गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज: नगर निगम गुरुग्राम में शहरी निकाय स्वामित्व योजना में मिलीभगत व भ्रष्टाचार के नित नए मामले सामने आ रहे हैं,लेकिन फिर भी निगम अधिकारियों के सर पर जु तक नहीं रेंग रही है। अब एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें पद पर बैठे लापरवाह अधिकारियों ने आवेदक को फायदा पहुंचाने के लिए दरतावेजो को नजर अंदाज कर निगम को लाखों का चूना लगा दिया।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार शहर के सदर बाजार क्षेत्र में एक दुकानदार को उसकी दुकान का मालिकाना हक देने के लिए निगम द्वारा उसे 607835/-रुपए की राशि का डिमांड नोटिस क्रमांक /ZTO-II /2021/CFMS/33671 जारी किया गया था, उसके उपरांत उस व्यक्ति द्वारा नगर निगम कोष में उस डिमांड का 25% रुपए 151959/- रुपए रशीद क्रमांक 01734758 द्वारा जमा करवा दिए गए और उसके उपरांत दोबारा से शेष 251282/- रुपए की राशि रशीद क्रमांक 1752497 द्वारा जमा करवाई गई थी, जिसके बाद निगम के क्लर्क नितिन द्वारा रिपोर्ट की गई की दुकान बेचने बाबत राशि 607835/- रुपए की डिमांड की गई थी, जिस पर हक पाने वाले ने रसीद क्रमांक 01734758 दिनांक 19/11/2021 व रसीद क्रमांक 1752497 दिनांक 12/02/2022 के द्वारा नगर निगम कोष में समस्त राशि जमा कर दी है और फाइल को आगे बढ़ाया जिस पर रिपोर्ट करते हुए आगे क्षेत्रीय कराधान अधिकारी दिनेश कुमार ने नोडल अधिकारी से कन्वेंस डीड करवाने की अनुमति मांगी जिस पर नोडल अधिकारी ने दस्तावेजों को बिना सही तरीके से वेरीफाई करने की बजाय आंखें बंद करके इजाजत दे दी गई, जिसकी इजाजत मिलने के बाद दिनेश कुमार ने नोडल अधिकारी के आधार पर तहसीलदार गुरुग्राम को पत्र लिखा कि डिमांड नोटिस क्रमांक के द्वारा खरीदार से रुपए 403241/- की डिमांड भूमि विक्रय के लिए की गई थी, जिसकी समस्त राशि उन्होंने जमा कर दी है, जबकि वास्तव में निगम की तरफ से डिमांड 607835/- रुपए की हुई थी, लेकिन निगम में बैठे भ्रष्ट व लापरवाह कर्मचारियों की मिली भगत से नगर निगम के कोष में केवल 403241/-रुपए ही जमा हुए हैं। जिससे नगर निगम कोष को सीधे-सीधे 204594/-रुपए का चूना लगा दिया गया है।
बता दें कि नगर निगम गुरुग्राम में मुख्यमंत्री शहरी स्वामित्व योजना के तहत बाजरी के दुकानदारों को मालिकाना हक देने की योजना मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने शुरू की थी, जिसमें प्रदेश के अन्य शहरों की तो क्या बात करें लेकिन गुरुग्राम निगम में इस योजना के तहत कई भ्रष्टाचार मिली भगत के मामले उजागर हो चुके हैं, लेकिन फिर भी ना तो प्रदेश सरकार और ना ही जिले में तैनात रहे अधिकारी इस योजना में हुएं घोटालों पर कार्रवाई करने की बजाय चुप्पी साधे हुए हैं। जबकि मामलों में हुए भ्रष्टाचार की जांच करने की दरखास्त लोकायुक्त दरबार में भी पहुंची हुई है।
