गुरुग्राम, सतीश कौशिक : विश्व आत्महत्या रोकथाम पखवाड़े के अवसर पर वीरवार को जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (DMHP) गुरुग्राम की टीम ने सूरज डिग्री कॉलेज, गुरुग्राम में एक जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य छात्रों को आत्महत्या जैसी गंभीर सामाजिक व मानसिक स्वास्थ्य समस्या के प्रति संवेदनशील बनाना और रोकथाम के उपायों से अवगत कराना था।
कार्यक्रम का संचालन मानसिक स्वास्थ्य टीम ने वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. अजय के नेतृत्व में किया। टीम में डॉ. उपासना दहिया (मेडिकल ऑफिसर), श्री हरि राज (एम.एंड.ई.ओ.), डॉ. सचिन खाताना (क्लिनिकल साइकॉलजिस्ट), संजीव सोनी (सायकिएट्रिक सोशल वर्कर) तथा श्री नरेंद्र यादव (सोशल वर्कर) शामिल रहे।
सूरज डिग्री कॉलेज की ओर से निदेशक आनंद प्रसाद, प्राचार्य डॉ. भावना, प्रो. डॉ. निर्मला (रसायनशास्त्र विभाग), डॉ. योगेश वर्मा (समाजशास्त्र विभाग), श्रीमती अनामिका (अंग्रेज़ी विभाग) और सुश्री राखी (रसायनशास्त्र विभाग) ने अपने विचार साझा किए।
*आत्महत्या की पहचान के लक्षण – डॉ. सचिन खाताना*
डॉ. सचिन खाताना ने अपने सम्बोधन में बताया कि आत्महत्या की पहचान करने वाले प्रमुख लक्षणों (Suicide Warning Signs) पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि आत्महत्या करने की प्रवृत्ति रखने वाले व्यक्ति अक्सर लगातार उदासी, निराशा या हताशा महसूस करते हैं, जीवन जीने का कोई उद्देश्य न दिखने की बात करते हैं, बार-बार “अब जीने का कोई मतलब नहीं” जैसी बातें कहते हैं।इसके अलावा ऐसे लोग अकेलेपन को अधिक पसंद करने लगते हैं, परिवार व मित्रों से दूर रहने लगते हैं और सामाजिक गतिविधियों से बचते हैं। उनके व्यवहार, स्वभाव और दिनचर्या में अचानक बदलाव देखने को मिल सकता है – जैसे चिड़चिड़ापन, गुस्सा, नींद की समस्या, नशे का बढ़ता सेवन या पढ़ाई/काम में रुचि का घटना। डॉ. खाताना ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि इन संकेतों को हल्के में न लें और समय रहते ऐसे व्यक्ति की मदद करने का प्रयास करें।
*आत्महत्या रोकथाम के उपाय – डॉ. उपासना दहिया*
इसके बाद डॉ. उपासना दहिया ने आत्महत्या रोकथाम के उपायों (Suicide Prevention Strategies) पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि आत्महत्या की रोकथाम के लिए सबसे पहला कदम है व्यक्ति की भावनाओं को सुनना और समझना। यदि कोई व्यक्ति बार-बार नकारात्मक विचार व्यक्त करता है, तो उससे संवेदनशीलता के साथ बात करनी चाहिए और उसकी परेशानियों को गंभीरता से लेना चाहिए।उन्होंने विद्यार्थियों को समझाया कि मानसिक तनाव या अवसाद की स्थिति में समय पर परामर्श (Counseling) लेना बेहद जरूरी है। परिवार, मित्र और शिक्षक सहयोगी भूमिका निभाकर ऐसे व्यक्ति को मदद के लिए प्रेरित कर सकते हैं।
डॉ. दहिया ने बताया कि आत्महत्या रोकथाम के लिए हेल्पलाइन नंबरों, सेवाओं और जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम जैसे सरकारी संसाधनों का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को तनावपूर्ण परिस्थितियों में योग, व्यायाम, रुचि आधारित गतिविधियों का सहारा लेना चाहिए और सकारात्मक सोच विकसित करनी चाहिए।इस अवसर पर सूरज डिग्री कॉलेज की प्राचार्य डॉ. भावना ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रत्येक छात्र-छात्रा का दायित्व है कि वे अपने साथियों का ध्यान रखें और यदि कोई साथी मानसिक संकट से गुजर रहा हो तो उसकी मदद करने के लिए आगे आएं। उन्होंने कहा कि “एक छोटी सी संवेदनशील पहल भी किसी की जिंदगी बचा सकती है।”कार्यक्रम का शुभारंभ संजीव सोनी ने किया! जिन्होंने आत्महत्या जैसी ज्वलंत समस्या पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसके रोकथाम की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम के अंत में श्री हरि राज ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे हर एक जीवन को बचाने में अपना योगदान दें और समाज को आत्महत्या-मुक्त बनाने की दिशा में आगे बढ़ें।

