गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज : गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) के डीटीपी आर.एस. बाठ अपनी अनोखी कार्यशैली के कारण सोशल मीडिया पर हमेशा चर्चा में रहते हैं। हालाँकि अधिकारियों का कर्तव्य है कि वे अपने दायित्वों का निष्पक्ष पालन करें, लेकिन हाल के मामलों में ऐसा नजर नहीं आ रहा।
*ग्रीनबेल्ट अतिक्रमण पर आंख मूंदना*
*सेक्टर-5 में स्थित जीएवी स्कूल द्वारा ग्रीनबेल्ट पर किया गया अतिक्रमण कई बार हटाने बारे निवेदन के बावजूद बरकरार है। सामाजिक कार्यकर्ता माईकल सैनी और स्थानीय लोगों ने कई बार मौखिक और डिजिटल माध्यमों से कार्रवाई की मांग की, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
*रेहड़ी-पटरी वालों पर हंटर, शोरूम वालों के आगे नतमस्तक*
स्थानीय लोग शिकायत करते हैं कि गरीबों की रेहड़ी या छोटे व्यवसाय के अवैध निर्माण तुरंत तोड़े जाते हैं, लेकिन बड़े उद्योगपति या नेता समर्थित अवैध निर्माण पर कोई कार्रवाई नहीं होती। उदाहरण के लिए, शीतला माता रोड पर कई अतिक्रमण हटाने के अभियान चलाए गए, लेकिन जीएवी स्कूल का कब्जा नजरअंदाज किया गया। वहीं पालम विहार की कृष्णा चौक पर बने परिसर,सेक्टर 21 का पार्षद कार्यालय जो सभी ग्रीन बेल्ट पर बने हुए वहां जाकर भी आंखें बंद कर लेते हैं।
*सूरी ऑटो प्राइवेट लिमिटेड मामला*
शहर के बसई क्षेत्र में चल रही सूरी ऑटो प्राइवेट लिमिटेड कंपनी, जहां हाल ही में गैस रिसाव जैसी खतरनाक घटनाएं हुईं, अभी भी सुरक्षित नहीं ठहराई गई। इस कंपनी के आसपास सैकड़ों बच्चे पढ़ाई करते हैं, लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। लोगों का कहना है कि यह कंपनी विधायक के समर्थक से जुड़ी होने के कारण डीटीपी बाठ कार्रवाई करने में संकोच कर रहे हैं।
*लोकप्रियता बनाम कर्तव्य*
अब सवाल यह उठता है कि क्या डीटीपी आर.एस. बाठ के पास प्रधानमंत्री से विशेष आशीर्वाद है, या फिर उनकी कार्यशैली सिर्फ स्थानीय नेतृत्व और राजनीति के लिए “सिंघम” की तरह चुनी हुई कार्रवाई दिखाने तक सीमित है।

