गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज : गुरुग्राम के थाना पालम विहार क्षेत्र के सैक्टर 22 के एक मकान पर कब्जा करने की नीयत से जबरन घुसने, डराने-धमकाने और मारपीट करने के आरोपों को लेकर दायर एक मामले में पुलिस की कार्यवाही पर सवाल खड़े हुए हैं। शिकायतकर्ता सतबीर सिंह द्वारा दायर केस में आरोप लगाया गया है कि भाजपा के पूर्व पार्षद रविंद्र कुमार व अन्य दबंगों ने मकान में घुसकर विवाद किया और कॉमन स्टील पार्किंग में नियमों के विरुद्ध दफ्तर बनाने से रोकने पर झगड़ा और मारपीट करी, जिसकी शिकायत करने पर थाना पालम विहार पुलिस ने आरोपियों से मिलकर मामले को रफा दफा कर दिया। वहीं पूर्व पार्षद ने पीड़ित पर यह भी झूठा आरोप लगाया कि उसने उसके लड़के की दो तोले की सोने की चेन छीनी। जबकि मौके पर ऐसी कोई घटना नहीं हुई,यह पुलिस ने पीड़ित को आरटीआई से जानकारी मांगने पर दी गई है।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि पुलिस की शय पर आरोपियों ने अवैध रूप से कार्यालय बनाने का प्रयास किया। आरोप है कि घटना के बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, जबकि वह अपने सभी सबुत सीसीटीवी कैमरे की फुटेज, मोबाइल फोन की रिकार्डिंग तथा आरटीआई से मिली जानकारी की प्रतियां शिकायत की कापी लेकर डीसीपी करण गोयल तथा सीपी विकास अरोड़ा तथा एसीपी नवीन शर्मा ने भी मिलकर कई दफा न्याय की गुहार लगा चुके हैं। लेकिन पार्षद की उच्च रासु के कारण अधिकारियों ने उस पर कोई कार्रवाई नहीं की। जिसके चलते न्याय के लिए उन्हें अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा था।
अदालत में चल रहे मामले में कई तारीखें लगने के बाद आखिरकार थाना पालम विहार पुलिस ने अदालत में अपनी एटीआर (एक्शन टेकन रिपोर्ट) दाखिल कर दी है। जिसपर शिकायतकर्ता का आरोप है कि एटीआर में पुलिस ने आरोपियों को बचाने के लिए मनगढ़ंत कहानी प्रस्तुत कर अदालत को गुमराह करने की कोशिश की है। जिसपर पीड़ित के वकील ने अदालत को बताया कि पुलिस आरोपीयों से मिली हुई है। उनको बचाने की कोशिश कर रही है,जबकि उनके खिलाफ पर्याप्त पुख्ता सबूत सभी अदालत की फाईल पर मौजूद है। फिलहाल अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रख लिया है। वहीं मामले की अगली सुनवाई तारीख 24 अप्रैल 2026 लगी है। पीड़ित ने उक्त मामले में पूर्व पार्षद रविंद्र, मनोज यादव, सुनील कुमार, राजबीर सिंह,गौरव कुमार, सरला देवी (पत्नी) मनश (पुत्र) नीरज (बाउंसर) तथा एसएचओ थाना पालम विहार को आऱोपी बनाया हुआ है।

