
चण्डीगढ़,सतीश भारद्वाज : पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब, हरियाणा और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के जिला एवं सत्र न्यायाधीशों को निर्देश दिया है कि वे वर्तमान और पूर्व सांसदों एवं विधायकों से जुड़े सभी लंबित आपराधिक मामलों की स्थिति की जानकारी जल्द दें।
हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति यशवीर सिंह राठौड़ ने वर्ष 2023 में जारी सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के अनुसार, सांसदों और विधानसभा सदस्यों के खिलाफ लंबित आपराधिक मामलों के शीघ्र निपटारे की निगरानी के लिए स्वतः संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिए। उक्त मामले की सुनवाई के दौरान हरियाणा सरकार की ओर से पेश हुए वकील ने दलील दी कि विधायकों/सांसदों के खिलाफ कुल 13 मामले लंबित हैं, जिनमें 2025 में दर्ज एक प्राथमिकी भी शामिल है। उस प्राथमिकी में चालान दाखिल किया जा चुका है। उन्होंने आगे दलील दी कि कुल मामलों में से 11 में जांच लंबित है।
मुख्य न्यायाधीश शील नागू ने पूछा, “लोग आपकी ओर देख रहे हैं… अगर वह कोई आम आदमी होता, तो आप छह महीने में जाँच पूरी करके उसे जेल में डाल देते… मैं डीजीपी से वर्चुअली पेश होने के लिए कहूँगा। उन्हें स्पष्टीकरण देने दीजिए।”
हरियाणा सरकार के वकील ने देरी को उचित ठहराते हुए कहा कि “5000 करोड़ रुपये के घोटाले से जुड़े मामले हैं।”वहीं न्यायालय ने पाया कि पंजाब सरकार और केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन ने अपना हलफनामा दाखिल नहीं किया है। इसलिए उन्हें अपना-अपना जवाब दाखिल करने के लिए दो दिन का समय दिया गया है।
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने पाया था कि हरियाणा में हलफनामे के अनुसार, पूर्व/वर्तमान सांसदों/विधायकों के खिलाफ 16 आपराधिक मुकदमे लंबित हैं, जिनमें से एक मामले में वर्ष 2011 से और अन्य मामलों में वर्ष 2017, 2018, 2019 आदि से कार्यवाही लंबित है। जिसपर हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार के गृह सचिव को निर्देश दिया था कि वे अपना हलफनामा दाखिल करें और उन मामलों में जाँच पूरी होने में हुई देरी के बारे में यह भी बताएं कि जाँच अभी तक क्यों लंबित है। हाईकोर्ट ने यह भी कहा था कि पंजाब राज्य के पूर्व/वर्तमान सांसदों/विधायकों के विरुद्ध 28 आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें से अधिकांश हाल ही में वर्ष 2023/2024 में दर्ज किए गए हैं और कुछ मामले पहले भी दर्ज किए गए हैं।
हाईकोर्ट की बेंच ने पंजाब के गृह सचिव को भी अपना हलफनामा दाखिल करने को कहा था जिसमें पंजाब में पूर्व/वर्तमान सांसदों/विधायकों के विरुद्ध लंबित आपराधिक मामलों की जाँच पूरी होने में हुई देरी के कारणों, यदि कोई हो, का स्पष्टीकरण दिया गया हो, विशेष रूप से, “राज्य द्वारा दायर प्रारंभिक रद्दीकरण रिपोर्टों को सक्षम न्यायालयों द्वारा स्वीकार नहीं किए जाने के बाद नई जाँच रिपोर्ट प्रस्तुत करने में हुई देरी के कारणों का भी खुलासा करें।”
