गुरुग्राम, सतीश भारद्वाज : गुरुग्राम में शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आरटीआई एक्ट, 2005 के तहत मांगी गई जानकारी समय पर और पूर्ण रूप से उपलब्ध न कराए जाने का मामला सामने आया है। जिसमें विभाग की जन सूचना अधिकारी ने आवेदक को आदि अधूरी ब्राह्मण सूचना देकर अपना पल्ला झाड़ लिया।प्राप्त जानकारी के अनुसार गुरुग्राम के आरटीआई एक्टिविस्ट सुखबीर सिंह ने 8 अक्टूबर 2025 को मारुति कुंज स्थित सीडी इंटरनेशनल स्कूल से संबंधित विभिन्न जानकारियां शिक्षा विभाग से 06 बिन्दुओं पर मांगी थीं।आरटीआई आवेदन के जवाब में शिक्षा विभाग के जन सूचना अधिकारी (PIO) ने यह तो स्वीकार किया कि सीडी इंटरनेशनल स्कूल को विभाग की ओर से कोई अनुमति नहीं दी गई है, लेकिन अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं पर आधा-अधूरा और अस्पष्ट जवाब देकर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया। इससे यह संदेह और गहरा हो गया है कि बिना वैध अनुमति के स्कूल कैसे संचालित किया जा रहा है।
गुरुग्राम निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट सुखबीर सिंह ने बताया कि सूचना अधूरी मिलने के बाद उन्होंने प्रथम अपील भी दायर की, लेकिन इसके बावजूद अब तक उन्हें संपूर्ण और स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई। यहां तक कि विभाग में बैठे लापरवाह कर्मचारी आवेदक को सूचना न मांगने की नसीहत दे रहे हैं। आवेदक का कहना है कि उसपर उक्त स्कूल के बारे में सूचना न लेने का दबाव बनाया जा रहा है। आवेदक का कहना था कि इस तरह के जिले में काफी स्कूल अवैध रूप से चल रहे हैं जिनकी अनुमति केवल एक ब्रांच की है, लेकिन शिक्षा विभाग की मिली भगत से कई ब्रांच अलग-अलग क्षेत्रों में अवैध तरीके से चल रही है। यह स्थिति न केवल आरटीआई कानून की अव्हेलना है, बल्कि शिक्षा विभाग की पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्न खड़े करती है।सूत्रों के अनुसार, यदि समय रहते शिक्षा विभाग द्वारा सही और पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जाती, तो मामले को सूचना आयोग तक ले जाया जा सकता है।
आरटीआई कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस तरह की लापरवाही से आम नागरिकों का सूचना के अधिकार पर भरोसा कमजोर होता है और अवैध गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है।अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में अपनी चुप्पी तोड़कर कब तक स्पष्ट और पूर्ण जानकारी उपलब्ध कराता है,या फिर यह मामला उच्च स्तर पर कार्रवाई का कारण बनेगा।
बता दें कि गुड़गांव के आरटीआई एक्टिविस्ट सुखबीर सिंह ने नगर निगम के जन सूचना अधिकारियों पर सही समय पर सूचना न देने पर करीब 75000 का जुर्माना राज्य सूचना आयोग से लगवाया था। वहीं जिले में चल रहे अन्य अवैध रूप से स्कूल लोग पर भी नकल कसवा चुके हैं। जिस वजह से अधिकांश सरकारी कर्मचारी उसे रंजीश रखने लगे हैं।

