गुरुग्राम, सतीश कौशिक : निगम क्षेत्र वार्ड तीन के गांव मोलाहेडा निवासी एक जागरूक ग्रामीण ने पुलिस आयुक्त को शिकायत देकर अपने चाचा वेदप्रकाश, क्षेत्र के पूर्व निगम पार्षद रविंद्र तथा कुछ राजस्व और नगर निगम अधिकारियों पर मिलीभगत कर जमीन के रिकॉर्ड में छेड़छाड़ हेराफेरी करने का गंभीर आरोप लगाया है। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गांव के प्लॉट खसरा नंबर 57 की जमीन को फर्जी दस्तावेजों और राजस्व रिकॉर्ड में हेराफेरी के जरिए अपने नाम करवाकर चालाकी से झूठा एफिडेविट अदालत में देकर नगर निगम के खिलाफ केस दायर किया है।
मिली जानकारी के अनुसार शिकायतकर्ता बीर सिंह ने शिकायत की फोटो कॉपी दिखाते हुए बताया कि उनके दादा स्वर्गीय रतन लाल यादव ने 14 जून 1999 को एक पंजीकृत वसीयतनामा गवाहों के सामने तैयार किया था, जिसकी एंट्री संयुक्त सब-रजिस्ट्रार कार्यालय गुरुग्राम में रजिस्टर्ड कराई थी। शिकायत के अनुसार इस वसीयत में गांव के प्लॉट नंबर 57 का आधा हिस्सा हीरानंद, हेमकरण और वीर सिंह पुत्र महीपाल के नाम तथा आधा हिस्सा भजनलाल पुत्र वेदप्रकाश के नाम किया गया था। जिसमें भजनलाल की करीब चार वर्ष पहले एक हादसे में मृत्यु हो चुकी है और उसके वारिस नाबालिग बताए गए हैं। बीर सिंह का आरोप है कि उन्हें गांववासियों और चौकीदार गजराज से जानकारी मिली किसी उक्त प्लॉट नगर निगम के नाम राजस्व जमाबंदी में दर्ज है और नगर निगम द्वारा जमीन खाली करने के नोटिस भी जारी किए थे। जिसमें इस मामले को लेकर उसके चाचा वेदप्रकाश ने नगर निगम गुरुग्राम के खिलाफ एक सिविल केस भी दायर किया गया है, जोकि जेएमआईसी निधी बेनीवाल की अदालत में चल रहा है,जिसकी अगली सुनवाई तारीख 13 जुलाई 2026 बताई गई है।
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वेदप्रकाश ने पूर्व पार्षद रविंद्र और कुछ राजस्व व निगम अधिकारियों की मिलीभगत से फर्जी दस्तावेज तैयार कर जमीन अपने नाम करा ली लगती है,तथा उन्हीं फर्जी दस्तावेजों के आधार पर अदालत में कथित रूप से झूठा एफिडेविट देकर केस दायर किया होगा। बीर सिंह ने पुलिस आयुक्त से मांग की है कि राजस्व रिकॉर्ड, पंजीकृत वसीयतनामा, निगम रिकॉर्ड और अदालत में चल रहे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया जाए। वहीं पीड़ित ने शिकायत की एक प्रति उपायुक्त सहित उच्च अधिकारियों को भी भेजीं है।वहीं बताया गया है कि वेदप्रकाश ने एक ग्रामीण सतीश भारद्वाज के खिलाफ भी एक फर्जी केस अदालत में डाला हुआ है, जिसमें कथित रूप से प्लॉट नंबर 57 को अपना बताकर भ्रामक बयान भी दिए हुए हैं।
वहीं उक्त प्लाट की शिकायत निगम में करने के आरोप सतीश पर लगाएं है, जबकि अपनी गवाही में ना तो निगम से कोई गवाही कराई है,और ना ही शिकायत की कापी अदालत में पेश की है। वहीं लोगों ने बताया कि वेदप्रकाश एक क्रिमिनल किस्म का व्यक्ति हैं, जिसके खिलाफ तो एक बहुत ही गंभीर क्रिमिनल मामला दिल्ली कोर्ट में चला था, वहीं गुड़गांव के उद्योग विहार, पालम विहार, बजघेड़ा में भी सरकारी जमीन पर अवैध सब्जी मंडी लगवाकर अवैध वसूली के मामले दर्ज हुए हैं। जिसमें अदालत को गुमराह करके गवाहों को प्रभावित कर छुट गया था। अगर दुबारा से उसकी फाईलें खोलीं जाए तो सच्चाई सबके सामने आ सकती है।
जब इस बारे में आरोपी पक्ष से सम्पर्क नहीं हो सका अगर उनको अपनी सफाई में कुछ कहना है तो उनका स्वागत है।

