से कई दफा अवगत कराया हुआ है, लेकिन फिर भी मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है। जिससे हफ्ता वसूली गैंग के हौसले दिनों दिन बुलंद होते जा रहे हैं। हफ्ता वसूली गैंग के आदमी इफको चौक मेट्रो स्टेशन, बस स्टैंड, इफ्को चौक, हुडा सिटी सेंटर, एमजी रोड, सेक्टर 12, 14 और 29 जैसे व्यस्त ऑटो स्टैंड पर नियमित रूप से पहुंचते हैं। वे चालकों को प्रोटेक्शन मनी के नाम पर रोज 50 रुपये मांगते हैं। विरोध करने पर लोहे की रॉड, लाठी-डंडों से हमला कर डराते है। जिससे चालक मजबूर होकर पैसे दे रहे हैं।
वसूली गैंग में लीडर, फील्ड में काम करने वाले गुंडे और लोकल जानकारी देने वाले शामिल होते हैं। वे ऑटो स्टैंड को जोन में बांटकर कंट्रोल करते हैं। एक इलाके में विरोध हुआ तो पूरे सिंडिकेट की ताकत दिखाते हैं। पूर्व यूनियन लीडर या पुराने प्रधान को भी निशाना बनाया जाता है, ताकि कोई संगठित विरोध न हो सके। इन्होंने 50 रुपये प्रतिदिन का फिक्स्ड रेट रखा गया है, जो महीने में 1,500 रुपये बनता है। यह रकम छोटी लगती है, लेकिन शहर में इस समय करीब 25 से 30 हजार ऑटो विभिन्न सड़कों पर चल रहे हैं, इनमें से अगर 10 हजार से भी रोजाना वसूली हो रही है तो यह रकम रोजाना की पांच लाख बनती है। जिसमें से कुछ हिस्सा पुलिस तक भी गैंग पहुंचाते हैं।
ऑटो ड्राइवरों का आरोप है कि गैंग इतने खुले आम काम करता है कि उन्हें पुलिस का भी खौफ नहीं है। ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ लोकल स्तर पर इन्हें संरक्षण मिला हुआ है। शिकायतें थानों में दर्ज होती हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं होती। जिससे गैंग का हौसला बढ़ता है। गुरुग्राम में ई-रिक्शा और ऑटो से जुड़े एक्सटॉर्शन के कई मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।पीड़ित रिंकू की शिकायत पर सेक्टर 29 थाना पुलिस मामले की जांच कर रही है, जबकि बस स्टैंड इलाके के अन्य प्रभावित ड्राइवरों ने सेक्टर 14 थाने में शिकायत दर्ज कराई। एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पुलिस सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों के आधार पर आरोपियों की तलाश कर रही है।

