चंडीगढ़, सतीश भारद्वाज : हरियाणा सरकार ने राज्य के सभी लोक सूचना अधिकारियों (SPIOs) को कड़े निर्देश जारी किए हैं कि वे आरटीआई सेल, मुख्य सचिव कार्यालय से स्थानांतरित होने वाले **सूचना के अधिकार (RTI) आवेदनों को अनिवार्य रूप से स्वीकारें और समय पर उनका सही निपटान सूचना देकर करें किसी भी तरह की लापरवाही बरतने पर सूचना अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
मुख्य सचिव **अनुराग रस्तोगी** ने बुधवार को इस संबंध में पत्र जारी किया। इसमें कहा गया है कि कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जहां कुछ अधिकारी स्पष्ट रूप से उनके अधिकार क्षेत्र में आने के बावजूद इन आवेदनों को स्वीकारने से इनकार कर रहे थे। यह रवैया न केवल **आरटीआई अधिनियम, 2005** की भावना के खिलाफ है, बल्कि शासन की पारदर्शिता और जवाबदेही व्यवस्था को भी कमजोर करता है।
रस्तोगी ने कहा कि **आरटीआई अधिनियम की धारा 6(3)** के अनुसार यदि कोई आवेदन किसी अन्य प्राधिकरण से संबंधित है तो संबंधित लोक सूचना अधिकारी को उसे सीधे उपयुक्त अधिकारी को भेजना चाहिए, न कि वापस आरटीआई सेल को लौटाना।उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में यदि कोई अधिकारी स्थानांतरित आरटीआई आवेदन स्वीकारने से इनकार करता है तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा और मामले की सूचना **राज्य सूचना आयोग** को दी जा सकती है। इस स्थिति में संबंधित अधिकारी व्यक्तिगत रूप से **धारा 20** के तहत दंड अथवा आयोग की प्रतिकूल टिप्पणियों के लिए जिम्मेदार होगा।सरकार की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इस आदेश को **”लेटर और स्पिरिट”** में लागू किया जाना चाहिए, ताकि शासन व्यवस्था में पारदर्शिता और नागरिकों के सूचना के अधिकार को सुनिश्चित किया जा सके।
गौरतलब है कि हरियाणा में मुख्य सचिव कार्यालय में एक अलग **आरटीआई सेल** गठित किया गया है, जिसका मुख्य कार्य सभी आवेदनों की जांच करना और उन्हें संबंधित विभाग अथवा अधिकारी को भेजना है। सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से नागरिकों को बिना किसी प्रशासनिक देरी या अड़चन के सूचना मिल सकेगी।
बता दें कि हरियाणा के अधिकतर जिलों में तैनात अधिकारी अपने विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार को उजागर होने से बचाने के लिए आरटीआई एक्ट क्षेत्र 2005 की जमकर धज्जियां उड़ा रहे हैं,लेकिन प्रदेश को सबसे ज्यादा रेवेन्यू देने वाला जिला गुरुग्राम के अधिकतर विभागों में भ्रष्टाचार का बोलबाला है। यहां के शिक्षा विभाग, नगर निगम, पुलिस, खाद्य आपूर्ति,वन विभाग,जीएमडीए,एचएसवीपी, स्वास्थ,बीएडआर, राजस्व,लेबर तथा एक्साईज एण्ड जीएसटी प्रमुख मालदार विभाग में रोजाना करोड़ों का गोलमाल होता है। जो आरटीआई एक्टिविस्ट को सूचना देने में दर दर की ठोकरें खिला रहा है। यहां तक की उनपर कातिलाना हमले भी करवा चुका है। जिसकी आए दिन शिकायतें प्रदेश सरकार सहित सूचना आयोग भी पहुंचे रही है।

