

पीड़ित की शिकायत के अनुसार बताया गया है कि गत 7 अगस्त की रात्रि करीब 8 बजे कुछ पुलिस वाले उसके एक कर्मचारी त्रिलोक चंद को उठाकर पालम विहार थाने में ले गए। जहां से रात्रि करीब 10:15 बजे उसके पास मैसेज आया कि भैया थाने आओगे यह मैसेज आने के करीब 15 मिनट बाद यानी रात्रि लगभग 10:30 बजे मैं अपने भाई अंकुर यादव और एक कर्मचारी अनम के साथ थाने पहुँचा। तो उसने पुछताछ करी तो त्रिलोक चंद को एक अलग कमरे में रखा हुआ था, जहां से पिटाई और चिल्लाने की आवाजें आ रही थीं।
जब मैंने जाँच अधिकारी रोहित से बात करने की कोशिश की तो उन्होंने हमारे साथ बदतमीजी करी और हम पर झूठे आरोप लगाने शुरू कर दिए। तभी थाने में मौजूद एक पुलिसकर्मी बीच-बचाव करने आया, जिसने शराब पी रखी थी। इसी दौरान जाँच अधिकारी रोहित ने मेरे साथ मारपीट, धक्का-मुक्की, गाली-गलौज, मारपीट और धमकी देनी शुरू कर दी। जिसकी वीडियो भी सबूत के तौर पर उनके पास भी है। उन्होंने मुझे झूठे चोरी के केस में फँसाने की भी धमकी दी और हमारे मोबाइल फोन भी छीन लिए। जिससे हम विडीयो बना रहे थे।
इसके बाद जाँच अधिकारी रोहित ने सीटी बजाई, और 6-7 पुलिस वाले एक साथ आकर हमारे साथ मारपीट करने लगे। यह देखकर मेरे भाइयों ने बीच-बचाव करने की कोशिश की। इस मारपीट में मेरे बाएँ कान में अंदरूनी चोट भी आई। इसके बाद पुलिस वालों ने हमसे कोरे कागज़ पर जबरन साइन भी करवा लिए गए। जिसकी जानकारी मेरे परिजनों को लगी तो मुझे थाने से छुड़ाकर लाएं। घायल ने एक निजी अस्पताल में अपने कान का इलाज कराया।
*क्या कहते हैं SHO थाना पालम विहार प्रभारी*
जब इस मामले पर एसएचओ थाना पालम विहार बिजेंद्र सिंह से फोन पर बात की गई तो उनका कहना था कि मामला उनके संज्ञान में आया है पीड़ितों को बुलाया जा रहा है जांच चल रही है जो भी कानून के तहत कार्रवाई बनेगी अवश्य की जाएगी। वहीं बताया जा रहा है कि मामला एक सिलेंडर चोरी का था। जिसपर यह बवाल मचा हुआ है।
बता दें कि थाना पालम विहार के एसएचओ बिजेंद्र सिंह, पवन कुमार,बंजरग वत्स, हरिकिशन, संदीप, बलवंत श्योराण, टिकम सिंह,एसीपी नवीन सहित अन्य कई कर्मचारियों पर पद का दुरुपयोग करने तथा लापरवाही के गंभीर आरोप लगा चुके हैं। जिनकी जानकारी गुरुग्राम सीपी विकास अरोड़ा को भी है।लेकिन फिर भी सीपी उन पर कोई भी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।
