गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज : नगर निगम गुरुग्राम में जहां निगम कमिश्नर ने बीते बुधवार को ही चार HKRN कर्मचारियों को का कार्य में लापरवाही व अनियमितता बरतने पर सर्विस से हटाकर काफी सुर्खियां बटोरी थी, लेकिन अभी एक टेंडर घोटाले का मामला उजागर हुआ है, जिसमें टेंडर आवंटन प्रक्रिया को लेकर एक कर्मचारी व एक्शन की मिली भगत पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। जिसका मामला समाचारपत्रों में भी उछला था। जिसपर संज्ञान लेते हुए निगम कमिश्नर ने मामले की जांच चीफ इंजीनियर को सौंपी है। जिसमें चीफ इंजीनियर ने उक्त मामले को उजागर करने वाले व्यक्ति को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
जिसपर मुख्य अभियंता को उक्त व्यक्ति ने विस्तृत जवाब एवं सभी दस्तावेज साक्ष्यों के साथ नोटिस का जवाब अपने अधिवक्ता के माध्यम से भेज दिया है। जिसमें आरोप लगाया है कि कुछ ठेकेदारों और निगम के एक अधिकारी की मिलीभगत से कथित रूप से फर्जी एवं भ्रामक दस्तावेजों के आधार पर टेंडर हासिल किए गए।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार निगम में एक ठेकेदार जेआरएस कोऑपरेटिव लेबर एंड कंस्ट्रक्शन सोसायटी लिमिटेड का संबंध एमसीजी के एक हेड ड्राफ्ट्समैन के परिवार से है।
आरोप है कि सरकारी पद पर रहते हुए संबंधित अधिकारी द्वारा सोसायटी के कार्यों को प्रभावित किया गया, जिससे हितों के टकराव और सेवा नियमों के उल्लंघन की आशंका उत्पन्न होती है।उक्त ठेकेदार के खिलाफ दावा किया जा रहा है कि उसके द्वारा टेंडर के दौरान प्रस्तुत टर्नओवर प्रमाणपत्र और यूडीआईएन (UDIN) के माध्यम से सत्यापित दस्तावेजों में वित्तीय आंकड़ों को लेकर गंभीर अंतर पाया गया है। इसके अलावा प्रस्तुत ईएसआई (ESI) और ईपीएफ (EPF) पंजीकरण दस्तावेजों की वैधता पर भी सवाल उठाए गए हैं। इन सभी अभिलेखों का संबंधित विभागों से स्वतंत्र सत्यापन कराया जाए।
ठेकेदार ने निगम के एक कार्यकारिणी अभियन्ता से मिली भगत करके प्रस्तुत कार्य आदेश, अनुभव प्रमाणपत्र और कार्य पूर्णता प्रमाणपत्र उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड से मेल नहीं खाते। जिन कार्यों के आधार पर तकनीकी पात्रता दिखाई गई, उनमें से कई कार्य संबंधित सोसायटी को आवंटित ही नहीं किए गए थे। इसलिए सभी दस्तावेजों की मूल जारीकर्ता संस्थाओं से जांच की जाएं। वहीं ठेकेदार के इएसआई तथा पीएफ एकाउंट में भी काफी गोलमोल है। उसके टेंडरों की तकनीकी जांच एवं दस्तावेजों के सत्यापन की जिम्मेदारी जिन अधिकारियों पर थी, उन्होंने कथित रूप से इन दस्तावेजों को स्वीकार किया। जिनमें काफी कमियां थीं। इसलिए टेंडर प्रक्रिया में शामिल सभी अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक होने चाहिए।लोगों में चर्चाएं है यदि जांच में कोई दस्तावेज फर्जी, परिवर्तित या भ्रामक पाया जाता है, तो संबंधित ठेकेदारों, सोसायटी के पदाधिकारियों और दोषी अधिकारियों के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता (BNS) तथा अन्य लागू कानूनों के तहत आपराधिक कार्रवाई की जाए। साथ ही पूरी टेंडर प्रक्रिया की स्वतंत्र, निष्पक्ष और समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए।फिलहाल इस मामले में नगर निगम गुरुग्राम की ओर से कोई किसी भी तरह की आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन शहर में चर्चा है कि अगर निगम कमिश्नर प्रदीप दहिया सही में कानून की पालना करते हैं और निष्पक्ष जांच करवाते हैं तो उक्त ठेकेदार पर भी आवश्यक कार्रवाई कर दोषी निगम अधिकारी पर सख्त कार्रवाई करें।
बता दें कि उक्त मामले में ठेकेदार जयभगवान निगम में कार्यरत सोमबीर नामक ड्राफ्टमैन के पिता बताया जा रहा हैं, जबकि नियमानुसार निगम का ठेकेदार वहीं बन सकता है,जिसका कोई भी सगा संबंधी व रिश्तेदार निगम में कार्यरत नहीं हो। लेकिन उक्त मामले में एक उच्च भ्रष्ट अधिकारी की मिली भगत से सभी नियम और कानून को ताक पर रखकर खुब गोलमाल किया जा रहा है। वहीं कार्यकारी अभियंता पर पहले भी गंभीर आरोप लग चुके हैं,ब वे हॉर्टिकल्चर शाखा में तैनात थे, वहीं सूत्रों से यह भी जानकारी मिली है कि उन्होंने अपने भाई के नाम से भी एक फर्म बना कर निगम से ठेका ले रखा है।

