चण्डीगढ़, सतीश भारद्वाज : सीबीआई ने चण्डीगढ़ में जज के नाम पर उनके फेवर में फैसला कराने की एवज में हाईकोर्ट के वकील को रंगे हाथों ₹5 लाख की रिश्वत लेते हुए अरेस्ट किया है। मिडिया रिपोर्ट्स के अनुसार चंडीगढ़ के सेक्टर-15 के रहने वाले हाईकोर्ट के जाने-माने वकील जतिन सलवान व एक अन्य को सीबीआई ने रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किया है। वकील पर आरोप लगा है कि उन्होंने अपने एक क्लाइंट से कहा कि जज से केस का फैसला उनके हक में कराने के लिए 30 लाख रुपए देने होंगे। इसी मामले में सेक्टर-41 के रहने वाले सतनाम सिंह को भी गिरफ्तार किया गया है। सीबीआई के अनुसार बताया है कि उनके पास इस रिश्वतखोरी की फोन रिकॉर्डिंग मौजूद है। पहले 5 लाख रुपए की किस्त लेते समय सीबीआई ने दोनों को रंगे हाथ पकड़ा है।फिलहाल जज का सीधा रोल सामने नहीं आया है, लेकिन खबर है कि बठिंडा कोर्ट के एक जज को नोटिस भेजा जा सकता है। गिरफ्तारी के बाद दोनों को कोर्ट में पेश किया गया और अब वे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिए गए हैं।
*जानिए कैसे हुआ मामले का खुलासा*
पंजाब के फिरोजपुर बेदी कॉलोनी के रहने वाले हरसिमरनजीत सिंह ने सीबीआई को शिकायत देकर बताया कि उनकी कजन बहन संदीप कौर के तलाक का केस बठिंडा की एक अदालत में चल रहा है। जिसमें वकील जतिन सलवान बार-बार दबाव डाल रहा था कि अगर केस का फैसला अपने पक्ष में चाहिए तो ₹30 लाख रुपए जज को देने होंगे। सलवान ने यह भी कहा कि जैसे ही पैसे दिए जाएंगे, जज का खास आदमी आकर रकम ले जाएगा और फैसला उनके हक में हो जाएगा। जिसमें पैसे के लेनदेन में विवाद हो गया था। जिसपर शिकायतकर्ता ने सीबीआई से संपर्क कर सभी जानकारी दी। शिकायत पर सीबीआई ने कार्रवाई करते हुए वकील को रंगे हाथों पकड़े के लिए जाल बिछाया और 5 लाख रुपए की पहली किस्त लेते समय सलवान और उसके साथी को रंगे हाथ पकड़ लिया। आरोपियों को सीबीआई ने अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया था।
सूत्रों की मानें तो सीबीआई मामले की बारिकियों से छानबीन कर रही है,अगर मामले में नई परतें मिलती हैं, तो आगे और भी कई गिरफ्तारियां हो सकती हैं।*पहले भी विवादों में रहे हैं वकील जतिन सलवान*एडवोकेट जतिन सलवान पर यह पहला की मामला नहीं है, इससे पहले भी वह विवादों में रहे हैं। हाईकोर्ट के वकीलों में चर्चाएं है कि वर्ष 2015 में मलोया थाना क्षेत्र में दर्ज एक NDPS केस में भी उन पर धारा 120-B के तहत आरोप लगे थे। जिसमें आरोप था कि उन्होंने यूटी पुलिस के रिटायर्ड इंस्पेक्टर समेत अन्य लोगों के साथ मिलकर किसी व्यक्ति को गलत तरीके से फंसाने की साजिश रची थी। उस वक्त भी यह मामला सुर्खियों में रहा था और वकीलों ने उनके समर्थन में वर्क सस्पेंड तक भी किया था। जबकि वह मामला हाईकोर्ट तक भी पहुंचा था, जिसमें फिलहाल अभी स्टे लगा हुआ है।

