गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज: गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला वृंदावन के संचालक एवं विश्व प्रसिद्ध कथावाचक पुराण मनीषी परम पूज्य श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि अपने घर में हर व्यक्ति शिवलिंग का पूजन करता है तो उसके घर में हर तरह से शांति रहती है। जिस घर में शिव लिंग, भगवान शंकर की पूजा होती है उस घर में वास्तु दोष टिक नहीं सकता। अपने घर में शिवलिंग रखें और रोज एक लौटा जल चढ़ा दें। गुरुग्राम का एक भी घर ऐसा नहीं होना चाहिए जहां भगवान शंकर की पूजा ना हो। महाराज जी गुरुग्राम के सोहना अड्डा के निकट ओल्ड जेल कॉम्पलेक्स में श्री शिवमहापुराण कथा एवं गोमहोत्सव में प्रवचन दे रहे थे।श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि हरियाणा की माटी ने श्रीमद् भगवत गीता को प्रकट किया। कुरुक्षेत्र जैसे पवित्र तीर्थ को प्रकट किया। यह माटी वीर सपूतों की भी भूमि है। गुरुग्राम इसका ह्दय है। इसकी माटी पर तुलसी नंदीग्राम गौशाला के लिए समर्पित शिवमहारात्रि के पावन समय पर श्रीशिव महापुराण की कथा का आयोजन हो रहा है। श्री कौशिक जी महाराज ने अपने प्रवचनों में आगे कहा कि ब्राह्मण को भोजन और तीन महीने भगवान शंकर को अभिषेक करके देखें। जीवन में बड़ा बदलाव नजर आएगा। वे स्वयं साल के 365 दिन महारुद्राभिषेक करते हैं। जो सोचते हैं वह पूरा हो जाता है। एक लौटा जल सब समस्याओं का हल है। उन्होंने कहा कि शिवलिंग के सानिध्य में हर सत्कर्म दुगुना हो जाता है। कोई देव, दैत्य नहीं जो भगवान शंकर को ना पूजते हों। सबसे ज्यादा भगवान शंकर के ही भक्त मिलेंगें। उनकी आराधना से मन में सोचा गया हर संकल्प पूरा होता है। इसलिए भगवान शिव को जरूर पूजिये।महाराज जी ने कहा कि भगवान शिव स्वयं यह कहते हैं कि मेरे महापुराण ग्रंथ से कोई एक श्लोक भी सुन ले तो उसकी दुर्गति नहीं होने दूंगा। यह इस गंं्रथ की महिमा है। भगवान शिव का विग्रह भी पूजा जाता है। शिवलिंग पूजा की बड़ी महिमा है। भगवान महादेव की आराधना अर्जुन और जयद्रथ ने भी की। जयद्रथ की भक्ति में वह श्रद्धा नहीं थी जो अर्जुन की भक्ति में थी। जयद्रथ भगवान शिव से यह प्रार्थना करने गए कि वह उसे अर्जुन को मारने की वरदान दें। इस पर भगवान शिव ने कहा कि अर्जुन भी मेरा भक्त है, इसलिए वह उसे नहीं मार पाएगा। जयद्रथ ने कहा कि वह स्वयं भी तो उनका भक्त है। शिवजी ने कहा कि तुमने मेरे साकार भाव को पूजा है और अर्जुन ने शिवलिंग का पूजन किया है। महाराज जी ने कहा कि शिव महापुराण में शिव पिंडी का भी वर्णन किया गया है। उन्होंने कहा कि इस बार शिव महारात्रि है। इसलिए इसकी बहुत बड़ी महिमा है। देवताओं में भी वह ताकत नहीं होती जो ताकत शिवलिंग पूजन से मनुष्य को मिलती है। अब की बार की शिवरात्रि इसलिए विशेष है कि महाशिवरात्रि और मासिक शिवरात्रि एक ही दिन आ रही हैं। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति शिवरात्रि को चार पहर तो क्या एक पहर भी पूजा कर ले तो तो भगवान महादेव की वर्षभर तक पूजा करने का फल मिलता है। उन्होंने श्रद्धालुओं को भगवान शिव की पूजा का महत्व बताते हुए कहा कि इस बार शिवरात्रि पर बेर भगवान पर चढ़ाएं। काले तिल भी चढ़ाएं। हो सके तो नर्मदा जल भी चढ़ा दें। गंगा जल चढ़ाने से भगवान शिव की भक्ति मिलती है तो नर्मदा जल चढ़ाने से मुक्ति मिलती है। उम्र लंबी होती है।

