गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज : गुरुग्राम के एक आरटीआई एक्टिविस्ट ने किया फरुखनगर तहसील में हुई करीब 254 अवैध तरीके से टुकड़ों में रजिस्ट्री का खुलासा किया है। जिसमें सीट पर बैठे अधिकारियों ने जमकर चांदी कूटी है।फर्रुखनगर तहसील में भूमि खरीदने व बेचने की जांच पड़ताल में बड़े पैमाने पर गड़बड़ियों का पर्दाफाश हुआ है।
सूत्रों व मीडिया रिपोर्ट से मिली जानकारी के अनुसार गुरुग्राम के राजस्व विभाग की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि फरुखनगर तहसील के दो तहसीलदार और एक नायब तहसीलदार ने अप्रैल से अगस्त 2025 के बीच कम से कम **254 रजिस्ट्री पंजीकृत** की है। जिनमें नियम और कानून को ताक पर रखकर सरकार को करोड़ों रुपए का चूना लगाए जाने का अंदेशा है। तथा सभी रजिस्ट्री अवैध तरीके से की गई है।*जांच रिपोर्ट से हुआं खुलासा किस-किस तहसीलदार ने की रजिस्ट्री*जांच में यह सामने आया कि तहसीलदार **नवजीत कौर** ने 94 अवैध रजिस्ट्री कीं। वहीं* नायब तहसीलदार **अरुणा कुमारी** ने 89 फर्जी लेन-देन पास किए तथा तहसीलदार **रीता ग्रोवर** ने 71 गलत सौदे मंजूर किए।उपरोक्त रजिस्ट्री में ज्यादातर मामलों में कृषि भूमि को टुकड़ों में बांटकर अवैध कॉलोनियां बसाएं जाने के नाम पर रजिस्ट्री मोटे लेने दें तथा रसुखदार राजनेताओं की मिलीभगत से कर दी गई।

भूमि घोटाले की जांच 8 सितंबर को अतिरिक्त मुख्य सचिव एवं वित्त आयुक्त **सुमित्रा मिश्रा** के आदेश पर शुरू हुई थी। जिसकी सामाजिक कार्यकर्ता **रमेश यादव** ने शिकायत दर्ज कराई थी कि कई सौदे हरियाणा की अनिवार्य ऑनलाइन रजिस्ट्री प्रणाली को दरकिनार कर किए गए। वहीं इनमें कई लेन-देन जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के जरिए हुए,जबकि राज्य में इस पर रोक लगी हुई है।
शिकायत के आधार पर डिविजनल कमिश्नर **आर.सी. बिढलान** की अध्यक्षता में एक विशेष जांच दल गठित किया गया, जिसमें पटौदी एसडीएम भी शामिल थे। रिपोर्ट को अब गुरुग्राम उपायुक्त **अजय कुमार** ने चंडीगढ़ मुख्यालय भेज दिया है।अधिकारियों के अनुसार घोटाले केवल फर्रुखनगर तक ही सीमित नहीं हैं। जबकि बादशाहपुर** में बिना टाउन एंड कंट्री प्लानिंग विभाग की मंजूरी के प्लॉट वैध किए गए। *मानेसर** में ऐसे लोगों के नाम पर रजिस्ट्री कराई गई जो असली जमीन मालिक ही नहीं थे।पहले भी मामले सुर्खियों में रहे हैं, इससे पहले भी कादीपुर (गुरुग्राम) में नायब तहसीलदार को सैकड़ों अवैध रजिस्ट्री और GPA सौदों के आरोप में निलंबित किया जा चुका है। आरोप है कि प्रति रजिस्ट्री में लाखों रुपए का मोटा खेल होता रहा है। वहीं सुविधा शुल्क के रूप में लाखों रुपए लिए जाते थे। फरुखनगर तहसील के एक वकील ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि सीट पर बैठे राजस्व अधिकारी टूकडों में रजिस्ट्री करने के करीब **1 लाख से 4 लाख रुपये तक की मांग करते थे।
फरुखनगर तहसील के गांव सुल्तानपुर, साढराणा,झूण्डली सराय , खवासपुर आदि में कृषि की भूमि में अवैध कॉलोनियां कट रही है। जिनपर डीटीपी विभाग का पीला पंजा भी कई दफा चल चुका है,लेकिन मोटा नजराना पहुंचने के बाद मामला शांत हो रहा है। उक्त क्षेत्र में गलत रजिस्ट्री के कारण कई मामले पुलिस थानों में भी चल रहे हैं।
