गुरुग्राम,सतीश भारद्वाज : गुर्जर समाज ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ मजबूत संदेश दिया है। सेक्टर 61 स्थित गुर्जर भवन में आयोजित एक बड़ी पंचायत में दहेज प्रथा, फिजूलखर्ची और विवाह समारोहों में बढ़ते दिखावे पर सख्त रुख अपनाया गया। पंचायत की अध्यक्षता सरपंच चौधरी स्वामी खटाना ने की, जिसमें समाज के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।पंचायत में यह स्पष्ट किया गया कि अब समय आ गया है जब समाज को खुद आगे आकर बुराइयों को खत्म करना होगा। इसी दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने रखते हुए बताया गया कि गुरुग्राम जिले में बिना दहेज के करीब 30 शादियां सफलतापूर्वक संपन्न हो चुकी हैं। इस पहल को समाज में बदलाव की मजबूत नींव बताया गया और संबंधित परिवारों को सम्मानित किया गया। पंचायत में सर्वसम्मति से कई कड़े और प्रभावी फैसले लिए गए, जो आगामी “देव उठनी” विवाह सीजन से लागू होंगे। इनका उद्देश्य साफ है—शादी को सरल, सस्ता और संस्कारपूर्ण बनाना।
पंचायत में लिए गए प्रमुख फैसले:शादी समारोह में डीजे पूरी तरह बंद रहेगा गोद भराई जैसी रस्में सादगी से ज्यादा लोग नहीं जाये हबुरा खाना” और “मडो झांकना” में फिजूल खर्च पर रोक भात में अधिक भीड़ ले जाने की परंपरा खत्म भात भरने के लिए अधिकतम 21 लोगों की सीमा तय रात जागरण या भात में लड़कियों से बर्तन वितरण नहीं कराया जाएगा बारात विदाई में तय शगुन: बड़े समधी को 151 रुपये, समधी को 101 रुपये बारात में अधिकतम 5 गाड़ियों की ही अनुमति सभी सामाजिक कार्यक्रमों में शराब पूरी तरह प्रतिबंधित आतिशबाजी पर रोक, केवल 50 गोले की सीमा समाज से अपील पंचायत में मौजूद सभी प्रमुख लोगों ने इन फैसलों का समर्थन करते हुए समाज के हर सदस्य से इनका पालन करने की अपील की। यह पहल न सिर्फ आर्थिक बोझ कम करेगी, बल्कि समाज में समानता, भाईचारे और सादगी की नई मिसाल कायम करेगी। गुर्जर समाज का यह कदम आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत और प्रेरणादायक संदेश साबित होगा।
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