गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज : गुरुग्राम में बीते सोमवार को कांग्रेस पार्टी के जिला अध्यक्ष शहरी ने केंद्र व प्रदेश सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ राष्ट्रपति के नाम जिला प्रशासन ज्ञापन सौंपा था। जिसमें बहुत ही कम संख्या में कार्यकर्ता शामिल हुए। वहीं पार्टी के वरिष्ठ नेताओं की गैरहाजिरी ने संगठन की आपसी गुटबाजी की पोल खोल दी।राजनीतिक गलियारों में इसको लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। सोमवार को जिला कांग्रेस कमेटी द्वारा लघु सचिवालय पर आयोजित धरना प्रदर्शन ने पार्टी की जमीनी हकीकत उजागर कर दी। यह कार्यक्रम हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के निर्देश पर पूरे प्रदेश में आयोजित किया गया था,लेकिन गुरुग्राम में इसका असर कुछ ज्यादा नहीं दिखाई दिया।
ज्ञापन देने के कार्यक्रम में जिला अध्यक्ष (शहरी) पंकज डावर, विधानसभा प्रत्याशी रहे मोहित ग्रोवर, मेयर प्रत्याशी सीमा पाहुजा और अनुसूचित जाति जिलाध्यक्ष राजकुमार सहित केवल 35-40 कार्यकर्ता ही नज़र आएं। जबकि यह प्रदेशव्यापी आह्वान किया गया था, फिर भी इतनी कम भागीदारी ने संगठन की पकड़ और कार्यकर्ताओं के मनोबल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वहीं ज्ञापन धरना प्रदर्शन में कई वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति चर्चा का विषय बन रही है। जिला कांग्रेस (ग्रामीण) अध्यक्ष वर्धन यादव सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी कार्यक्रम से दूरी बनाई रखी। वहीं पार्षद चुनाव लड़ चुके अधिकांश पूर्व उम्मीदवार भी नजर नहीं आए। राजनीतिक हलकों में इसे संगठन के भीतर समन्वय की कमी और नेतृत्व के प्रति असंतोष के संकेत के रूप में देखा जा रहा है।वहीं पार्टी में अंदरखाने असंतोष की आग भी खुलकर सामने आने लगी है। कुछ कार्यकर्ताओं का कहना था कि अभी हुई नियुक्तियों में पार्टी संविधान की अनदेखी की गई। तीन वर्ष की सक्रिय सदस्यता के नियम को दरकिनार कर बाहरी पृष्ठभूमि के लोगों को पद दे दिए गए।
कार्यकर्ताओं में इस बात की चर्चाएं रही कि टिकट वितरण के दौरान जमीनी कार्यकर्ताओं की अनदेखी की गई। सेल्फ डिक्लेरेशन फॉर्म, पहचान पत्र और बूथ स्तर की सत्यापन प्रक्रिया पूरी किए बिना ही कई लोगों को जिम्मेदारियां सौंप दी गईं। इससे वर्षों से पार्टी के लिए काम कर रहे समर्पित कार्यकर्ता स्वयं को हाशिए पर खड़ा कर दिया गया है।धरना प्रदर्शन के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं द्वारा व्यक्तिगत समर्थन में नारेबाजी किए जाने पर भी आपत्ति दर्ज की गई। इससे स्पष्ट संकेत मिला कि संगठन के भीतर गुटबाज़ी गहराती जा रही है। आम जनता और मीडिया के सामने यह दृश्य पार्टी की छवि पर भी असर डाल गया।गुरुग्राम पार्टी की अंदरूनी लड़ाई की जानकारी प्रदेश कार्यालय से आगे बढ़कर भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच चुकी है। पार्टी नेतृत्व स्थिति की समीक्षा कर रहा है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते संगठनात्मक ढांचे में सुधार, पारदर्शिता और सामंजस्य स्थापित नहीं किया गया, तो गुरुग्राम में कांग्रेस की राजनीतिक जमीन और खिसक सकती हैं।
बता दें कि गत दिनों ग्रामीण जिला अध्यक्ष ने हुडा प्रशासक को भी ज्ञापन सौपा था। जिसमें शहरी जिला अध्यक्ष व उनके चहेते नहीं पहुंचे थे। हालांकि राजनीतिक पार्टियों में गुटबाजी कोई नई बात नहीं है। सभी छोटे बड़े कार्यकर्ता किसी न किसी वरिष्ठ नेता की जी हजूरी कर अपनी नेतागिरी चमकाते रहते हैं। जिसमें चाहे भाजपा हो या जजपा, इनेलो हो या आप सभी अपनी नेतागिरी चमकाने की दौड़ में एक दूसरे से आगे निकलने की सोच रख रहे हैं।

