
गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज: गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला वृंदावन के संचालक एवं विश्व प्रसिद्ध कथावाचक पुराण मनीषी परम पूज्य श्री कौशिक जी महाराज ने माता-पिता की सेवा में दो ही नाम सर्वोपरि हैं-राम और श्रवण कुमार। राम ईश्वर हैं और श्रवण कुमार साधारण इंसान हैं। श्रवण कुमार का नाम माता-पिता की सेवा के उदाहरण के रूप में सबसे पहले लिया जाता है। दुख की बात है कि श्रवण कुमार के इस देश में वृद्धाश्रमों की संख्या बढ़ रही है। घर में वृद्धों को सम्मान नहीं मिल रहा। यह हमारी संस्कृति नहीं है। इसलिए माता-पिता की सेवा से पीछे ना हटें। माता-पिता, गुरु की जो सेवा करेगा, उसे दुनिया सम्मान देगी।यह बात उन्होंने रविवार को ओल्ड ज्यूडिशियल कॉम्पलेक्स में 11 दिवसीय श्रीशिव महापुराण कथा के अंतिम दिन प्रवचनों में कही। प्रवक्ता अनिल शास्त्री ने 11 दिवसीय कथा के अंतिम दिन पूज्य गुरुजी ने इन 11 दिनों में गुरु द्रोण की नगरी को शिव की नगरी बना दिया। गुरुग्राम की धरती से देश-दुनिया को शिव की महिमा सुनाकर ज्ञानवर्धन किया। महाराज जी ने कहा कि वे जहां भी दीक्षा देते हैं, वहां बार-बार आते हैं। उन्होंने गुरुग्राम में दीक्षा दी है तो यहां बार-बार आएंगे ही। श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि माता-पिता के चरण छूने भर से शिवलिंग पर एक लोटा जल चढ़ाने का फल मिलता है। उन्होंने कहा कि हर माता-पिता अपने बच्चों को बचपन से ही धर्म से भी जोड़ें। उन्हें धार्मिक बनाएं। कोई राम ऐसे ही नहीं बन जाता। कोई कृष्ण ऐसे ही नहीं बन जाता। माता-पिता के संस्कारों से ही यह संभव हो पाता है।पूज्य गुरुजी ने कहा कि अच्छे लोगों का सानिध्य करें। संतों के साथ बैठें। अच्छी किताबें पढ़ें। सत्संग करें। सत्संग करेंगे तो गृहस्थ के काम अच्छे होंगें। सत्संग ही ईश्वर का संग दिला सकता है। साथ ही उन्होंने विदुर नीति पढऩे के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विदुर नीति पढऩे से व्यक्ति किसी के साथ एक रुपये की बेइमारी नहीं करेंगे। रिश्तों पर प्रवचनों में श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि पति वही जो पत्नी को पूछता रहे कोई कष्ट तो नहीं। पुत्र वही जो माता-पिता को पूछता रहे कोई कष्ट तो नहीं। उन्होंने कहा कि माता-पिता की परिक्रमा करने से धरती की सात परिक्रमा का फल मिलता है। महिलाओं का घर में सम्मान करने के लिए आह्वान करते हुए गुरुजी ने कहा कि आपका खानदान ऋणी है, इसलिए इनका नाम गृहिणी है। हर अच्छे काम में इनकी भूमिका, भीड़ रहती है। मंदिर में इनकी भीड़, कथा में इनकी भीड़, चार धाम में इनकी भीड़। पूरे परिवार को ये ही संभालती हैं। इसलिए कभी इनका दिल नहीं दुखाना। इनकी आंखों में आंसु नहीं आने देनना। इसके घर में आने से तरक्की के रास्ते खुलते हैं। देवी स्वरूपी माता-बहनों को सदा सम्मान दिया करें। गुरुजी ने कहा कि जिस घर में भाई अपने भाई का आदर करता है, वह घर अयोध्या बन जाता है। जिस घर में भाई अपने भाई का सम्मान नहीं करता, वहां महाभारत होने से कोई रोक नहीं सकता। परिवार तभी चलते हैं जब कोई कुछ कहे, उसे सुनकर भूल जाना। जैसे पानी के ऊपर बनाई गई लकीर साथ-साथ मिटती जाती है, ऐसे ही हमें अपने घर में अपना व्यवहार रखना चाहिए। भगवान मल्लिकार्जुन की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि तमिल भाषा में शंकर जी का नाम अर्जुन है और मइया का नाम मल्लिका है। इसलिए वे मल्लिकार्जुन कहलाते हैं। जल्द ही मल्लिकार्जुन की कथा भी करेंगें। गर्भ में अनजाने में जीव हत्या हो जाती है तो अपराध तो लगता है, मगर भगवान मल्लिकार्जुन इस दोष से मुक्त कर देते हैं। शादी होते ही पति-पत्नी इनका दर्शन जरूर करें। इनके दर्शन करने से वंश निर्र्वंश नहीं होता। पूज्य गुरुजी ने कहा कि दूसरे की बेटी कष्ट ना पाए, अपने बच्चों को विवाह से पहले खुद ही परखिये। श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि जो साधना, आराधना करेगा, उसके जीवन में अनिष्ट होगा ही नहीं। उन्होंने कहा कि अपने बल को धर्म के पर्दे में रखिये। नहीं तो यह बल खतरनाक हो जाएगा। अन्याय करेगा। इसका दुरुपयोग होगा। हमें जो चीज मिली है उसका सदुपयोग होना चाहिए। चाहे धन हो, बल हो या ज्ञान हो।
