गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज : गुरुग्राम निगम क्षेत्र वार्ड तीन के अंतर्गत आने वाले गांव मोलाहेड़ा में जमीन की पैमाइश को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। जिसमें एक ग्रामीण ने भूमि पैमाइश की प्रक्रिया में अनियमितता और पक्षपात का आरोप लगाते हुए गिरदावर के खिलाफ उपायुक्त को शिकायत भेजकर मामले की निष्पक्ष जांच कराने की गुहार लगाई है। मिली जानकारी के अनुसार गांव मोलाहेड़ा में दो पक्षों का आपस में एक सिविल मामला अदालत में विचाराधीन है, जिसमें राजस्व खसरा नंबर 106 की भूमि को लेकर रास्ते पर विवाद है। अदालत की कार्यवाही के दौरान संबंधित भूमि की पैमाइश के लिए राजस्व विभाग द्वारा हल्का गिरदावर नियुक्त किया था।
ग्रामीण महिपाल यादव ने अपनी दरखास्त में आरोप लगाया है, कि पैमाइश की प्रक्रिया के दौरान राजस्व नियमों का पूरी तरह पालन नहीं किया गया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय परिस्थितियों और प्रभाव के कारण गिरदावर ने एक पक्ष के साथ मिलकर पक्षपातपूर्ण ढंग से पैमाइश की, जिससे जमीन की वास्तविक स्थिति प्रभावित हुई। शिकायत में कहा गया है कि इस प्रकार की गलत और पक्षपातपूर्ण पैमाइश से न केवल संबंधित पक्षों को नुकसान हो रहा है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी प्रश्नचिह्न लग रहा है। शिकायतकर्ता ने इसे गंभीर मामला बताते हुए, इसकी गहनता से जांच-पड़ताल किसी योग्य वरिष्ठ अधिकारी से तथ्यों के आधार पर मौके पर आकर कराने की प्रशासन से दरखास्त भेज कर गुहार लगाई है। जिसकी प्रति उन्होंने मुख्यमंत्री हरियाणा, मुख्य सचिव तथा देश के प्रधानमंत्री को भी भेजी है। वहीं शिकायतकर्ता ने शिकायत की प्रति देते हुए बताया कि उक्त गिरदावर ने पुरानी आबादी को नई आबादी में दिखा दिया गया है जो कि सरासर ग़लत है, जिससे जहां उन्होंने अदालत को भी गुमराह किया है।
*उपायुक्त से ग्रामीण ने की मांग*
शिकायतकर्ता ने गिरदावर द्वारा की गई भूमि पैमाइश की उच्च स्तरीय निष्पक्षता जांच-पड़ताल सुनिश्चित करने के लिए किसी अन्य स्वतंत्र और वरिष्ठ राजस्व अधिकारी से खसरा नंबर 106, गांव मोलाहेड़ा की दोबारा पैमाइश कराने की मांग करी है।अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन तथा सरकार इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करता है और मामले की जांच किस स्तर पर कराई जाती है। या अदालत ही अपने स्तर पर इसपर संज्ञान लेती है।
*क्या कहते हैं राजस्व अधिकारी*
अदालतों में चल रहे इस प्रकार के मामलों पर एक राजस्व अधिकारी से बात की गई तो उन्होंने नाम न लिखने की शर्त पर बताया कि अगर किसी पक्ष को भूमि पैमाइश पर कोई मतभेद शंका है,तो वह अदालत से अपनी सतुष्टि के लिए आदेश करा कर दुबारा पैमाइश की विडीयो रिकॉर्डिंग करवाकर अदालत में दे सकता है।


