नई दिल्ली, सतीश भारद्वाज : सूप्रीम कोर्ट ने बुधवार को वकील **विक्रम सिंह** की तत्काल रिहाई का आदेश दिया है। उन्हें हरियाणा पुलिस की **स्पेशल टास्क फोर्स (STF)** द्वारा एक हत्या मामले में गिरफ्तार किया गया था। अदालत ने कहा कि गिरफ्तारी के लिए पर्याप्त आधार नहीं थे और गिरफ्तारी प्रक्रिया में कानूनी नियमों का पालन नहीं किया गया वह भी एक कानून के जानकार के साथ। हरियाणा पुलिस को झटका लगा है।
मुख्य न्यायाधीश **बी.आर. गवई**, न्यायमूर्ति **के. विनोद चंद्रन** और न्यायमूर्ति **एन.वी. अंजारिया** की पीठ ने आदेश पारित करते हुए कहा कि विक्रम सिंह को ₹10,000 के मुचलके पर तुरंत रिहा किया जाए। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई **19 नवम्बर** को तय की है।सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार (न्यायिक) को आदेश दिया गया है कि वे इस आदेश की सूचना तुरंत **गुरुग्राम पुलिस आयुक्त** को भेजें, ताकि आदेश का तत्काल पालन हो सके। इस याचिका की सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता **विकास सिंह**, जो सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) के अध्यक्ष भी हैं, ने कहा कि अगर एक वकील को केवल अपने पेशेवर कार्य के लिए इस तरह गिरफ्तार किया जा सकता है, तो यह न्याय व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक है।
उन्होंने कहा कि विक्रम सिंह आपराधिक मामलों में मुवक्किलों का प्रतिनिधित्व करते थे, लेकिन पुलिस द्वारा की गई यह कार्रवाई वकीलों के अधिकारों का उल्लंघन है। विकास सिंह ने अदालत को बताया कि STF ने गिरफ्तारी के समय लिखित रूप में गिरफ्तारी के कारण नहीं बताए, जबकि सुप्रीम कोर्ट के एक हालिया फैसले के अनुसार यह आवश्यक है कि हर गिरफ्तार व्यक्ति को **लिखित रूप में** गिरफ्तारी के आधार भी बताए जाएं।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा,> “याचिकाकर्ता एक अधिवक्ता हैं और कानून की प्रक्रिया से भागने की संभावना नहीं है। अतः अंतरिम संरक्षण दिया जाता है और उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।”याचिका में आरोप लगाया गया है कि विक्रम सिंह को **31 अक्तूबर** को बिना किसी लिखित कारण और बिना स्वतंत्र गवाहों की मौजूदगी के गिरफ्तार किया गया, जिससे उनके **संवैधानिक अधिकारों (अनुच्छेद 21 और 22)** का उल्लंघन हुआ।
विक्रम सिंह वर्तमान में **फरीदाबाद जेल** में बंद थे। याचिका के अनुसार, उन्होंने हाल ही में अदालत में अपने एक मुवक्किल **ज्योति प्रकाश उर्फ बाबा** पर STF हिरासत में हुए कथित हमले की शिकायत दायर की थी। इसी के बाद STF ने बदले की भावना से उन्हें फंसाया और गिरफ्तार किया।विक्रम सिंह जुलाई 2019 से **दिल्ली बार काउंसिल** में पंजीकृत अधिवक्ता हैं और 2021 से 2025 के बीच उन्होंने कई आपराधिक मामलों में अपने मुवक्किलों की पैरवी की, जिनमें कुछ ऐसे भी थे जिनका नाम **कपिल सांगवान उर्फ नंदू गिरोह** से जोड़ा जाता है। जिसका विरोध जताते हुए गत6 नवम्बर को दिल्ली की सभी जिला अदालतों के अधिवक्ताओं ने विक्रम सिंह की गिरफ्तारी के विरोध में **काम बंद रखा** और इसे वकीलों के खिलाफ पुलिस की मनमानी करार दिया।
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में STF की कार्रवाई की **न्यायिक जांच** की मांग की गई है, साथ ही विक्रम सिंह के खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक मामलों को **रद्द करने** का अनुरोध किया गया था।

