गुरुग्राम, सतीश कौशिक : इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) गुरुग्राम द्वारा विश्व पार्किंसन माह के उपलक्ष्य में 26 अप्रैल 2026 को सेक्टर 29 स्थित लेजर वैली पार्क, गुरुग्राम में एक जन-जागरूकता अभियान का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य आम जनता में पार्किंसन रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समय पर पहचान एवं उपचार के महत्व को रेखांकित करना था।
इस जागरूकता अभियान का नेतृत्व आईएमए गुरुग्राम के अध्यक्ष डॉ. राजेश कटारिया एवं सचिव डॉ. विनीता यादव ने किया। कार्यक्रम में आईएमए के अनेक गणमान्य डॉक्टर्स उपस्थित रहे, जिनमें प्रमुख रूप से डॉ. सुरेश वशिष्ठ, डॉ. महावीर जैन (पूर्व अध्यक्ष, आईएमए हरियाणा), डॉ. अजय अरोड़ा (पूर्व अध्यक्ष, आईएमए गुरुग्राम), डॉ. उमेश गुप्ता (पूर्व सचिव), डॉ. आई. पी. नांगिया, डॉ. रितु जैन, डॉ. अनीता शर्मा, डॉ. हनीश बजाज, डॉ. ज्योति यादव, डॉ. आर. एन. यादव, डॉ. दिनेश हंस, डॉ. सविता चौधरी, डॉ. अभिषेक गोयल, डॉ. रुचि गुप्ता, डॉ. वंदना नारूला, डॉ. संजय नारूला, डॉ. बीर सिंह, डॉ. सुभाष यादव, डॉ. सुमन बिश्नोई, डॉ. सारिका वर्मा एवं डॉ. रामनीत कौर रहे। आई एम ए के लगभग 70 डॉक्टर्स ने इस नेक पहल में भाग लेते हुए अपनी एकजुटता दिखाई।
कार्यक्रम में एक ऊर्जावान ज़ुम्बा सत्र का आयोजन किया गया, जिसके पश्चात पार्किंसन रोग पर एक इंटरैक्टिव सत्र आयोजित किया गया, जिसका संचालन डॉ. रीमा गोयल द्वारा किया गया। इस अवसर पर आईएमए गुरुग्राम के अध्यक्ष डॉ. राजेश कटारिया ने समुदाय में पार्किंसन रोग के प्रारंभिक लक्षणों एवं संकेतों की पहचान के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि समय पर सही निदान से उपलब्ध सर्वोत्तम उपचार का लाभ उठाया जा सकता है। सचिव डॉ. विनीता यादव ने पार्किंसन रोग से ग्रस्त व्यक्तियों के लिए नियमित शारीरिक गतिविधि और व्यायाम के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यह रोग के प्रबंधन में अत्यंत सहायक है।कार्यक्रम के दौरान वरिष्ठ न्यूरोलॉजिस्ट एवं निदेशक, d’ Mettle Clinique, गुरुग्राम, डॉ. मनीष महाजन ने अपने इंटरैक्टिव सत्र में पार्किंसन रोग के प्रमुख मोटर एवं नॉन-मोटर लक्षणों, इसके चिकित्सा एवं शल्य चिकित्सा उपचार, तथा जीवनशैली में बदलाव एवं व्यायाम की भूमिका पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने विशेष रूप से यह भी बताया कि हर प्रकार का कंपन (ट्रेमर) पार्किंसन रोग नहीं होता, जिससे सही जानकारी का प्रसार अत्यंत आवश्यक है।
डॉ. महाजन ने हालिया शोधों का हवाला देते हुए एक अत्यंत महत्वपूर्ण तथ्य की ओर ध्यान आकर्षित किया कि कीटनाशकों (pesticides) के संपर्क में आने से, विशेषकर भूमिगत जल (underground water) के दूषित होने के माध्यम से, पार्किंसन रोग की घटनाओं में उल्लेखनीय वृद्धि देखी जा रही है। यह जानकारी कृषि प्रधान क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए विशेष रूप से प्रासंगिक है, जहाँ रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों का उपयोग अधिक होता है। इसके साथ ही, डॉ. महाजन ने यह भी रेखांकित किया कि युवा आयु में पार्किंसन रोग के मामलों में आनुवंशिक कारणों (genetic causes) की संभावना, यादृच्छिक या स्वतःस्फूर्त कारणों (sporadic causes) की तुलना में कहीं अधिक होती है। अतः कम उम्र में इस रोग से पीड़ित रोगियों में जेनेटिक परीक्षण अवश्य करवाना चाहिए, ताकि परिवार के अन्य सदस्यों को भी समय पर सचेत किया जा सके।कार्यक्रम का समापन इस संदेश के साथ हुआ कि सामूहिक प्रयासों से ही पार्किंसन रोग के प्रति जागरूकता बढ़ाई जा सकती है और रोगियों को बेहतर जीवन जीने में सहायता प्रदान की जा सकती है।

