गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज: गुरुग्राम के सेक्टर-50 में आदमपुर झाड़सा गांव में 11 सितंबर को बाबा बालकनाथ मंदिर, गोशाला और समाधि स्थल तोड़े जाने को लेकर आसपास के क्षेतवासियो ने एक पंचायत आयोजित हुई। जिसमें आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीण, बुद्धि जीवित,नेतागण तथा संत-महात्मा इकट्ठे होकर निगम,एचएसवीपी की संयुक्त कार्रवाई का विरोध किया।
वहीं सोमवार को एक प्रतिनिधिमंडल गुरुग्राम के उपायुक्त उत्तम सिंह से मुलाकात करके अपनी मांग रखेगा। पंचायत की अध्यक्षता छत्तर ठाकरान ने की, जिसमें 360 खाप के प्रधान महेंद्र सिंह ठाकरान सहित कई प्रमुख लोगों ने संबोधित किया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि मंदिर में तोड़फोड़ की कार्रवाई किसी बिल्डर के इशारे पर की गई है। उनका यह भी आरोप है कि मंदिर परिसर से दानपात्र गायब है। इस दानपात्र में सैकड़ों श्रद्धालु रोजाना चढ़ावा डालते थे। साधु-संतों ने कहा कि यह मंदिर करीब 150-200 साल से अधिक पुराना है। उन्होंने चेतावनी दी है कि सनातन पर ऐसे प्रहार से उन्हें प्राण त्यागने होंगे। शासन-प्रशासन से खंडित निर्माण को दोबारा बनवाने की मांग की गई, पंचायत में ग्रामीणों ने कहा कि सरकार ने अगर जल्द उनकी बात नहीं मानी तो बड़ा आंदोलन हो सकता है। ग्रामीणों ने बताया कि सरकार ने 2004 में उक्त जमीन का अधिग्रहण किया था, पर इस पर कब्जा नहीं लिया था। प्रशासन पर तानाशाहीपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया गया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में करीब 16 घंटे तक चली कार्रवाई में शिव मंदिर को छोड़कर पांच अन्य मंदिर, गोशाला और समाधि ध्वस्त कर दिए गए।
पंचायत के दौरान ग्रामीणों ने मंदिर के निर्माण का दोबारा से कार्य कराने की मांग रखी। उन्होंने अपने खिलाफ दी गई शिकायतें वापस लेने और गोशाला के सभी गाय-बछड़ों को वापस लाने की भी मांग की। ग्रामीणों के अनुसार, एचएचवीपी की तोड़फोड़ से करीब 12 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। मंदिर में स्थापित देवी-देवताओं की प्राचीन मूर्तियों को हटा दिया गया। करीब 35 गाय-बछड़ों को गोशाला से दूसरी जगह स्थानांतरित किया गया है।विज्ञापननहीं सुनी बात को कोर्ट का खटखटाएंगे दरवाजा।
पंचायत में निर्णय लिया गया कि मंदिर तोड़फोड़ और अन्य मांगों को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल 14 सितंबर को गुरुग्राम के उपायुक्त से मुलाकात करेगा। यदि उनकी मांगें पूरी नहीं होती हैं, तो वे मुख्यमंत्री नायब सैनी से भी मिलकर अपनी बात रखेंगे। ग्रामीणों ने यह भी तय किया कि अगर जिला प्रशासन और प्रदेश सरकार उनकी बात नहीं सुनते हैं, तो वे कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।मंदिर की विवादित जमीन पर प्रवेश करने से रोका
पंचायत के बाद जब ग्रामीणों ने मंदिर की जमीन में प्रवेश करना चाहा तो पुलिस ने उन्हें रोक दिया। विवादित स्थल में तोड़े गए मंदिर व समाधि स्थल से मलबा उठाकर ले जाने का विरोध ग्रामीणों की तरफ से किया जा रहा है। ग्रामीणों के आग्रह पर सहायक पुलिस आयुक्त (सदर) धर्मबीर सिंह ने यह कार्य रूकवा दिया। पंचायत में मौजूद साधुओं ने कहा कि विवादित जमीन पर अब भी बुलडोजर चल रहा है। मंदिर का मलबा उठाया जा रहा है। पंचायत में फैसला हुआ कि इस कार्य को तुरंत रूकवाया जाए। इसके बाद पंचायत में मौजूद सभी सदस्यों ने इस जमीन तक तरफ कदम बढ़ा दिए। रास्ते में पुलिस ने उन्हें रोक लिया। विवादित जमीन पर 200 से अधिक पुलिस अधिकारी और कर्मी तैनात रहे।
ग्रामीण बोले- तोड़फोड़ कर रही भावनाएं आहतयह मंदिर 200 साल से ज्यादा पुराना था, जिससे लोगों की श्रद्धा की भावना जुड़ी हैं। एचएसवीपी की तोड़फोड़ की कार्रवाई से लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं। सरकार को मंदिर की जमीन वापस करनी चाहिए। – महीपाल ठाकरान,
ग्रामीणबाबा बालकनाथ मंदिर में आसपास के गांवों सहित अन्य क्षेत्र से लोग पूजा-अर्चना करने आते हैं। एचएसवीपी के अधिकारियों की तोड़-फोड़ की कार्रवाई से लोगों में प्रशासन व प्रदेश सरकार के प्रति आक्रोश पनप रहा है। – महेंद्र ठाकरान,
HSVP की ओर से मंदिर परिसर व गोशाला में तोड़फोड़ करके गलत किया है। एक तरफ सरकार मंदिरों को नहीं तोड़ने की बात कह रही है। वहीं, दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा गुरुग्राम में मंदिरों को तोड़ा जा रहा है। – ईश्वर, ग्रामीण।
मुख्यमंत्री नायब सैनी व जिला प्रशासन को बाबा बालक नाथ मंदिर में तोड़फोड़ बंद करानी चाहिए। वहीं, तोड़े गए मंदिर परिसर व अन्य निर्माण को दोबारा से बनवाकर देना चाहिए। प्रशासन की ओर तोड़फोड़ कार्रवाई की हर तरफ निंदा हो रही है। – राजेंद्र शर्मा
