गुरुग्राम,रोशन भारद्वाज : गुरुग्राम में पिछले सात महीनों के अंतराल में अतिक्रमण हटाने के नाम पर एक मुहिम शुरू हुई । शुरुआती दौर में अधिकारी द्वारा सड़कों पर खड़ी रेहड़ियों और सदर बाजार में दुकानदारों द्वारा किया गया अतिक्रमण हटने लगा तो स्थानीय जनता को उम्मीद जगी कि कोई सरकारी अधिकारी जनता की परेशानियों को देखते हुए मैदान में कुछ करने निकला है। लेकिन कुछ दिनों बाद जब धरातल पर अधिकारी के कार्यों की हकीकत दिखने लगी तो आईने की सच्चाई कुछ ओर झलक रही थी। क्योंकि अतिक्रमण के नाम पर अधिकारी द्वारा सिर्फ ओर सिर्फ रेहड़ी पटरी वालों ओर गरीब दुकानदारों को ही टारगेट किया जा रहा था। बड़े व्यापारियों के द्वारा किए गए अतिक्रमण को हटाने के लिए अधिकारी के बढ़ते कदम एकाएक रुक गजाते हैं। आखिर क्यों ..? तभी फिर गुरुग्राम में स्थानीय जनता की चर्चा शुरू हुई कि क्या अधिकारी द्वारा किया जा रहा कार्य। राजनीति से ओतप्रोत तो नहीं क्योंकि धरातल पर अतिक्रमण मुहिम में हकीकत का खेल कुछ ओर ही है..! आखिर कब तक अधिकारी अपनो पर मेहरबान दिखाई देंगे यह भी एक सवाल है।आपको याद होगा कि गुरुग्राम में किसी भी कॉलोनी में मकान बनाओ कोई अधिकारी निरीक्षण। करने नहीं आता लेकिन जैसे ही लेंटर डालने का कार्य शुरू हुआ उसी दिन। निगम अधिकारी की टीम स्पाइडर मैन की तरह उड़कर आपके दरवाजे पर नजर आती है। आपने मकान की एक मंजिल के लिए जैसे ही उनकी जेब गर्म की फिर सभी अनियमिताएं भी सही दिखने लगेगी..! यदि जेब गर्म नहीं की तो आपके निर्माणाधीन मकान के बहार निगम के नोटिस का चस्पा दिखने लगेगा। अधिकारियों से इसी लेन देन ओर जेब गर्म करने के सिस्टम से आज कई कॉलोनियों में अवैध बिल्डिंगे तैयार कर खड़ी कर दी गई है। ऐसे लापरवाह अधिकारियों के प्रति जनता को जागरूक होना होगा।
अधिकारी का सम्मान करो और विजलेंस को याद करो। FIR में अधिकारी के खिलाफ धारा वो लगवाओ की अधिकारी स्पाइडरमैन की कल्पना छोड़ कम से कम तीन साल सलाखों के पीछे अपने भविष्य के दिन बिताए। अब वर्तमान समय में सरकार एक तरफ हरियाणा में नशा कम करने की घोषणाएं कर रही है, जिससे युवा वर्ग नशे के जाल में न फंसे वही दूसरी ओर गुरुग्राम में डीटीपी साहब नशे की दुकान को स्कूल के पास ही बनता देख रहे हैं और उसे रोकने की कार्यवाही के लिए कदम बढ़ाने में असमर्थ है। जबकि यह शराब की दुकान के लिए निर्माण हो रहा है इस दुकान के लेफ्ट साइड 100 मीटर की दूरी पर आयुध डिपो ओर राइट साइड 100 मीटर पर DAV स्कूल सैक्टर14 है ..?जबकि आयुध डिपो के 100 मीटर दायरे में निर्माण होने पर हाईकोर्ट ने स्टे लगा रखा है। वहीं स्कूल के पास बन रहा है तो हरियाणा सरकार की घोषणाओं का मजाक..? यदि यही निर्माण कोई गरीब व्यक्ति अपने जीवन भर की कमाई से परिवार को पालने के लिए कर रहा होता तो डीटीपी अधिकारी महोदय अपने कुछ अधिकारियों के साथ सीना तान कर पिला पंजा ओर पुलिस फोर्स को लेकर वाहवाही करने वीडियो बनवाते ओर फिर सोशल मीडिया पर सुर्खियां बटोरने के लिए इंस्टाग्राम/ फेसबुक ओर अन्य सोशल मीडिया पर कार्रवाई करते हुए दिखाई देते हैं, यह हकीकत गुरुग्राम ही नहीं प्रदेश के हर जिले के अधिकारियों की हकीकत है..जिस पर हमेशा लगता है ..? लेकिन सरकार की ओर से कोई एक्शन इनके खिलाफ देखने को नहीं मिलेगा .।
अतीत के पन्नो को पलट कर देखे तो अतिक्रमण मुहिम के नाम पर ईमानदारी का ड्रामा करने वाले गुरुग्राम में पूर्व उपायुक्त प्रवीण कुमार भला कौन नहीं जानता जिन्होंने दूसरों के आशियाने अतिक्रमण के नाम पर इस लिए तोड़ दिए थे कि वह अवैध है मैं ईमानदार हु और अवैध कार्यों को नहीं होने दूंगा। जबकि अरावली की पहाड़ी श्रृंखला में परवीन कुमार द्वारा खुद अवैध फॉर्म हाउस तैयार किया हुआ है यह है ऐसे अधिकारियों की ईमानदारी का नकाब। इनके फार्म हाउस को तोड़ने फरीदाबाद के अधिकारी गए थे तो यही परवीन कुमार जो आंखें गर्म दिखाकर ईमानदारी की चर्चा करते थे, रिटायरमेंट के बाद एक अधिकारी के सामने फार्म हाउस न तोड़ने के लिए हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते हुए नजर आए
अतुल कटारिया चौक पर DAV स्कूल के पास जो शराब की दुकान के लिए निर्माण किया जा रहा है क्या गुरुग्राम के डीटीपी आर एस भाट स्कूल में पढ़ने वाले उन मासूम बच्चों के भविष्य को समझने का प्रयास करेंगे क्योंकि स्कूल में पढ़ने वाले दो हजार बच्चों में से 10 बच्चे भी यदि नशे की गिरफ्त में आ गए तो इसका जिम्मेदार किसे समझा जाएगा इस पर सवाल अवश्य खड़ा होगा। कि आखिर सरकारी तंत्र में किस अधिकारी की लापहरवाही से बच्चों का भविष्य अंधेरे की खाई में चला जा रहा है।जब इस मामले पर जिला नोडल अधिकारी आरएस भाट के मोबाइल पर सम्पर्क किया गया तो फोन की घंटी बजती रही, उन्होंने फोन ही नहीं उठाया, जिससे उनका पक्ष नहीं लिखा जा सका।बता दें कि इस तरह के दर्जनों मामले नगर निगम,जीएमडीए, पुलिस, सीआईडी, एसीबी तथा एचएसवीपी विभाग में बैठे भ्रष्ट अधिकारियों की टेबलों पर दबी पड़ी हुई है।

