गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज : गुरुग्राम के थाना पालम विहार सैक्टर 22 में पुलिस बर्बरता का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसमें एक युवक ने पुलिस कर्मियों पर अवैध रूप से हिरासत में लेकर बेरहमी से मारपीट करने, झूठा मुकदमा दर्ज करने और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। पीड़ित ने इस संबंध में पुलिस कमिश्नर, गुरुग्राम को लिखित शिकायत देकर निष्पक्ष जांच और दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पीड़ित शिकायतकर्ता हितेश निवासी गांव मोलाहेड़ा, जिला गुरुग्राम ने सीपी को दी अपनी शिकायत में बताया है कि 1 जनवरी 2026 की मध्य रात्रि लगभग 12:30 बजे वह अपनी बहन की बिमारी के चलते मणिपाल अस्पताल नजदीक रेजांगला चौक, पालम विहार में भर्ती कराने के बाद भोजन के लिए पास में स्थित एक पराठे की दुकान पर गया था। इसी दौरान दुकान संचालक से कहासुनी हो गई, जिसके बाद उसे धमकाया गया और उसने 112 नंबर पर कॉल कर पुलिस सहायता मांगी।पीड़ित का आरोप है कि मौके पर दो पुलिस गाड़ियां पहुंचीं, जिनमें 6 से 7 पुलिसकर्मी सवार थे।
पुलिसकर्मियों ने बिना कोई जांच किए उसे गाड़ी में जबरन डाल लिया, थाने ले जाकर मारपीट की और लात-घूंसों व डंडों से बेरहमी से पीटा। पीड़ित के अनुसार थाना परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों में पूरी घटना रिकॉर्ड हुई है। आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने वर्दी फाड़ने और हथियार छीनने जैसे झूठे आरोप लगाकर उसके खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दिया।शिकायत में यह भी कहा गया है कि जब पीड़ित के चाचा और भाई थाने पहुंचे तो उसकी हालत देखकर उन्होंने 112 पर कॉल कर मेडिकल कराने की मांग की, लेकिन पुलिस ने कथित तौर पर मेडिकल में देरी कर जानबूझकर चोटों को हल्का दिखाने का प्रयास किया। पीड़ित की पत्नी ने भी उसकी हालत देखकर मोबाइल से चोटों की तस्वीरें खींचीं, जिसके बाद उसे डॉक्टर के पास ले जाया गया।
पीड़ित ने आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी लगातार उसे धमका रहे हैं और कह रहे हैं कि “अब तेरा काम तमाम कर देंगे।” उसने सीपी को लिखित में यह भी बताया कि उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है, इसके बावजूद उसे झूठे मामले में फंसाया गया। पीड़ित का कहना है कि उसे और उसके परिवार को पुलिस कर्मियों से जान-माल का खतरा बना हुआ है।पीड़ित ने पुलिस कमिश्नर से मांग की है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए, सीसीटीवी फुटेज की जांच हो, दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए और उसकी तथा उसके परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में किसी निर्दोष व्यक्ति के साथ इस तरह की घटना दोबारा न हो सकें।
बता दें कि पीड़ित ने 1 जनवरी की मध्य रात्रि को भी एक लिखित शिकायत थाना पालम विहार में दी थी, लेकिन पुलिस ने दोषियों से मिलकर पीड़ित पर ही फर्जी मुकदमा दर्ज कर दिया। जबकि पीड़ित ने अपनी दरखास्त में पुलिस कर्मियों पर शराब के नशे में होने का भी आरोप लगाया है। थाना पालम में इससे पहले भी कई बार पुलिस कर्मियों पर थाने के अंदर ही मारपीट बदतमीज धमकी व अपमानित करने के शिकायतकर्ता आरोप लगा चुके हैं। वहीं रेहड़ी-पटरी सरकारी जमीनों पर अवैध सब्जी मंडी लगाने वालों से मिलीभगत साजबाज होकर भष्टाचार की शिकायत प्रदेश के सीएम तक भी पहुंची हुई है।
जब थाने पर लगें गंभीर आरोप के बारे में थाना प्रभारी देवेन्द्र कुमार से उनके सरकारी मोबाइल पर सम्पर्क किया गया तो उन्होंने फोन ही नहीं उठाया। जिससे उनका पक्ष नहीं लिखा जा सका। इससे यही अन्दाज लगाया जा सकता है कि वह भी मिडिया से इस मामले कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं। वहीं पुलिस पीआरओ संदीप कुमार भी फोन उठाया मुनासिब नहीं समझा रहे हैं। जबकि आए दिन पुलिस की जमकर तारीफों के पुल बांध कर सुर्खियां बटोरने की कोशिश कर रहे हैं।


