चण्डीगढ़, सतीश भारद्वाज: हरियाणा के पूर्व खेल मंत्री संदीप सिंह तथा एक महिला एथलीट मामले की सूनवाई बुधवार को चंडीगढ़ की सीजेएम अदालत में हुई। सुनवाई के दौरान एसीजेएम न्यायालय से फाइल ट्रांसफर के ऑर्डर दिए। व अगली सुनवाई के लिए 19 फरवरी लगा दी हैं। वहीं महिला कोच की याचिका पर चंडीगढ़ जिला एवं सत्र न्यायाधीश एचएस ग्रेवाल ने मामले को किसी अन्य न्यायाधीश को ट्रांसफर करने के आवेदन को स्वीकार कर लिया था। जिसमें पीड़िता ने आरोप लगाया था कि एसीजेएम राहुल गर्ग उसके प्रति पक्षपाती होने के आरोप लगाएं थे। पीड़िता ने अपनी दरखास्त में कहा था कि जज ने उसे केस की फाइल देखने नहीं दी। उसे CRPC की धारा 164 के तहत दिए गए अपने बयान की कॉपी या जानकारी नहीं दी गई। इसके अलावा जज खुद इस केस की सुनवाई कर रहे थे, जबकि वे खुद एक गवाह की सूची में शामिल थे। ऐसे में मुझे इसमें न्याय की उम्मीद नहीं लग रही है।मामला 26 दिसंबर 2022 को जूनियर महिला कोच ने संदीप सिंह के खिलाफ यौन-उत्पीड़न सहित अन्य आरोप के तहत चंडीगढ़ पुलिस में शिकायत दी थी। जांच के बाद 31 दिसंबर की रात 11 बजे सेक्टर-26 थाने में संदीप सिंह के खिलाफ आईपीसी की धारा 342, 354, 354ए, 354बी, 506 के तहत पुलिस ने केस दर्ज किया था। जिसमें छेड़छाड़, गलत तरीके से कैद करने, आपराधिक धमकी देने और किसी महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से शब्द, हावभाव या कृत्य का इस्तेमाल करने के आरोप थे।
पीड़िता की ओर से दी गई शिकायत में बताया था कि मंत्री ने उसे कहा था कि तुम मुझे खुश रखों, मैं तुम्हे खुख रखूंगा। बात न मानने पर ट्रांसफर करा दिया था। हालांकि, संदीप सिंह ने इस आरोपों को पूरी तरह नकार दिया था।वहीं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (ACJM) राहुल गर्ग मामले की सुनवाई कर रहे थे, जो पीड़िता के बयान दर्ज करने के चरण तक पहुंच चुका था। हालांकि, सुनवाई से एक दिन पहले 30 जनवरी को जूनियर महिला कोच ने अपने वकील समीर सेठी के माध्यम से एक आवेदन दायर किया। इसमें बताया गया कि एसीजेएम का नाम स्वयं अभियोजन पक्ष के गवाहों की सूची में गवाह संख्या 19 के रूप में दर्ज है। उन्होंने कहा कि इससे उनकी अदालत के लिए मुकदमे को आगे बढ़ाने में एक मूलभूत कानूनी बाधा उत्पन्न होती है। जूनियर महिला कोच ने यह भी कहा कि अदालत के समक्ष मौखिक रूप से और निचली कोर्ट में आवेदन के माध्यम से भी यही आपत्तियां उठाई गई थीं, फिर भी पीठासीन अधिकारी ने स्वयं को इस मामले से अलग नहीं किया और “स्पष्ट पूर्वाग्रह” के साथ सुनवाई जारी रखी।
बताया गया है कि एसीजेएम गर्ग ने पहले संदीप सिंह के खिलाफ चंडीगढ़ पुलिस के झूठ पकड़ने के आवेदन पर सुनवाई की थी, जिसे उन्होंने करने से इनकार कर दिया था और उस संबंध में उन्हें अभियोजन पक्ष के गवाह के रूप में पेश किया गया था। वही पीड़ित कोच ने आगे बताया कि अदालत ने धारा 164 सीआरपीसी के तहत दर्ज उनके बयान की प्रति उन्हें लगातार देने से इनकार कर दिया है। “इसके अलावा, याचिकाकर्ता को उक्त बयान की जांच करने और मामले के रिकॉर्ड से उसकी संगति सुनिश्चित करने का उचित अवसर भी नहीं दिया गया है, जो कि शिकायतकर्ता का अधिकार है।उनके वकील ने कहा, अदालत के पीठासीन अधिकारी ने शिकायतकर्ता को उनके पूर्व न्यायिक बयान को सत्यापित करने की अनुमति दिए बिना मामले में गवाही देने का निर्देश दिया है, जो ‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों’ का घोर उल्लंघन है। ऐसी प्रक्रिया शिकायतकर्ता के हितों के लिए अत्यंत हानिकारक है।
वहीं जूनियर महिला कोच ने आरोप लगाया था कि 2016 रियो ओलिंपिक में हिस्सा लेने के बाद वह खेल विभाग में जूनियर कोच के तौर पर भर्ती हुई थी। इसके बाद खेल मंत्री संदीप सिंह ने इंस्टाग्राम और स्नैपचैट पर उसको मैसेज भेजे। फिर मुझे चंडीगढ सेक्टर 7 लेक साइड मिलने के लिए बुलाया। महिला कोच के आरोपों के मुताबिक 1 जुलाई को मंत्री ने उसे स्नैपचैट कॉल किया। जिसमें डॉक्यूमेंट्स वैरिफिकेशन के लिए मुझे सेक्टर 7, चंडीगढ़ में अपने आवास पर आने के लिए कहा। जूनियर महिला कोच ने कहा कि इसके बाद वह मंत्री के सरकारी आवास पर पहुंची, वहां वे कैमरे वाले ऑफिस में नहीं बैठना चाहते थे। वह मुझे अलग केबिन में लेकर गए, वहां मेरे पैर पर हाथ रखा। मंत्री ने कहा कि तुम मुझे खुश रखो, मैं तुम्हें खुश रखूंगा। मेरी बात मानने पर आपको सभी सुविधाएं और मनचाही जगह पोस्टिंग मिलेगी। इसके बाद महिला कोच ने मंत्री पर काफी गंभीर आरोप लगाए थे जिसके लिए उसने हर जगह पर न्याय की गुहार लगाई थी, लेकिन पीड़ित को कहीं भी न्याय नहीं मिला। जिसका मामला अब अदालत में चल रहा है।

