गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज: एक पीड़ित की शिकायत पर संज्ञान लेते हुए न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी (JMFC) द्वारा जारी आदेश के बावजूद थाना पालम विहार के एसएचओ तथा भाजपा के पूर्व पार्षद रविंद्र सहित अन्य आरोपित निर्धारित तिथि (24-04-2026) पर अदालत में पेश नहीं हुए। इस पर अदालत ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सुनवाई की अगली तारीख निर्धारित कर दी है।
अदालत में दायर मामले के अनुसार पीड़ित सतबीर ने आरोप लगाया था कि संबंधित थाना पालम विहार के अधिकारियों और वार्ड तीन के पूर्व पार्षद रविंद्र, उसके भाई सुनील, राजबीर, मनोज, भतीजा गौरव, पत्त्नी सरला, बाउंसर नीरज, उसके लड़के मनश द्वारा उसके साथ जबरदस्ती घर में घुसकर मारपीट की गई,उसके मकान में तोड़फोड़, गन्दगी फैलाई उसके ऊपर लड़के के गले से दो तोले की सोने की चेन छीनने का झुठा आरोप लगाया। जिसकी शिकायत भी उन्होंने संबंधित थाना पालम विहार में की तथा गुरुग्राम के सीपी विकास अरोड़ा व डीसीपी वेस्ट करण गोयल से भी दोषियों पर मुकदमा दर्ज कर न्याय दिलाने की गुहार मिलकर लगाई थी, लेकिन पुलिस ने फिर भी कोई कार्रवाई नहीं की,और ना ही उसके खिलाफ 217 की कार्यवाही की,वह एक मंत्री की जी हजूरी करता है, इसीलिए पुलिस उसके दबाव में रहतीं हैं। जिसके बाद पीड़ित ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था। शिकायत पर संज्ञान लेते हुए अदालत ने सभी प्रस्तावित आरोपियों को तलब करने के आदेश दिए थे, लेकिन तय तारीख पर वे अदालत में हाजिर नहीं हुए। पीड़ित ने बताया कि निश्चित तारीख पर थाना पालम विहार प्रभारी तथा सभी आरोपी अदालत में पेश नहीं हुए, जिस पर अदालत में अगली तारीख 3 जुलाई 2026 लगा दी है।

कानूनी जानकारों के अनुसार, अदालत के समन के बावजूद पेश न होना गंभीर अपराध माना जाता है और भविष्य में अदालत सख्त रुख भी अपना सकती है। अब इस मामले की अगली सुनवाई में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारी और जनप्रतिनिधि अदालत में पेश होते हैं या नहीं, तथा पीड़ित को न्याय मिलने की प्रक्रिया किस दिशा में आगे बढ़ती है। वहीं जिले के एक फौजदारी के वरिष्ठ वकील का कहना था कि हो सकता है कि किसी कारणवश अदालत से आरोपियों को नोटिस नहीं पहुंचे हो। जिस कारण से आरोपीयों अदालत में पेश नहीं हुए हो। या फिर अदालत से सम्मन (नोटिस) देने वाले उनके निवास पर गए हो तब सभी आरोपी भूमिगत हो गए हो या घर पर नहीं मिले हो। जिस वजह से आरोपी अदालत नहीं पहुंच पाए हैं। इसके अलावा भी कई अन्य कारण की वजह से अदालत नहीं पहुंच पाए हों। पीड़ित का कहना था कि अदालत के आदेश के बाद ही पता चलेगा कि आरोपी किस वजह से अदालत में निर्धारित तारीख पर नहीं पहुंच पाए थे।
