गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज : हरियाणा के मुख्यमंत्री ने रविवार दूर शाम को ताऊ देवीलाल स्टेडियम में आयोजित राज्य स्तरीय श्रम जागरूकता एवं सम्मान समारोह में घोषणा करते हुए कहा कि राज्य सरकार संगठित श्रमिकों के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक स्टेट सोशल सिक्योरिटी बोर्ड का गठन करेगी। इस बोर्ड के माध्यम से ऑटो चालकों और अन्य ड्राइवरों को भी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के दायरे में लाया जाएगा। इस अवसर पर उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री भी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री सैनी ने अपने संबोधन में कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित ‘विकसित भारत 2047’ का लक्ष्य तभी साकार हो सकता है, जब श्रमिक वर्ग की सक्रिय भागीदारी और सशक्तिकरण सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने श्रमिकों को देश और राज्य की अर्थव्यवस्था की सबसे मजबूत कड़ी बताते हुए कहा कि उनकी मेहनत और समर्पण ही विकास की गति को आगे बढ़ाते हैं। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि सेवा सुरक्षा ढांचे के तहत नियुक्ति पत्र जारी करने की प्रक्रिया जारी है और सभी पात्र श्रमिकों को 15 जून तक नियुक्ति पत्र प्रदान कर दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि हरियाणा श्रमिक कल्याण के क्षेत्र में अग्रणी राज्य बनकर उभरा है और न्यूनतम मजदूरी में 35 प्रतिशत की वृद्धि लागू करने वाला देश का पहला राज्य है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में जहां न्यूनतम मजदूरी 2,903 रुपये थी, वहीं 2014 में यह बढ़कर 6,289 रुपये हो गई थी और वर्तमान में यह 19,425 रुपये तक पहुंच चुकी है। यह वृद्धि राज्य सरकार की श्रमिकों के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है और समावेशी आर्थिक विकास को मजबूत करती है।उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने 29 श्रम कल्याण योजनाओं के तहत 34,197 श्रमिकों के खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से 40 करोड़ रुपये की राशि सीधे भेजी है, जिससे पारदर्शिता बढ़ी है और लाभार्थियों को समय पर सहायता मिल रही है। इसके साथ ही, ई-श्रम पोर्टल के माध्यम से राज्य में 54.32 लाख असंगठित श्रमिकों का पंजीकरण किया जा चुका है, जबकि संगठित क्षेत्र में 33.58 लाख श्रमिक 4.5 लाख संस्थानों में पंजीकृत हैं। पंजीकरण कराने वाले श्रमिकों को 1,100 रुपये की प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है।
स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य में औद्योगिक श्रमिकों के लिए वार्षिक मुफ्त स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था की जा रही है, जबकि पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को ओपीडी, आईपीडी, दवाइयों और जांच की सुविधाएं मुफ्त उपलब्ध कराई जाएंगी। मानेसर स्थित ईएसआई अस्पताल को 100 से बढ़ाकर 200 बेड का किया जा रहा है और इसे मेडिकल कॉलेज के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके अलावा विभिन्न स्थानों पर नई ईएसआईसी डिस्पेंसरी भी स्थापित की जाएंगी। श्रमिकों के बच्चों की शिक्षा को ध्यान में रखते हुए अटल आवासीय विद्यालय भी स्थापित किए जाएंगे।मुख्यमंत्री ने बताया कि सिलिकोसिस से प्रभावित श्रमिकों के पुनर्वास के लिए राज्य सरकार प्रभावी नीति लागू कर रही है, जिसके तहत 673 लाभार्थियों को अब तक 41.74 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की जा चुकी है। इसके अतिरिक्त श्रमिकों और उनके परिवारों को शिक्षा, मातृत्व, बेटियों के विवाह और अन्य सामाजिक आवश्यकताओं के लिए वित्तीय सहायता दी जा रही है, जबकि मृत्यु या गंभीर विकलांगता की स्थिति में 5.15 लाख रुपये तक का मुआवजा भी सुनिश्चित किया गया है।
इस अवसर पर उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह ने कहा कि किसी भी देश की प्रगति उसके श्रमिकों की मेहनत पर निर्भर करती है और हरियाणा भी अपने श्रमिकों के परिश्रम के बल पर औद्योगिक और आर्थिक क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार श्रमिकों के कल्याण और उनके परिवारों के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारियों सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

