गुरुग्राम, सतीश भरद्वाज: हरियाणा में रिटायरमेंट से 5 दिन पहले करप्शन केस में फंसे IAS अफसर डी. सुरेश पर दर्ज FIR सामने आई है। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की जांच में सामने आया कि गुरुग्राम के सेक्टर-23 स्थित HSVP की करीब 3.5 करोड़ रुपए बाजार कीमत वाली प्रॉपर्टी का मालिकाना हक महज 6.71 लाख रुपए में दे दिया गया। जिस प्लॉट की कन्वेयंस डीड की गई, वह डिफॉल्ट प्रॉपर्टी थी।
मामले के वक्त डी. सुरेश हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के चीफ एडमिनिस्ट्रेटर थे। करीब 7 साल चली जांच के बाद ACB ने उन्हें, तत्कालीन संपदा अधिकारी मुकेश कुमार समेत कुल 9 लोगों को आरोपी बनाया है। डी. सुरेश 31 अगस्त को रिटायर हुए हैं।हालांकि, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने डी. सुरेश को अंतरिम राहत दी है। कोर्ट ने कहा है कि जांच के दौरान अगर उनकी कस्टडी की जरूरत पड़ती है तो उन्हें कम से कम 7 दिन पहले नोटिस देना होगा। मामले की अगली सुनवाई 16 अक्टूबर 2026 को होगी।गुरुग्राम में 500 वर्ग गज के प्लॉट के मामले में यह एफआईआर दर्ज हुई।गुरुग्राम में 500 वर्ग गज के प्लॉट के मामले में यह एफआईआर दर्ज हुई।जानिए एफआईआर में किन बड़ी बातों का खुलासा…1988 में हुआ था 500 वर्ग गज प्लॉट का अलॉटमेंटः मामला सेक्टर 23-23ए के 500.64 वर्ग गज के प्लॉट नंबर 4377 का है। HSVP ने 1988 में इसे एसके खोसला की फर्म को 6.74 लाख रुपए में अलॉट किया था। सिर्फ 10% राशि जमा होने के बाद बकाया नहीं चुकाया गया।
नोटिस के बावजूद भुगतान न होने पर HSVP ने 8 अप्रैल 2002 को अलॉटमेंट रद्द कर प्लॉट वापस ले लिया।इसके बावजूद 2003 में एसके खोसला ने जब्त प्लॉट की GPA अभय सहारण के नाम कर दी। राम निवास राठी इसमें गवाह थे। बाद में प्रॉपर्टी सतवीर सिंह मलिक को ट्रांसफर कर दी गई।दूसरे प्लॉट के रिकॉर्ड का लिया गया सहाराः जांच में सामने आया कि खोसला का दूसरा प्लॉट नंबर 4358 अलग मामला था। उसकी पूरी रकम जमा हो चुकी थी, लेकिन रिकॉर्ड की गड़बड़ी से वह भी रद्द हुआ था। कंज्यूमर फोरम ने बाद में उसे बहाल करने का आदेश दिया।आरोप है कि अधिकारियों ने दोनों मामलों को एक जैसा दिखाया, जबकि प्लॉट नंबर 4377 डिफॉल्ट के कारण रद्द हुआ था। क्लर्क हनुमान सिंह और सहायक कृष्ण कुमार ने गलत नोट तैयार किया, जिसे संपदा अधिकारी मुकेश कुमार ने मंजूर किया। इसके आधार पर 1 मार्च 2019 को तत्कालीन HSVP चीफ एडमिनिस्ट्रेटर डी. सुरेश कुमार ने प्लॉट 4377 की जब्ती निरस्त कर दी।3.5 करोड़ की प्रॉपर्टी की 6.71 लाख में कन्वेयंस डीडः 2019 में प्लॉट की कलेक्टर रेट पर कीमत करीब 1.75 करोड़ और बाजार कीमत करीब 3.5 करोड़ रुपए थी। इसके बावजूद इसकी कन्वेयंस डीड सिर्फ 6.71 लाख रुपए में की गई। इससे सरकारी खजाने को नुकसान पहुंचने का आरोप है। मामला रिटायर्ड पुलिस अधिकारी सतेंद्र कुमार की विजिलेंस जांच में सामने आया। करीब 7 साल की जांच के बाद कार्रवाई की सिफारिश की गई।एसीबी की ओर से रिटायर आईएएस डी. सुरेश के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर।
एसीबी की ओर से रिटायर आईएएस डी. सुरेश के खिलाफ दर्ज कराई गई एफआईआर।मुख्य सचिव की मंजूरी के बाद ACB ने दर्ज की FIRहरियाणा के मुख्य सचिव से फरवरी 2026 में मुकदमा चलाने की मंजूरी मिलने के बाद ACB ने 26 अगस्त 2026 को FIR दर्ज की। मामले की जांच DSP स्तर के अधिकारी को सौंपी गई है। जांच अधिकारी के मुताबिक, साक्ष्यों के आधार पर आगे कार्रवाई की जाएगी। जांच में अन्य अधिकारियों और बिचौलियों की भूमिका भी सामने आने पर कार्रवाई हो सकती है।IPS वाई पूरन कुमार सुसाइड केस पर खुलकर बोलेहरियाणा में IPS वाई पूरन कुमार ने 7 अक्टूबर 2025 को चंडीगढ़ स्थित आवास पर गोली मारकर सुसाइड कर लिया था। उस वक्त उनकी IAS अफसर पत्नी अमनीत पी कुमार जापान दौरे पर थीं। सुसाइड नोट में तत्कालीन डीजीपी समेत 15 अफसरों पर एफआईआर दर्ज हुई। तब कई दलित संगठन परिवार के साथ खड़े हुए और कार्रवाई होने तक संस्कार करने को राजी नहीं हुए थे। उस वक्त आईएएस डी. सुरेश परिवार के साथ खड़े नजर आए।उन्होंने आश्वासन दिया कि पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए वे हर परिस्थिति का सामना करेंगे। अनुसूचित जाति के लोग आईपीएस पूरन कुमार के चंडीगढ़ स्थित आवास पर एकजुट हुए थे। समाज के प्रतिनिधिमंडल ने पूरन कुमार की पत्नी आईएएस अमनीत कुमार को मुसीबत की इस घड़ी में साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया। इसी दौरान डी सुरेश कुमार ने अपनी बात रखी थी।
