गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज: गुरुग्राम के सैक्टर 21 निवासी एक जागरूक नागरिक ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजकर बादशाहपुर विधानसभा क्षेत्र के सीएम विंडो एमिनेंट सिटीजन राजन चौहान पर कर्तव्य में लापरवाही और कथित रूप से भ्रामक (फर्जी) एक्शन टेकन रिपोर्ट (ATR) पर हस्ताक्षर कर बंद करवाने के आरोप लगाए है। शिकायत के साथ एक कॉल रिकॉर्डिंग भी साक्ष्य के रूप में संलग्न करने भेजी गई है।
मिली जानकारी के अनुसार, राव प्रवीण ने पहले गुरुग्राम में एचएसवीपी (HSVP) की भूमि पर कथित अतिक्रमण को लेकर CMOFF/N/2026/022675 संख्या से सीएम विंडो पर शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि इस शिकायत पर एमिनेंट सिटीजन राजन चौहान ने तथ्यों का सत्यापन किए बिना और शिकायतकर्ता से संपर्क किए बिना ही गलत एवं भ्रामक एटीआर पर हस्ताक्षर कर दिए। राव प्रवीण ने यह भी दावा किया है कि एटीआर देखने के बाद उन्होंने राजन चौहान से मोबाइल पर संपर्क किया, लेकिन शिकायत के तथ्यों पर चर्चा करने के बजाय उन्हें शिकायत करने के लिए स्वतंत्र बताया गया। शिकायतकर्ता का कहना है कि यह आचरण निष्पक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही के मानकों के अनुरूप नहीं है। मुख्यमंत्री को भेजी गई शिकायत में राव प्रवीण ने मांग की है कि मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाए, आरोप सही पाए जाने पर संबंधित एमिनेंट सिटीजन के विरुद्ध उचित कार्रवाई की जाए, उन्हें पद से हटाया जाए तथा संबंधित सीएम विंडो शिकायत की दोबारा निष्पक्ष जांच कराकर एचएसवीपी भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
बता दें कि उक्त मामला गांव डूंडाहेड़ा मंदिर के पीछे एचएसवीपी की जमीन में अवैध रूप से बनी गौशाला का बताया जा रहा है। जिसपर गांव के कुछ दबंगों ने विभाग के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों की मिली भगत से धार्मिक आस्था का ढोंग रचते हुए। असामाजिक तत्वों का अड्डा बना रखा है। जहां पर रोजाना कई दर्जन ग्रामीणों हुका बिडी तथा ताश खेलते रहते हैं। वहीं अवैध रूप से रखीं गई गायों का दुध निकालकर बेच रहे हैं। वहीं उपरोक्त व्यक्ति द्वारा लगाईं गई सीएम विंडो पर राजन चौहान ने दबंगों का फेवर लेते हुए यह लिख दिया की ग्रामीण इसको हटवाने के पक्ष में नहीं है।
गौरतब है कि उक्त गौशाला को जिला नोडल अधिकारी आरएस भाट भी देखकर जा चुके हैं। लेकिन वोटों की राजनीति के चलते निगम पार्षद ने वहां पर कार्रवाई करने से मना कर दिया था। जबकि एक गरीब परिवार अगर सरकारी जमीन पर बसा है तो उसकी अधिकारी एक नहीं सुनते हैं। इस तरह का यह पहला ही मामला नहीं है। ऐसे सैंकड़ों मामले सरकारी दफ्तरों की फाईलों में दबे हुए हैं। उनपर अगर कोई जागरूक नागरिक आवाज उठाता है,तो उनपर फर्जी मुकदमा दर्ज करा दिया जाता है। वहीं उसपर ब्लैकमेलिंग के आरोप दबंग भूमाफियाओं द्वारा लगाए जा रहे हैं।

