गुरुग्राम,सतीश भारद्वाज : गुरुग्राम में फर्जी तरीके से एक दूसरे के नाम रजिस्ट्री करवाने सहित जमीनों में हुएं सैकड़ों (धोखाधड़ी) के मामले उजागर हो चुके हैं, जिनमें एक आम गरीब आदमी से लेकर पंच, सरपंच, पार्षद,मेयर, विधायक, मंत्री संतरी, आईएएस ,आईपीएस, अधिकारी यहां तक की जज व वकील भी लपेटे में आ चुके हैं। जिनपर देश की विभिन्न अदालतों में केस भी चल रहे हैं। लेकिन फिर भी जमीनों में धोखाधड़ी के मामले बंद नहीं हो रहे हैं। अब एक ऐसा मामला गुड़गांव हल्का पटवारी कार्यालय का सामने आया है जिसमें राजस्व रिकार्ड में भी कटिंग कर दी गई है। जिसका मामला काफी दिनों से नगर निगम और राजस्व विभाग के बीच चल रहा था। जिसमें नगर निगम ने जमीन उनके नाम नहीं होते हुए भी 408 के नोटिस जारी कर दिए थे।
गुरुग्राम सदर बाजार का पुराना नाम ( हिदायतपुर छावनी) स्थित खसरा नंबर 469 (गैर मुमकिन आबादी) से जुड़े भूमि विवाद को लेकर स्थानीय निवासियों ने गंभीर आरोप लगाते हुए शिकायत सरकार को भेजी है। निवासियों का आरोप है कि हल्का पटवारी द्वारा आबादी क्षेत्र पर गलत तरीके से बिना किसी प्रमाण के नगर निगम गुरुग्राम के नाम में कमान सराय की जमीन चढ़ा कर पुरानी आबादी के घरों पर ततिमा काट दिया था, जिस पर काफी प्रयास और शिकायतों के बाद उपायुक्त गुरुग्राम द्वारा जिला राजस्व अधिकारी की अध्यक्षता में एक जांच कमेटी का गठन किया गया था। जहां जांच के नाम पर केवल भ्रष्टाचार को संरक्षण दिया गया राजस्व रिकॉर्ड में जिन भी आदेशों या नोटिफिकेशंस का जिक्र किया गया था उनमें से किसी का भी कोई भी अस्तित्व ना तो राजस्व विभाग और ना ही नगर निगम और ना ही कोई अन्य सरकारी कार्यालय सिद्ध कर पाए परंतु उसके बाद भी जांच कमेटी इन सब क्रियाकलापों पर मौन बनी रही।
जांच कमेटी गलत आधार पर किए गए कार्यों को निरस्त नहीं किया ततिमा ठीक करने के आदेश दिए थे। लेकिन भ्रष्ट अधिकारियों को सरकारी संरक्षण प्राप्त था, इसलिए वह इसके बाद भी अपनी हरकतों से बाज नहीं आए 03-01- 2025 को राजस्व रिकॉर्ड में ततिमा (8175) दोबारा जमाया गया और इसकी रिपोर्ट उपायुक्त गुरुग्राम को की गई अब क्षेत्र के लोगों के दोबारा संज्ञान में आया है कि हल्का पटवारी कार्यालय में उपलब्ध ततीमे के रिकॉर्ड में काट झाट (छेड़छाड़) कर दी गई है। भुजाओं के माप बदल दिए गए हैं जिसकी शिकायत क्षेत्र के निवासियों ने जांच कमेटी के मनमाने रवैये और पद का दुरुपयोग करके सरकारी रिकॉर्ड में गड़बड़ियां करने के लिए प्रधानमंत्री को शिकायत भेजी है।सरकार को भेजी शिकायत में यह भी कहा गया है कि 03-01-2025 के ततीमा में क्षेत्रफल 12185.6 वर्ग गज दर्शाया गया है, जबकि उपायुक्त पंचकूला के 18-12-1975 के आदेशानुसार कुल रकबा 12130.44 वर्ग गज था। आरोप है कि बाद में रिकॉर्ड में छेड़छाड़ कर लगभग 100 वर्ग गज का अंतर दर्शाया गया और क्षेत्र की सीमाएं बदल दी गईं।वहीं 2002 तक जमाबंदी में खसरा नंबर 469/2 का कोई अस्तित्व नहीं था, फिर भी बाद में इसका निर्माण दर्शाया गया। उपायुक्त कार्यालय के वर्ष 1975 एवं 1987 के आदेशों में भूमि को PWD विभाग की दर्शाया गया था, नगर निगम की नहीं। वर्ष 2002 की कथित कार्रवाई का भी कोई मूल सरकारी आदेश रिकॉर्ड में उपलब्ध नहीं है।
शिकायत में यह भी बताया गया है कि हल्का पटवारी ने वर्ष 2017 की अपनी रिपोर्ट में सीमांकन राजस्व प्लान को उपायुक्त के आदेश के आधार पर दर्ज किया, जबकि संबंधित दस्तावेज संलग्न नहीं किए गए। जांच समिति द्वारा सभी तथ्यों की गहन जांच पड़ताल न करके केवल औपचारिकता पूरी कर ली गई है।शिकायतक में मांग की गई है कि पूरे मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष पुनः जांच कराई जाए, संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए,अवैध ततीमा और गलत नाम दर्ज प्रविष्टियों को निरस्त किया जाए तथा दोषी अधिकारियों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए। अब देखना यह होगा कि उच्च अधिकारी इस मामले पर कुछ संज्ञान लेते हैं या यही मिली भगत भ्रष्टाचार का मामला ऐसे ही आगे भी चलता रहेगा।
*कांग्रेस नेता राजेश यादव भी उठा चुका हैं मुद्दा*
गुरुग्राम के कमान सराय स्थित पार्किंग मामले को बादशाहपुर के कांग्रेस नेता राजेश यादव भी उक्त खसरा नंबर में वाहन पार्किंग मामले को लेकर सोशल मीडिया पर आवाज उठा चुके हैं। जिस पर पहले वाहन पार्किंग बनाई जानी प्रस्तावित थी, जिसमें खुदाई का ठेका भी एक पूर्व मंत्री के चहेतों को दिया गया था। लेकिन अब उसमें टाईल लगवाई जा रही है।उनका कहना था कि इसमें भी काफी गोलमोल होने का अंदेशा साफ नजर आ रहा है। यह सब भाजपा सरकार की कथनी-करनी का अंतर है।

