गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज : गुरुग्राम शहर का प्राचीन कमला नेहरू पार्क की हरियाली व हरे-भरे पेड़ों को बचाने के लिए स्थानीय निवासियों और पर्यावरण प्रेमियों ने सोमवार को पार्क में प्रस्तावित मल्टी-स्टोरी सामुदायिक केंद्र के निर्माण को रद्द कराने की मांग को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल ने हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नाम उपायुक्त के माध्यम से ज्ञापन सौंपा।स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पार्क गुरुग्राम का सबसे पुराना और ऐतिहासिक हरित क्षेत्र है, जो करीब वर्ष 1960 से पहले अस्तित्व में आया था । जिसमें इस समय हजारों पेड़-पौधों और हरियाली से भरपूर यह पार्क आसपास की कई कॉलोनियों—जैकबपुरा, सुभाष नगर, जवाहर नगर, सिविल लाइन, पटेल नगर समेत दर्जनों इलाकों—के लोगों के लिए स्वास्थ्य और मनोरंजन का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। यहां रोजाना सुबह-शाम सैकड़ों बुजुर्ग, महिलाएं, युवा और बच्चे सैर, योग और व्यायाम के लिए आते हैं, जिससे उन्हें कई बीमारियों से राहत मिलती है।



नागरिकों ने आरोप लगाया कि नगर निगम गुरुग्राम द्वारा पार्क में तीन मंजिला बेसमेंट पार्किंग सहित डबल स्टोरी सामुदायिक केंद्र बनाने की योजना बनाई गई है। इस प्रस्ताव के सामने आते ही स्थानीय लोगों में आक्रोश फैल गया। उनका कहना है कि पहले ही पार्क के कई हिस्सों में निर्माण कार्यों और अन्य उपयोगों के कारण हरियाली कम हो चुकी है, और अब इस नए प्रोजेक्ट से हजारों पेड़ पौधे के कटने का खतरा बना हुआ है।लोगों का यह भी कहना है कि पार्क के अंदर वाहनों के लिए पर्याप्त रास्ते नहीं हैं, और सामुदायिक केंद्र बनने पर सड़कें बनाने के लिए हरित क्षेत्र को नुकसान पहुंचेगा। उन्होंने स्पष्ट रूप से मांग की कि पार्क के साथ किसी भी प्रकार की छेड़छाड़ न की जाए और इसे यथावत रखा जाए।
सूत्रों के अनुसार बताया गया है कि यह प्रस्ताव वार्ड 27 के पार्षद आशीष गुप्ता द्वारा विधायक मुकेश शर्मा के समक्ष रखा गया था, जिसके बाद इसे मुख्यमंत्री के पास भेजा गया और स्वीकृति मिल गई। हालांकि स्थानीय लोगों का आरोप है कि बिना उचित सर्वे के इस योजना को मंजूरी दी गई।इस मुद्दे पर शहर के करीब हजारों लोगों के हस्ताक्षर के साथ शिकायत पत्र उपायुक्त को सौंपा गया है। वहीं एक एक प्रति नगर निगम की मेयर, कमिश्नर कार्यालय, केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह, राष्ट्रीय हरित अधिकरण और वन विभाग को भी भेजी गई है।पर्यावरण प्रेमियों ने चेतावनी दी है कि यदि इस प्रस्ताव को रद्द नहीं किया गया तो वे आगे भी विरोध जारी रखेंगे और जनप्रतिनिधियों से मिलकर इस फैसले को वापस लेने की मांग करेंगे। इस मौके पर कई सामाजिक कार्यकर्ता और स्थानीय नागरिक मौजूद रहे।
