गुरुग्राम,सतीश भारद्वाज : गुरुग्राम में बैठे अधिकारी बीते दिनों ही नगर निगम गुरुग्राम की तरफ से बादशाहपुर क्षेत्र में एक व्यक्ति की अवैध कमर्शियल बिल्डिंग बता कर धराशाई करके वाहवाही बटोर रही है। वहीं अभी सोहना रोड पर स्थित पाश क्षेत्र मालिबू टाउन में डीटीपी विभाग की मिली भगत से एक स्थानीय दबंग निवासी द्वारा सभी नियम और कानून को ताक पर रखकर किए जा रहे अवैध निर्माण पर शिकायत करने के बाद भी अधिकारी मौन बने हुए हैं। जिससे लोगों में सरकार की इस भेदभाव पूर्ण कार्यवाही से रोष पनप रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सोहना रोड पर स्थित मालिबू टाउन में कुछ दबंग रसूखदार रेजिडेंट ने अपने पद और सरकार में ऊंची पहुंच के चलते अपने फ्लैट में नियम और कानून को ताक पर रखकर अतिरिक्त निर्माण कार्य कर लिया है, जिससे साथ में रह रहे अन्य पड़ोसियों को जान माल का हमेशा खतरा बना रहता है,वहीं उनकी प्राइवेसी भी समाप्त हो गई है। जिसके बारे में एक जागरूक नागरिक ने डीटीपी विभाग को भी अवगत कराया था,लेकिन विभाग में बैठे लापरवाह अधिकारियों की मिली भगत से अवैध निर्माण पर रोक लगाने की बजाय खुली छूट दे दी है। लोगों में चर्चाएं है कि यह सब अवैध निर्माण भ्रष्टाचार के चलते ही सम्भव हो सकता है। सरकारी अधिकारी केवल दावे करते रहते हैं,धरातल पर कोई भी कार्रवाई नियम और कानून के तहत जनहित में नहीं कर रहे हैं।
अवैध निर्माण का मामला जब अदालत में पहुंचा तो आनन-फानन में डीटीपी विभाग की तरफ से अवैध निर्माणकर्ता को कारण बताओ नोटिस तो जारी कर दिया, लेकिन अदालत में करीब दस माह में बारह तारीख लगने पर भी कोई जवाब नहीं दिया है। जिससे यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि जनहित के कार्यों में भी मिलीभगत से अधिकारियों अदालत को भी किस तरह गुमराह कर रहे हैं। जबकि डीटीपी द्वारा जारी नोटिस में यह स्पष्ट लिखा गया है कि साइट का अधिकारी द्वारा निरीक्षण किया गया, जिसमें पाया गया कि रसोई क्षेत्र अतिरिक्त निर्माण करके परिवर्तन किया गया है, वहीं एक मंजिल के स्तर पर विभाजन की दीवार को हटाकर जोड़ दिया है,वहीं हरियाणा शहरी क्षेत्र विकास और विनियमन एक्ट की धारा 3 बी का उलंघन करते हुए छत पर अतिरिक्त कमरे का निर्माण और पीछे के सेटबैक में लिफ्ट स्थापित किया है। जो कि नियमों के खिलाफ है। इसके बाद अधिकारियों ने क्या कार्रवाई की जिसके बारे में आरटीआई से जानकारी मांगने पर भी कोई जवाब नहीं दिया गया। जिससे निराश होकर जब निवासियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया तो डीटीपी विभाग को अदालत ने नोटिस भेजा कर जवाब मांगा तब नोटिस जारी कर दिया, लेकिन अदालत में जवाब दस महीने से जवाब नहीं दे रहे हैं। वहीं इसमें जहां डीटीपी की भूमिका संदिग्ध है,वहीं किसी उच्च रसुखदार दबंग राजनैतिक नेता और अधिकारीयों का भी संरक्षण साफ नजर आ रहा है।
गौरतलब है ऐसे ही मामलों से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि भ्रष्टाचार दबंग और ऊंची पहुंच वाले रसूखदार लोगों पर करवाई नहीं होने में कहीं ना कहीं सरकार व अधिकारियों की मिली भगत होती है। जो अदालत को भी गुमराह कर देती है। गुरुग्राम का यह एक पहले ही ऐसा मामला नहीं है इससे पहले भी इस तरह के काफी मामले सुर्खियों में आ चुके हैं जहां पर सीटों पर बैठे भ्रष्ट और लापरवाह अधिकारी दबंग रसूखदार लोगों को फायदा पहुंचाने के लिए किस तरह कागजों में हेरफेर कर अपना उल्लू सीधा करते हैं। गुड़गांव के राजस्व, नगर निगम, वन विभाग, शिक्षा, एचएसवीपी, पुलिस,बीएणडआर , खाद्य आपूर्ति एक्साइज एंड टैक्सेशन है, जिनमें इस तरह की गोलमाल हो रहें हैं। वहीं जागरूक नागरिक परेशान व दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर हो रहे हैं।

