रेवाड़ी, संवाददाता : हरियाणा की राजनीति में कई दफा दल बदलू व उलट फेर देखा गया है,इन दिनों नेता भी ऐसे ही दल बदल कर अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे हुए हैं। वहीं प्रदेश में इनेलो भी पिछले कुछ समय से लगातार अपनी खोई हुई ताकत को बढ़ाने में जुटी हुई है।वहीं पार्टी सुप्रीमो अभय सिंह चौटाला भी प्रदेश के भी जिलों में बैठकें कर प्रदेश के कद्दावर नेताओं को पार्टी में शामिल कर कुनबा बढ़ाने में पुरजोर प्रयास कर रहे है। इसी कड़ी में प्रोफेसर संपत सिंह की घर वापसी भी हाल ही में हो चुकी है। पार्टी से निकल कर गए नेताओं को मनाने में जुटी हुई है। अब कयास लगाए जा रहे हैं कि बावल से कांग्रेस नेता एमएल रंगा की भी घर वापसी हो सकती है।
गौरतलब है कि डॉ एमएल रंगा कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के कुलपति के पद से त्यागपत्र देकर वर्ष 2000 में इनेलो में शामिल हुए थे। वर्ष 2000 में उन्होंने इनेलो के चुनाव चिन्ह पर बावल विधानसभा से चुनाव लड़ा और जीत हासिल कर सरकार में स्वास्थ्य राज्य मंत्री बने। उसके बाद वर्ष 2005 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने इनेलो पार्टी के चुनाव चिन्ह पर बावल से चुनाव लड़ा इस बार चुनाव में एमएल रंगा तीसरें नंबर पर रहे। वर्ष 2009 में उन्होंने पार्टी से नाता तोड़कर कांग्रेस में शामिल हो गए। वर्ष 2014 के बाद कुछ समय के लिए भाजपा का दामन थाम लिया लेकिन थोड़े समक्ष बाद उन्होंने फिर से कांग्रेस का दामन थाम लिया।वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में उन्होंने कांग्रेस के चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ा और डॉ बनवारी लाल से फिर हार गए।
वहीं वर्ष 2024 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने कांग्रेस में रहकर कांग्रेस कि टिकिट पर किस्मत आजमाई लेकिन एक बार फिर से किस्मत ने उनके साथ नहीं दिया। अब अगर बात करे रंगा कि इनेलो में शामिल होने की तो इनेलो व एमएल रंगा को है एक दूसरे की जरूरत–बावल विधानसभा इनेलो का गढ़ रही है। इनेलो के पास बावल विधानसभा में कोई बड़ा चेहरा नहीं है। इनेलो को किसी बड़े चेहरे की लगातार तलाश है। इनेलो चाहती है कि पार्टी को छोड़कर गए नेताओं की घर वापसी हो। वही एमएल रंगा भी चाहेंगे कि उनके घर वापसी हो जाए। क्योंकि एमएल रंगा कांग्रेस में रहकर लगातार दो चुनाव हार चुके हैं। अब कांग्रेस शायद ही एमएल रंगा पर दाव लगाए। एमएल रंगा भी यह भली भांति जानते हैं कि अब पार्टी में उनका कोई वजूद नहीं रह गया। एमएल रंगा पर तीन चुनाव हारने का दाग लग चुका है।
*34 वर्षों से बावल में कांग्रेस झेल रही है वनवास*
वर्ष 1991 में शकुंतला भगवाडीया ने कांग्रेस की टिकट पर विजय प्राप्त की थी। उसके बाद शकुंतला भगवाडीया, भरत सिंह हरचंदपुर, चौधरी जसवंत सिंह व एमएल रंगा भी कांग्रेस को विजयश्री नहीं दिला पाए। अब क्षेत्र में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि दो एमएल रंगा जल्द ही घर वापसी कर सकते हैं। अब यह तो आने वाला समय ही बतायेगा कि इनेलो एमएल रंगा की घर वापसी करा पाएगी या नहीं। लेकिन संभावनाएं प्रबल मानी जा रही है।
