करनाल, सतीश भारद्वाज :हरियाणा के जिला करनाल में घरौंडा सरकारी अस्पताल के डॉक्टर प्रशांत को ड्यूटी के दौरान अस्पताल में आकर एसएचओ द्वारा थप्पड़ मारने और कॉलर पकड़ कर जीप में बैठाने वाले पुलिस इंस्पेक्टर दीपक कुमार को एसपी नरेन्द्र ने सस्पेंड कर दिया है। लेकिन मेडिकल एसोसिएशन एसएचओ पर फिर तर्ज कर गिरफ्तारी की मांग कर रहे हैं। इस मामले पर वीरवार को देर रात तक एसपी करनाल में सीएमओ की बैठक चलती रही, लेकिन कोई नतीजा नहीं निकला। मेडिकल एसोसिएशन का कहना था कि घरौंडा एसएचओ के सस्पेंशन व लाईन हाजिर करने से कोई मतलब नहीं है। एसोसिएशन का तर्क है कि हमने कभी सस्पेंशन की मांग की ही नहीं थी, हमारी मांग एसएचओ व संबंधित पुलिस कर्मचारियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज गिरफ्तार करने की है। जो पुलिस कर्मचारियों ने सरकारी ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर के साथ क्राइम किया है। उसमें उन्हें न्याय चाहिए। अगर यह मांग पूरी नहीं होती है, तो हमारी हड़ताल यूं ही जारी रहेगी।
उधर एससी समाज भी डॉक्टर के समर्थन में आया है। वीरवार की रात को समाज के लोग करनाल ट्रामा सेंटर पहुंचे और डॉक्टर का समर्थन कर एसएचओ के खिलाफ मामला दर्ज करने और गिरफ्तारी की भी मांग की। वहीं एसोसिएशन की हड़ताल के कारण मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस प्रशासन अब मामले को सुलझाने का प्रयास कर रहा है। देर रात एसपी करनाल ने मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों और स्वास्थ्य विभाग के अफसरों के साथ बैठक की। बैठक में क्या कुछ रहा है, अभी तक इसको लेकर स्पष्ट नहीं है। मीटिंग के बाद कुछ डॉक्टर ने मीडिया के सामने यह अवश्य क्या है कि पुलिस दवा बनाकर इस मामले को रफा दफा करवाना चाहती है। एक डॉक्टर ने तो यहां तक कह दिया कि पुलिस बात तो ही बातों में उन पर कभी भी कोई भी कार्रवाई बदले की भावना से कर सकती है।इस घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें घरौंडा थाना के इंस्पेक्टर दीपक कुमार डॉक्टर प्रशांत को कई थप्पड़ मारते दिखाई दे रहे है। डॉक्टर का कॉलर पकड़कर धकेलते हुए जीप की ओर ले जाते है। फिर उन्हें जबरन जीप में बैठाकर थाने लेकर चले जाते हैं। बुधवार की देर रात हुए इस घटनाक्रम पर जमकर हुआ। डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ ने चिकित्सीय कार्य बंद कर धरना दिया। डाक्टरों ने थाना प्रभारी और अन्य पुलिस कर्मियों की गिरफ्तारी, अपहरण का मुकदमा दर्ज करने की भी मांग की है। गुरुवार को मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक के साथ बैठक की और अपनी मांगे रखीं थी। इसके बाद देर शाम एसपी करनाल ने इंस्पेक्टर दीपक को सस्पेंड कर दिया। लेकिन हड़ताल खत्म नहीं की गई है।
घरौंडा अस्पताल में नर्सिंग स्टाफ शालू मखीजा, स्टाफ सदस्य सोनू, जोनी, साहिल आदि ने बताया कि अस्पताल में कुछ मरीज मेडिकल लीगल केस (एमएलसी) के लिए आए थे। उन मरीजों ने ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर प्रशांत के साथ गलत व्यवहार किया। स्थिति बिगड़ने पर डॉक्टर ने पुलिस को फोन कर सहायता मांगी। स्टाफ के अनुसार, फोन पर डॉक्टर और पुलिस के बीच बातचीत हुई। इस दौरान पुलिस की तरफ से कहा गया कि “हम तुम्हारे लिए ही थोड़े बैठे हैं”। स्टाफ ने आगे बताया कि उनके सामने डॉक्टर और पुलिस के बीच कोई गाली-गलौज नहीं हुई। मगर, इसके बाद थाना प्रभारी अपनी गाड़ी से अस्पताल पहुंच गए।
अस्पताल कर्मियों का आरोप है कि थाना प्रभारी दीपक कुमार ने अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टर प्रशांत को बुलाने के लिए कहा। जैसे ही डॉक्टर सामने आए, एसएचओ ने उनका कॉलर पकड़ लिया और उन्हें गाड़ी की ओर ले गए। स्टाफ का कहना है कि डॉक्टर को थप्पड़ भी मारा गया।अस्पताल कर्मियों का आरोप है कि जब उन्होंने पुलिसकर्मियों को रोकने की कोशिश की तो उनके साथ भी बदतमीजी की। कर्मचारियों ने आरोप लगाया गया कि पुलिस कर्मी शराब के नशे में थे। उन्होंने आते डॉक्टर के साथ गाली गलौज बदतमीजी वह मारपीट कर घसीटकर थाने ले गए। जबकि एसएचओ का आरोप है कि फोन पर डॉक्टर ने उनके साथ बदतमीजी करी तथा बाद में लिखित में माफी भी मांगी है।

