गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज: गुरुग्राम के सेक्टर 10 सिटी नर्सिंग ऑफीसरों ने दूसरे दिन हड़ताल पर कहा कि जब हम म्युचुअल (खुद आपसी सहमति से) ट्रांसफर के लिए तैयार हैं, तो सरकार जबरन मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी (एमओटीपी) क्यों थोप रही है। सरकार को चाहिए कि मरीजों के हितों में कदम उठाए। स्टाफ पूरी शिद्दत से काम करता हैं।

सेक्टर-10 सिविल अस्पताल में दूसरे दिन हड़ताल पर बैठी नर्सिंग ऑफिसर्स ने सरकार की नई ट्रांसफर पॉलिसी को सिरे नकारते हुए कहा कि यह पॉलिसी उनके निजी जीवन को प्रभावित करेगी। इसलिए इसे रद्द किया जाए। नर्सिंग ऑफिसर वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के बैनर तले जारी तीन दिवसीय दो घंटे की हड़ताल के दूसरे दिन भी जिले की नर्सिंग ऑफिसर्स ने एकजुट होकर एमओटीपी का पुरजोर विरोध किया। मंगलवार सुबह 10 से 12 बजे तक चली पेन डाउन हड़ताल के दौरान नर्सिंग स्टाफ ने ओपीडी और वार्डों में काम बंद रखा, हालांकि इमरजेंसी, लेबर रूम और आईसीयू सेवाओं को जारी रखा गया। हड़ताली नर्सिंग ऑफिसर्स ने कहा कि सरकार उन पर जबरदस्ती एमओटीपी थोप रही है। इस पॉलिसी के तहत 5 साल एक स्टेशन पर पूरा कर चुके हर कर्मचारी को जबरन ट्रांसफर ड्राइव में शामिल होना पड़ेगा। यह तानाशाही नहीं तो और क्या है।
नर्सिंग ऑफिसर्स ने कहा कि हमने सरकार से म्यूचुअल ट्रांसफर का विकल्प मांगा था। अगर किसी को अपने गृह जिले में जाना है और दूसरा कर्मचारी उसकी जगह आने को तैयार है तो सरकार को आपसी सहमति से ट्रांसफर करना चाहिए। इसमें सरकार का भी कोई नुकसान नहीं और कर्मचारी का परिवार भी डिस्टर्ब नहीं होगा। लेकिन सरकार म्यूचुअल ट्रांसफर जैसी आसान व्यवस्था को छोडक़र जबरन वाली पॉलिसी ला रही है, जो समझ से परे है।वॉशिंग अलाउंस तक नहीं, सुरक्षा का भी कोई इंतजाम नहींनर्सिंग ऑफिसर्स ने अपनी दूसरी बड़ी पीड़ा भी सामने रखी। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में सबसे ज्यादा काम नर्सिंग स्टाफ करता है और उनमें भी महिलाएं ज्यादा हैं। अस्पतालों में अक्सर अप्रिय घटनाएं होती हैं, मगर नर्सिंग ऑफिसर्स की सुरक्षा के लिए कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। रात की शिफ्ट में महिला स्टाफ खुद को असुरक्षित महसूस करता है। इतना ही नहीं, नर्सिंग ऑफिसर्स को वर्षों से वॉशिंग अलाउंस तक नहीं दिया जा रहा है, जबकि वर्दी की धुलाई और रखरखाव में उनका हर महीने पैसा खर्च होता है। सरकार एक तरफ ट्रांसफर जैसी बड़ी पॉलिसी थोप रही है, दूसरी तरफ बुनियादी भत्ते और सुरक्षा तक नहीं दे रही।नर्सिंग ऑफिसर्स ने कहा कि कैडर में 98 प्रतिशत महिलाएं हैं। उन्हें मॉर्निंग, इवनिंग, नाइट तीनों शिफ्ट करनी पड़ती हैं। अगर उन्हें दूसरे जिले में भेज दिया गया तो उनकी सुरक्षा कौन करेगा। उनके छोटे बच्चों और बुजुर्गों की देखभाल कौन करेगा।
हड़ताल पर बैठी नर्सिंग ऑफिसर्स ने सरकार से मांग की कि ट्रांसफर पॉलिसी जबरन नहीं बल्कि म्यूचुअल आधार पर लागू हो। खाली पदों की सूची पहले जारी हो। मेवात, नूंह, पलवल में काम कर रहे स्टाफ को मेवात अलाउंस मिले, जिला अस्पताल में रोटेशन जिले के अंदर ही हो और नर्सिंग ऑफिसर्स की सुरक्षा व वॉशिंग अलाउंस जैसे बुनियादी मुद्दों का समाधान किया जाए।
