गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज : गुरुग्राम में सोमवार को हिंदू सम्मेलन समिति की ओर से यहां स्थानीय अग्रवाल धर्मशाला में विराट हिंदू सम्मेलन आयोजित किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के अखिल भारतीय वरिष्ठ प्रचारक प्रेमजी, संत प्रकाश दास जी महाराज ने सनातन संस्कृति की मजबूती का संदेश दिया। कार्यक्रम का आयोजन हिंदू सम्मेलन समिति की ओर से किया गया। वार्ड-27 के पार्षद आशीष गुप्ता समेत अनेक लोगों ने यहां पहुंचे अतिथियों का स्वागत किया। इस अवसर पर भंडारा भी आयोजित किया गया, जिसमें सेंकड़ों लोगों ने प्रसाद ग्रहण किया।
अपने संबोधन में आरएसएस के अखिल भारतीय वरिष्ठ प्रचारक प्रेमजी ने कहा कि भारत में जन्म लेना हमारा सौभाग्य है। हम वसुधैव कुटुंबकम की परंपरा को मानने वाले हैं। धर्म की मजबूती और पीढिय़ों में धर्म का संचार करने के लिए प्रत्येक परिवार को वर्ष में कम से कम एक बार धार्मिक स्थलों की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। उन्होंने भोजन के समय मोबाइल के स्थान पर पारिवारिक संवाद को प्राथमिकता देने, परिवार के साथ धार्मिक यात्राएं करने और सुबह के समय धरती माता के चरण स्पर्श जैसे संस्कारों को जीवन में अपनाने का आग्रह किया। युवाओं को सनातन धर्म और राष्ट्र के प्रति जागरुक करने के लिए उन्होंने प्रेरित किया।
इस अवसर पर विश्व प्रसिद्ध कथावाचक पुराण मनीषी श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि परिवार को एकजुट रखने और धार्मिक-सांस्कृतिक संस्कार देने में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। धार्मिक परंपराओं के अनुसार हमारे हर घर में ओउम और स्वस्तिक जैसे सांस्कृतिक प्रतीकों का सम्मान, तुलसी का पौधा, स्वदेशी परिधान और मातृभाषा में संवाद होना चाहिए।संत श्री प्रकाश दास जी महाराज ने कहा कि हिंदू समाज को एकजुट और जागरूक रहने, राष्ट्र से बड़ा कुछ नहीं है। देश-धर्म की सेवा में हमारी भागीदारी होनी चाहिए। उन्होंने सनातन संस्कृति को प्राचीन और महान बताते हुए इसके संरक्षण की अपील की। सामाजिक समरसता पर उन्होंने कहा कि ऐसे सम्मेलनों में समाज को जातियों से ऊपर उठकर संगठित होने का संदेश दिया जाता है।
वहीं संत प्रकाश दास जी महाराज ने कहा कि हिंदू धर्म कोई संकीर्ण पूजा पद्धति नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक कला है। उन्होंने कहा कि एक पनघट और एक मरघट पर सभी भेद समाप्त हो जाते हैं।संगठित हिंदू समाज ही समर्थ भारत की नींव: आशीष गुप्तापार्षद आशीष गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि नागरिक कर्तव्यों और पर्यावरण संरक्षण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि लाल बत्ती पर रुकना, रेल यात्रा में टिकट लेना, जल का सीमित उपयोग करना, पॉलीथिन का त्याग करना और प्रदूषण को रोकना प्रत्येक नागरिक का कर्तव्य है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे अनुशासन ही बड़े सामाजिक परिवर्तन का आधार बनते हैं। उन्होंने कहा कि संगठित हिंदू समाज ही समर्थ भारत की नींव है। उन्होंने स्पष्ट किया कि हिंदुत्व किसी जाति तक सीमित है। उन्होंने कहा कि भारत ने कोरोना काल में पूरी दुनिया को नि:शुल्क दवाइयां उपलब्ध कराकर भारत ने मानवता का उदाहरण प्रस्तुत किया।

