गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज: गौतीर्थ तुलसी तपोवन गौशाला वृंदावन के संचालक एवं विश्व प्रसिद्ध कथावाचक पुराण मनीषी परम पूज्य श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि यदि अरहर की दाल भगवान महादेव पर चढ़ाएंगें तो संसार की समृद्धि मिल जाएगी। व्यक्ति का कर्जा खत्म हो जाएगा। शंकर जी को बेलपत्र चढ़ाओगे तो शंकर रीझ जाएंगे और सुखों का सागर देंगें। गेहंू चढ़ाते हैं तो परिवार भटकेगा नहीं। सही रास्ते पर चलेगा। यह प्रमाण शिव महापुराण देता है।वे शुक्रवार को ओल्ड जेल कॉम्पलेक्स में श्री शिवमहापुराण कथा एवं गोमहोत्सव में नौवें दिन प्रवचन कर रहे थे। प्रवक्ता अनिल शास्त्री ने बताया कि श्री कौशिक जी महाराज ने कथा में उन्होंने रुद्राक्ष की महिमा का भी विस्तार से वर्णन करके रुद्राक्ष धारण करने के लिए श्रद्धालुओं को प्रेरित किया।
भगवान की भक्ति के लिए कौशिक जी महाराज ने कहा कि भक्ति एकांत में ही करें। एकांत में ही हम भगवान की अनुभूति कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ध्यान के समान कोई तीर्थ नहीं है। ध्यान के समान कोई यज्ञ, कोई तप नहीं है। इसलिए हर स्त्री, पुरुष को प्रत्येक दिन ध्यान करना चाहिए। ध्यान मन, शरी, आत्मा को संतुलित करने की प्रक्रिया है। इससे मन भटकता नहीं। तनाव से मुक्ति मिलती है। भावनात्मक स्थिति बनती है। ध्यान से स्वास्थ्य में सुधार होता है। ज्ञान का विकास होता है। ध्यान से श्वांसें मजबूत होती हैं। संकल्पों की पूर्ति होती है। ध्यान में ही भगवान के स्वरूप का स्मरण किया जाता है।उन्होंने कहा कि सुबह के समय पूर्व की दिशा की तरफ मुख करके और शाम को पश्चिम दिशा की तरफ मुख करके ध्यान करना चाहिए। श्री कौशिक जी महाराज ने बुजुर्गों को संदेश में कहा कि भक्ति भाव को बढ़ाने के लिए घर के बुजुर्ग बच्चों के साथ घर में दीये जलाएं। दीये की बड़ी महिमा है। दीये जलने से गूंगी-बहरी औलाद जन्म नहीं लेती। दीये की सुगंध फेफड़ों तक पहुंचती है तो बीमारी नहीं आती। दीपक बड़े से बड़े अनिष्ट को दूर कर देता है।
पूज्य गुरुजी ने ओम नम: शिवाय को अपने व्यवहार में बनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि इसे वैसे ही बोला जाए जैसे हम राम-राम बोलते हैं। भगवान का नाम संपूर्ण पापों को जला देता है। उतने पाप मनुष्ट धरती पर कर भी नहीं सकता, जितने पापों को इस नाम सेे जलाने में शक्ति है। साथ ही उन्होंने कहा कि महादेव सभी देव, असुरों के लिए वंदनीय हैं।रुद्राक्ष व तुलसी की माला पहनने के नियमों पर प्रकाश डालते हुए श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि पहनी हुई माला से जप नहीं कर सकते। सिद्ध किया हुआ रुद्राक्ष किसी स्त्री, पुरुष की देह पर जब तक रहेगा, उसकी अकाल मृत्यु नहीं होगी। पूज्य गुरुजी ने कहा कि हम चाहते हैं कि भारत की धरती पर रहने वाले हर व्यक्ति के कंठ में रुद्राक्ष हो। रुद्राक्ष बच्चों के गले में होगा तो शराब, मांस के सेवन से बचे रहेंगें
उन्होंने कहा कि देश में हर घर में हर व्यक्ति को बासी मुंह घी और हल्दी चाटनी चाहिए। चाहे किसी भी धर्म के व्यक्ति हों, इस काम को जरूर करें। इससे व्यक्ति बीमारी रहित होंगें। साथ ही उन्होंने कहा कि भोजन और भजन जमीन पर बैठकर करना चाहिए। इसे स्वास्थ्य ठीक रहता है। श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि रुद्राक्ष का बहुत बड़ा विज्ञान है। किसी भी देवी देवता को आप मानते हों, रुद्राक्ष धारण करने का अधिकार महादेव ने सबको दिया है। यह सोने-चांदी के आभूषणों से भी विशेष है। साथ ही उन्होंने आगाह भी किया कि बिना मंत्रों के अभिमंत्रित कराए रुद्राक्ष धारण ना करें। अपने शौक में रुद्राक्ष धारण ना करें। इससे परेशानी होगी। गुरूजी के हाथों से मिला हुआ अभिमंत्रित रुद्राक्ष सूतक में भी खंडित नहीं होता। उन्होंने कहा कि वर्ष 2026 से लेकर अब 2026 तक वे 50 लाख से अधिक रुद्राक्ष वितरित कर चुके हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि रुद्राक्ष का बहुत बड़ा धंधा हो गया है। लोगों ने इसे व्यापार बना लिया है। महादेव की कृपा से आप सबको तुलसी धाम वृंदावन से रुद्राक्ष मिल रहा है।
श्री कौशिक जी महाराज ने कहा कि अब तक डाक के द्वारा रुद्राक्ष भेजा जाता रहा है। इसे दो दिन बाद 22 फरवरी से बंद कर रहे हैं। यह अनमोल चीज है। कई बार पहुंच नहीं पाता। कई बार एक-एक घर में सौ-सौ पहुंच जाते हैं। तुलसी व रुद्राक्ष माला भी नहीं भेजी जाएगा। इसलिए यह सब कथाओं और वृंदावन धाम से ही दिया करेंगें। कथाओं में दवाई, घी और हल्दी मिला करेगी।

